फ़रवरी 12, 2026

सीरिया और बोलीविया को भारत की मानवीय चिकित्सा सहायता: वैश्विक संकट में मित्रता की मिसाल

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परिचय:
भारत ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर अपने मानवीय दृष्टिकोण और सहयोग की भावना का परिचय दिया है। 30 जुलाई 2025 को भारत ने सीरिया को जीवनरक्षक दवाइयों की एक नई खेप सौंपकर यह स्पष्ट कर दिया कि विश्व के किसी भी कोने में मानवता संकट में हो, भारत सहायता के लिए तैयार है। साथ ही, बोलीविया में खसरा और रूबेला के बढ़ते मामलों को देखते हुए भारत ने वहाँ भी महत्वपूर्ण चिकित्सा सहायता भेजी है।


सीरिया को चिकित्सा सहायता:
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने जानकारी दी कि भारत ने सीरिया को 5 मीट्रिक टन अत्यावश्यक जीवनरक्षक दवाइयाँ प्रदान की हैं। इस खेप में कैंसर रोधी दवाइयाँ, एंटीबायोटिक्स और उच्च रक्तचाप की दवाएँ शामिल हैं। यह सहायता युद्ध और संकट से प्रभावित सीरिया के नागरिकों के लिए एक संजीवनी बनकर पहुँची है।

यह भारत के उस निरंतर प्रयास का हिस्सा है, जिसके तहत वह संघर्ष-प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा और राहत सहायता पहुँचाता आ रहा है। यह कदम ना केवल भारत की संवेदनशीलता को दर्शाता है, बल्कि यह भी प्रमाणित करता है कि मानवीय संकट में भारत हमेशा वैश्विक समुदाय के साथ खड़ा रहता है।


बोलीविया को टीकों की आपूर्ति:
सीरिया के अलावा, भारत ने 17 जुलाई 2025 को बोलीविया को भी एक बड़ी सहायता भेजी। खसरा और रूबेला की बढ़ती बीमारी को देखते हुए, भारत ने 3 लाख खुराकें (डोज़) खसरा और रूबेला वैक्सीन के साथ-साथ अन्य चिकित्सा सामग्रियाँ भेजीं। यह मदद ऐसे समय पर पहुँची है जब बोलीविया ने बीमारी के प्रसार के कारण राष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल की घोषणा की है।

अब तक वहां 60 से अधिक पुष्ट मामले सामने आ चुके हैं, और कई क्षेत्रों में बीमारी के फैलने की आशंका बनी हुई है। भारत की यह मदद बोलीविया के लिए संकट के समय एक बड़ी राहत साबित हो रही है।


भारत का वैश्विक दृष्टिकोण:
भारत का यह कदम “वैश्विक दक्षिण” (Global South) में मित्र देशों के साथ खड़े होने की नीति का प्रत्यक्ष उदाहरण है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत केवल एक देश नहीं, बल्कि संकट में दोस्ती निभाने वाला एक सशक्त और भरोसेमंद साथी है।

यह नीति न केवल भारत की उदारता को उजागर करती है, बल्कि यह भी सिद्ध करती है कि विश्व में यदि कोई देश सामर्थ्य और संवेदनशीलता के साथ सहायता कर सकता है, तो वह भारत है।


निष्कर्ष:
भारत की यह मानवीय पहल केवल दवाइयाँ भेजने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन मूल्यों का परिचायक है जो मानवता, मित्रता और वैश्विक सहयोग की नींव पर आधारित हैं। सीरिया और बोलीविया की सहायता करके भारत ने यह संदेश दिया है कि संकट के समय में, दूरियों से परे जाकर भी सच्चे मित्र सहायता के लिए हमेशा तैयार रहते हैं।


“भारत का यह संकल्प स्पष्ट है — जहाँ भी मानवता संकट में होगी, वहाँ भारत की सहायता सबसे पहले पहुँचेगी।”


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