मध्य पूर्व में शांति के लिए दो-राज्य समाधान: संयुक्त राष्ट्र महासचिव की दृढ़ अपील

दिनांक: 29 जुलाई 2025 | स्थान: संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने एक बार फिर दुनिया के सामने मध्य पूर्व में स्थायी शांति के लिए दो-राज्य समाधान की वकालत की है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि इज़राइल और फिलीस्तीन को एक साथ, शांतिपूर्ण और सुरक्षित सहअस्तित्व की दिशा में आगे बढ़ना होगा, क्योंकि यही एकमात्र यथार्थवादी, न्यायसंगत और दीर्घकालिक समाधान है।
“अब समय आ गया है कि हम अंततः शांति का मार्ग चुनें,” गुतारेस ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए गए अपने जोरदार भाषण में कहा। उनका यह बयान न केवल क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बल्कि वैश्विक शांति के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
गुतारेस ने यह भी स्पष्ट किया कि शांति केवल एक विचार नहीं, बल्कि एक प्रतिबद्धता होनी चाहिए। उन्होंने यह भावुक अपील की कि शांति को अब केवल एक सपना नहीं, बल्कि एक वास्तविकता बनाना होगा — न केवल फिलीस्तीनियों और इज़रायलियों के लिए, बल्कि पूरे मध्य पूर्व और विश्व समुदाय के लिए।
द्वि-राज्य समाधान की आवश्यकता क्यों है?
मध्य पूर्व दशकों से संघर्ष, हिंसा और अस्थिरता का गवाह रहा है। इज़राइल और फिलीस्तीन के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवाद न केवल दोनों समुदायों की जान और संसाधनों को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी राजनीतिक तनाव और मानवीय संकट को जन्म दे रहा है।
गुतारेस का मानना है कि जब तक दोनों पक्ष स्वतंत्र और संप्रभु राज्यों के रूप में एक-दूसरे के अस्तित्व को स्वीकार नहीं करते, तब तक स्थायी समाधान असंभव है।
गंभीर अपील: अब और देरी नहीं
गुतारेस का यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में संघर्ष फिर से तेज़ हुआ है और आम नागरिकों की जान जा रही है। उन्होंने विश्व नेताओं, विशेष रूप से मध्य पूर्व से जुड़े देशों से अपील की कि वे अब निष्क्रिय नहीं रह सकते।
उन्होंने कहा, “यह केवल कूटनीतिक बयान देने का समय नहीं है, बल्कि अब ठोस कार्रवाई का समय है।”
विश्व समुदाय की भूमिका
महासचिव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को याद दिलाया कि शांति की यह राह केवल इज़राइल और फिलीस्तीन तक सीमित नहीं है। यह पूरी दुनिया की सामूहिक जिम्मेदारी है कि वह इस ऐतिहासिक संघर्ष का समाधान ढूंढने में सकारात्मक और निर्णायक भूमिका निभाए।
निष्कर्ष:
एंतोनियो गुतारेस की यह अपील न केवल एक भाषण है, बल्कि एक चेतावनी, एक मार्गदर्शन और एक संकल्प है — शांति के पथ पर चलने का। अब यह समय की मांग है कि दुनिया दो-राज्य समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां एक सुरक्षित और न्यायपूर्ण भविष्य में सांस ले सकें।
