ग़ाज़ा पर नेतन्याहू का रुख: आतंकवाद का अंत या कूटनीतिक चाल

यरूशलेम — इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हाल ही में आयोजित प्रेस वार्ता में विदेशी पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि इज़राइल का मक़सद ग़ाज़ा पर स्थायी कब्ज़ा जमाना नहीं है, बल्कि वहां से हमास के आतंकवादी नेटवर्क को खत्म करना है। उनके पीछे इज़राइली झंडा और राष्ट्रचिह्न साफ दिखाई दे रहे थे, जिससे यह बयान और भी प्रतीकात्मक बन गया।
🕊️ नेतन्याहू का दावा: “ग़ाज़ा को आतंकवाद से आज़ादी चाहिए”
प्रधानमंत्री का कहना है कि ग़ाज़ा में हमास की मौजूदगी न केवल इज़राइल की सुरक्षा के लिए चुनौती है, बल्कि वहां के आम नागरिकों के लिए भी एक स्थायी संकट है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इज़राइल का उद्देश्य क्षेत्रीय विस्तार नहीं, बल्कि एक ऐसा माहौल बनाना है जिसमें शांति संभव हो सके।
🌍 दुनिया की मिली-जुली प्रतिक्रिया
जहाँ कुछ अंतरराष्ट्रीय नेताओं ने इस बयान को सकारात्मक संकेत बताया, वहीं सोशल मीडिया पर विरोधी स्वर भी मुखर हुए। एक यूज़र ने पोस्ट पर टिप्पणी करते हुए लिखा—“Filthy liar” और साथ में इज़राइली झंडे की तस्वीर साझा की। इससे यह साफ झलकता है कि नेतन्याहू के शब्दों को लेकर समर्थन और आलोचना, दोनों ही बराबरी से मौजूद हैं।
🔍 ग़ाज़ा और हमास का उलझा हुआ मुद्दा
ग़ाज़ा पट्टी दशकों से संघर्ष का केंद्र रही है। हमास, जिसे कई देश आतंकवादी संगठन घोषित कर चुके हैं, वहां का प्रशासन संभालता है। इज़राइल का तर्क है कि हमास की कार्रवाइयाँ न सिर्फ उसकी सीमाओं के लिए ख़तरा हैं बल्कि ग़ाज़ा के नागरिकों के जीवन को भी अस्थिर कर देती हैं। आलोचक इसके उलट, इज़राइल की सैन्य कार्रवाइयों को निर्दोष नागरिकों के लिए नुकसानदेह बताते हैं।
🧭 मानवीय पहल या राजनीतिक संदेश?
यह बयान ऐसे समय में आया है जब ग़ाज़ा और इज़राइल के बीच तनाव चरम पर है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि नेतन्याहू का यह रुख अंतरराष्ट्रीय आलोचना को कम करने और इज़राइल की छवि को बेहतर दिखाने का प्रयास है। वहीं, अन्य विशेषज्ञ इसे सैन्य कार्रवाइयों के लिए नैतिक औचित्य जुटाने की रणनीति के रूप में देखते हैं।
🔹 निष्कर्ष
नेतन्याहू का “ग़ाज़ा की मुक्ति” वाला कथन एक संवेदनशील और जटिल राजनीतिक परिदृश्य का हिस्सा है। इस पर राय बंटी हुई है—कुछ इसे न्यायसंगत मानते हैं, तो कुछ इसे मात्र राजनीतिक चाल कहते हैं। असली सवाल यह है कि इस नीति का वास्तविक असर ग़ाज़ा के लोगों, मध्य पूर्व की स्थिरता और वैश्विक राजनीति पर क्या पड़ेगा।
