सूर्य का विज्ञान : जीवन का वास्तविक आधार
यह रहा नया लेख—

सूर्य केवल एक चमकता हुआ गोला नहीं है, बल्कि पृथ्वी पर जीवन का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत है। इसकी रोशनी और गर्मी के बिना जल, वायु और जीव-जगत का अस्तित्व असंभव हो जाता। विज्ञान की दृष्टि से देखें तो सूर्य एक मध्यम आकार का तारा है, जो गैसों का विशालकाय गोला है और लगभग 4.6 अरब वर्ष से ऊर्जा प्रदान कर रहा है।
सूर्य की उत्पत्ति और संरचना
सूर्य का निर्माण गैस और धूल के बादल से हुआ था। गुरुत्वाकर्षण बल के कारण यह बादल सिकुड़ता गया और अंततः एक विशाल ऊर्जा-स्रोत के रूप में प्रज्वलित हो उठा।
सूर्य मुख्यतः हाइड्रोजन (लगभग 74%) और हीलियम (लगभग 24%) से बना है।
इसकी प्रमुख परतें इस प्रकार हैं—
- केन्द्रीय भाग (कोर) – यही वह स्थान है जहाँ परमाणु संलयन (Nuclear Fusion) की प्रक्रिया से हाइड्रोजन परमाणु मिलकर हीलियम में बदलते हैं और अत्यधिक ऊर्जा उत्पन्न करते हैं।
- विकिरण क्षेत्र (Radiative Zone) – यहाँ से ऊर्जा धीरे-धीरे विकिरण के रूप में बाहर की ओर बढ़ती है।
- संवहन क्षेत्र (Convective Zone) – इस परत में गैसों का प्रवाह ऊर्जा को सतह तक पहुँचाता है।
- प्रकाश मंडल (Photosphere) – यही सूर्य का दृश्यमान भाग है, जहाँ से प्रकाश पृथ्वी तक पहुँचता है।
- वायुमंडलीय परतें – इसमें क्रोमोस्फीयर और कोरोना शामिल हैं। कोरोना अत्यधिक गर्म होने के बावजूद अत्यंत हल्की परत है, जो सूर्य ग्रहण के समय स्पष्ट दिखाई देती है।
ऊर्जा और जीवन पर प्रभाव
सूर्य से निकलने वाली ऊर्जा पृथ्वी के जलवायु, ऋतुओं और मौसम चक्र को नियंत्रित करती है। यही ऊर्जा पौधों में प्रकाश-संश्लेषण (Photosynthesis) की प्रक्रिया को संभव बनाती है, जिससे भोजन और ऑक्सीजन उत्पन्न होते हैं।
आधुनिक विज्ञान और सूर्य
आज वैज्ञानिक उपग्रहों और दूरबीनों की सहायता से सूर्य की गतिविधियों जैसे – सौर धब्बे, सौर तूफान और विकिरण का अध्ययन करते हैं। यह अध्ययन पृथ्वी की संचार प्रणाली और जलवायु परिवर्तन को समझने के लिए बेहद आवश्यक है।
निष्कर्ष
सूर्य केवल प्रकाश और गर्मी का स्रोत नहीं, बल्कि जीवन की धड़कन है। इसका अध्ययन हमें न केवल ब्रह्मांड की गहराई तक झाँकने का अवसर देता है बल्कि पृथ्वी के भविष्य की दिशा भी तय करता है।
