फ़रवरी 12, 2026


मानव शरीर की सुंदरता और सुरक्षा का बड़ा आधार हमारी त्वचा है। जब इसी त्वचा पर असमान रंग के दाग़ उभर आते हैं, तो व्यक्ति मानसिक रूप से असहज हो जाता है। इन दाग़ों को आम भाषा में सफेद दाग़ और चिकित्सकीय भाषा में श्वेत कुष्ठ (Vitiligo) कहा जाता है।

सफेद दाग़ बनने के प्रमुख कारण

त्वचा का रंग मेलानिन नामक तत्व से तय होता है। जब यह तत्व बनना बंद हो जाता है या इसकी मात्रा असामान्य रूप से कम हो जाती है, तो प्रभावित हिस्से का रंग सफेद दिखने लगता है। इसके मुख्य कारण निम्न हो सकते हैं—

  • आनुवंशिक प्रभाव – यदि परिवार में किसी को यह समस्या रही हो, तो आगे आने वाली पीढ़ी में भी संभावना रहती है।
  • प्रतिरक्षा तंत्र की गड़बड़ी – शरीर की इम्यून कोशिकाएँ मेलानिन बनाने वाली कोशिकाओं को नष्ट करने लगती हैं।
  • पोषण की कमी – खासकर विटामिन B12, तांबा और जिंक की कमी।
  • त्वचा पर चोट या संक्रमण – जलने, कटने या संक्रमण के बाद दाग़ स्थायी हो सकते हैं।
  • तनाव और मानसिक दबाव – लम्बे समय तक तनाव भी स्थिति को बिगाड़ सकता है।

लक्षण

  • त्वचा पर छोटे-छोटे सफेद धब्बे उभरना।
  • धीरे-धीरे धब्बों का फैलना।
  • प्रभावित हिस्से के बालों का सफेद होना।
  • धूप में दाग़ अधिक स्पष्ट नज़र आना।

उपचार

सफेद दाग़ का इलाज व्यक्ति की स्थिति और कारण पर निर्भर करता है।

  • दवाओं और मलहम द्वारा उपचार।
  • फोटोथेरेपी (UV लाइट से उपचार)
  • गंभीर मामलों में त्वचा प्रत्यारोपण (Skin Grafting)
  • घरेलू उपाय – पौष्टिक आहार, तनाव कम करना और धूप से बचाव।

बचाव के उपाय

  • हरी सब्ज़ियाँ, ताजे फल और सूखे मेवे नियमित खाएँ।
  • विटामिन B12 और मिनरल्स से भरपूर भोजन करें।
  • धूप में निकलते समय सनस्क्रीन का उपयोग करें।
  • मानसिक शांति बनाए रखें और योग-ध्यान अपनाएँ।

निष्कर्ष

सफेद दाग़ न तो संक्रामक है और न ही असाध्य। यह रोग जीवनशैली, पोषण और उचित उपचार से काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। सबसे ज़रूरी है आत्मविश्वास बनाए रखना और समय पर विशेषज्ञ से परामर्श लेना।


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