फ़रवरी 14, 2026

बैलगाड़ी से चंद्रमा तक का सफर: भारत की अंतरिक्ष यात्रा पर NCERT के विशेष मॉड्यूल

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नई दिल्ली, 23 अगस्त 2025:
भारत की अंतरिक्ष यात्रा का इतिहास अब छात्रों को और नज़दीक से जानने का अवसर मिलेगा। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम पर विशेष मॉड्यूल जारी किए हैं। इन मॉड्यूल्स का शीर्षक है “भारत: उभरती अंतरिक्ष शक्ति”, जिसमें तस्वीरों, आरेखों और समयरेखाओं (timelines) की मदद से भारत की असाधारण उपलब्धियों को प्रस्तुत किया गया है।

इन मॉड्यूल्स में 1960 के दशक में साइकिल और बैलगाड़ियों पर रॉकेट ले जाने की शुरुआती कहानियों से लेकर आज तक के ऐतिहासिक मिशनों को शामिल किया गया है। यह दर्शाता है कि कैसे भारत कम खर्च, सादगीपूर्ण लेकिन तकनीकी रूप से मज़बूत डिज़ाइन के बल पर दुनिया की अग्रणी अंतरिक्ष शक्तियों में शामिल हुआ।

अंतरिक्ष संस्थान की नींव

1962 में विक्रम साराभाई के नेतृत्व में भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान समिति (INCOSPAR) की स्थापना हुई, जिसने बाद में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का रूप लिया। ISRO ने आर्यभट (1975) जैसे पहले उपग्रह और SITE प्रयोग के माध्यम से गाँव-गाँव में टीवी पहुंचाकर भारत को नई दिशा दी।

महत्वपूर्ण मिशन और उपलब्धियाँ

मॉड्यूल्स में भारत के कई मील के पत्थर मिशनों का ज़िक्र है:

  • चंद्रयान-1 (2008): जिसने चंद्रमा पर पानी के अणुओं की खोज की।
  • मंगलयान (2013): भारत एशिया का पहला और दुनिया का पहला देश बना जिसने अपने पहले ही प्रयास में मंगल तक पहुंच हासिल की।
  • चंद्रयान-2 (2019): जिसका ऑर्बिटर आज भी चंद्रमा से महत्वपूर्ण आंकड़े भेज रहा है।
  • चंद्रयान-3 (2023): जिसने दक्षिणी ध्रुव पर सफल लैंडिंग कर भारत को इस क्षेत्र में उतरने वाला पहला देश बनाया।
  • आदित्य-L1 (2023-24): सूर्य के अध्ययन के लिए समर्पित ऐतिहासिक मिशन।

भारतीय अंतरिक्ष यात्री

मॉड्यूल्स में भारत के अंतरिक्ष यात्रियों को भी याद किया गया है।

  • राकेश शर्मा (1984): सोवियत मिशन के तहत अंतरिक्ष जाने वाले पहले भारतीय।
  • ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला (2025): जो जून 2025 में अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर रहने वाले पहले भारतीय बने।

शिक्षा के लिए प्रेरणा

ये मॉड्यूल दो स्तरों पर तैयार किए गए हैं – एक माध्यमिक स्तर के छात्रों के लिए और दूसरा वरिष्ठ माध्यमिक छात्रों के लिए। इनका उद्देश्य छात्रों को केवल अंतरिक्ष विज्ञान की जानकारी देना ही नहीं बल्कि उन्हें आत्मनिर्भरता, नवाचार और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की ओर प्रेरित करना भी है।

निष्कर्ष

भारत की अंतरिक्ष यात्रा “बैलगाड़ी से चंद्रमा तक” की कहानी है – साधारण साधनों से शुरुआत करके विश्व स्तर की उपलब्धियाँ हासिल करने तक का अद्भुत सफर। NCERT के ये मॉड्यूल न सिर्फ छात्रों को वैज्ञानिक प्रगति का ज्ञान देंगे, बल्कि उन्हें बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने की प्रेरणा भी देंगे।


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