फ़रवरी 15, 2026

इज़राइल पर अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय के आरोप और नेतन्याहू का पलटवार

0

अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में इज़राइल और उसके कदम हमेशा से चर्चा और विवाद का विषय रहे हैं। हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) ने इज़राइल के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए, जिसके बाद इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि “असल कारण कुछ और ही है, जिसे दुनिया से छिपाने की कोशिश की जा रही है।”

नेतन्याहू का आरोप

नेतन्याहू का दावा है कि ICC के आरोप केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं हैं, बल्कि इनके पीछे एक गहरी राजनीतिक साज़िश छिपी हुई है। उन्होंने इसे एक “छिपे हुए घोटाले” से जोड़ते हुए कहा कि इज़राइल को निशाना बनाना दरअसल अंतर्राष्ट्रीय शक्तियों के एजेंडे का हिस्सा है। उनका मानना है कि इज़राइल को दुनिया में आतंकवाद के खिलाफ उसकी कड़ी नीतियों के चलते अलग-थलग करने की कोशिश की जा रही है।

अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया

ICC द्वारा लगाए गए आरोपों पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में दो तरह की राय सामने आई है। एक वर्ग का मानना है कि न्यायालय का काम है कि वह सभी देशों को समान नज़र से देखे और अगर कोई मानवाधिकार उल्लंघन हुआ है तो उसकी जांच होनी ही चाहिए। वहीं दूसरा वर्ग यह मानता है कि अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर कई बार राजनीतिक दबाव और शक्तिशाली देशों का प्रभाव न्यायिक निष्पक्षता पर सवाल खड़ा कर देता है।

इज़राइल की रणनीति

नेतन्याहू की प्रतिक्रिया से साफ है कि इज़राइल किसी भी तरह से अपने ऊपर लगे आरोपों को स्वीकार करने के मूड में नहीं है। इज़राइल की रणनीति अब अंतर्राष्ट्रीय समर्थन जुटाने, अपने मित्र देशों को सक्रिय करने और ICC की प्रक्रिया पर सवाल उठाने की होगी। इससे पहले भी इज़राइल ने कई बार संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक संस्थाओं पर “भेदभावपूर्ण रवैये” का आरोप लगाया है।

भविष्य की दिशा

यह मामला केवल इज़राइल बनाम ICC का नहीं है, बल्कि यह सवाल भी उठाता है कि क्या अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं पूरी तरह निष्पक्ष हैं या फिर वे वैश्विक राजनीति के दबाव में काम करती हैं। अगर इज़राइल के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह अंतर्राष्ट्रीय न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर एक बड़ा सवाल होगा। वहीं अगर ICC अपने दावों को प्रमाणित कर देता है, तो इज़राइल की वैश्विक छवि पर गहरा असर पड़ सकता है।


🔎 निष्कर्ष
नेतन्याहू ने जिस “छिपे हुए घोटाले” की ओर इशारा किया है, उसने पूरे मामले को और अधिक पेचीदा बना दिया है। यह मामला आने वाले समय में अंतर्राष्ट्रीय राजनीति और न्याय व्यवस्था दोनों के लिए एक अहम कसौटी साबित होगा।


प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

इन्हे भी देखें