युद्ध का बदलता स्वरूप: रूस की जमीन पर यूक्रेन के निशाने

रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष अब एक नए चरण में प्रवेश कर चुका है। पहले जहाँ यूक्रेन मुख्य रूप से अपनी सीमाओं की रक्षा पर केंद्रित था, अब वह रूसी क्षेत्र के भीतर जाकर भी हमले कर रहा है। यह कदम केवल प्रतिरोध तक सीमित नहीं है, बल्कि एक सुविचारित सैन्य रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत रूस की ऊर्जा और औद्योगिक संरचना को सीधा नुकसान पहुँचाया जा रहा है।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने इन कार्रवाइयों को रूस के खिलाफ “सबसे असरदार प्रतिबंध” बताया है। उनका मानना है कि जब रूस के तेल और गैस पर आधारित ढांचे को क्षति पहुँचेगी, तो उसकी अर्थव्यवस्था और युद्ध क्षमता दोनों पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। ड्रोन और विशेष बलों की मदद से किए जा रहे इन ऑपरेशनों ने रूस के तेल शोधन संयंत्रों, टर्मिनल और डिपो को काफी हद तक प्रभावित किया है।
इन हमलों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब यूक्रेन रूसी सीमा से सैकड़ों किलोमीटर दूर स्थित ठिकानों को भी भेदने की क्षमता हासिल कर चुका है। हाल ही में, यूक्रेनी विशेष बलों ने बाल्टिक सागर के तट पर स्थित रूस के विशाल तेल टर्मिनल उस्त-लुगा पर हमला कर उसे गंभीर क्षति पहुँचाई। यह घटना यूक्रेन की बढ़ती सैन्य और खुफिया क्षमताओं की स्पष्ट झलक पेश करती है।
इस रणनीति की सफलता के पीछे विभिन्न यूक्रेनी एजेंसियों का साझा प्रयास है। सिक्योरिटी सर्विस ऑफ यूक्रेन (SBU), स्पेशल ऑपरेशंस फोर्सेज, अन्मैंड सिस्टम्स फोर्सेज, फॉरेन इंटेलिजेंस सर्विस और डिफेंस इंटेलिजेंस—सभी ने समन्वय बनाकर इन हमलों को अंजाम दिया है। उनका आपसी तालमेल ही रूस के भीतर गहराई तक पहुँचकर सटीक हमले करना संभव बना रहा है।
रूस की धरती पर इस तरह के ऑपरेशनों ने न केवल उसकी सैन्य आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है, बल्कि उसके सैनिकों के मनोबल को भी झटका दिया है। यह संकेत है कि अब युद्ध केवल मोर्चों और सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि रूस के भीतर तक फैल चुका है। इस बदली हुई रणनीति ने यूक्रेन की स्थिति को और मजबूत किया है तथा रूस पर अतिरिक्त दबाव डाल दिया है कि वह अपनी आक्रामक नीतियों पर पुनर्विचार करे।
