त्रि-सेवा संगोष्ठी में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का संदेश: राष्ट्रीय सुरक्षा के नए आयाम

🛡️ नई दिल्ली, 30 सितंबर 2025 — राजधानी दिल्ली में आयोजित त्रि-सेवा संगोष्ठी (Tri-Services Seminar) भारत की सुरक्षा नीति और सैन्य सहयोग के दृष्टिकोण से एक ऐतिहासिक अवसर साबित हुआ। इस संगोष्ठी में थल सेना, वायु सेना और नौसेना के शीर्ष अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह का संबोधन रहा, जिसमें उन्होंने बदलते वैश्विक परिदृश्य और भारत की सुरक्षा चुनौतियों पर गहन विचार व्यक्त किए।
🔍 संगोष्ठी का मूल उद्देश्य
इस संगोष्ठी का ध्येय था—तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना, संयुक्त अभियानों की रणनीतियों को और मजबूत करना तथा आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप को समझते हुए नई योजनाएँ बनाना।
🗣️ रक्षा मंत्री का दृष्टिकोण
राजनाथ सिंह ने स्पष्ट कहा कि “आज भारत की सुरक्षा का दायरा सिर्फ़ सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह साइबर स्पेस, समुद्री मार्गों और अंतरिक्ष तक विस्तारित है। हमें हर दिशा से आने वाले खतरों का सामना करने के लिए एकीकृत रणनीति अपनानी होगी।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि भारतीय सेनाएँ केवल युद्धकालीन जिम्मेदारियों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वे आपदा प्रबंधन, मानवीय राहत कार्यों और अंतरराष्ट्रीय शांति अभियानों में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
⚙️ तकनीकी नवाचार और आत्मनिर्भरता
अपने वक्तव्य में रक्षा मंत्री ने स्वदेशी तकनीक को प्राथमिकता देने पर बल दिया। उन्होंने DRDO और निजी उद्योगों की साझेदारी से आधुनिक हथियार प्रणालियों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित निगरानी साधनों और अत्याधुनिक रक्षा उपकरणों के विकास की आवश्यकता पर जोर दिया।
🎖️ सैनिकों का मनोबल और प्रशिक्षण
राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि “रक्षा बलों की वास्तविक शक्ति उनके जवानों में निहित है।” उन्होंने सैनिकों के मानसिक स्वास्थ्य, प्रशिक्षण, परिवार कल्याण और आधुनिक संसाधनों की उपलब्धता को राष्ट्रीय सुरक्षा की रीढ़ बताया।
🌐 रणनीतिक दृष्टि
इस संगोष्ठी ने यह संकेत दिया कि भारत की रक्षा नीति अब पारंपरिक युद्ध रणनीति से कहीं आगे बढ़ चुकी है। अब फोकस केवल सीमाओं की सुरक्षा पर नहीं, बल्कि साइबर आतंकवाद, ड्रोन तकनीक से जुड़े खतरे और सूचना युद्ध जैसी चुनौतियों से निपटने पर भी है। यह स्पष्ट है कि भारत खुद को वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में एक सक्रिय और निर्णायक शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
✨ निष्कर्ष
त्रि-सेवा संगोष्ठी केवल सैन्य समन्वय का मंच नहीं थी, बल्कि यह भारत की बदलती रक्षा सोच का प्रतिबिंब थी। यह आयोजन दिखाता है कि भारत अब सुरक्षा क्षेत्र में रणनीतिक योजना, तकनीकी नवाचार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से एक नए युग की ओर बढ़ रहा है।
