नक्सलवाद पर कड़ी चोट: 2025 में 270 नक्सली मारे गए, 1,225 ने हथियार डाले — सरकार की सुरक्षा रणनीति से बदल रहा है परिदृश्य

नई दिल्ली, अक्टूबर 2025 — भारत में नक्सलवाद पर केंद्र सरकार की सख्त नीति और सुरक्षा एजेंसियों की निरंतर कार्रवाई का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। वर्ष 2025 में सुरक्षा बलों ने 270 नक्सलियों को ढेर किया, 680 को गिरफ्तार किया और 1,225 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण (surrender) कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है।
यह आँकड़े देश में नक्सल प्रभावित इलाकों में बदलते हालात और जनता के बीच बढ़ते भरोसे की गवाही दे रहे हैं।
🔹 बड़े अभियान जिन्होंने नक्सल नेटवर्क को झटका दिया
2025 में सुरक्षा एजेंसियों ने कई बड़े ऑपरेशन्स चलाए, जिनमें सबसे अहम रहे —
ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट (Operation Black Forest) — छत्तीसगढ़ और ओडिशा की सीमा पर चले इस अभियान में कई शीर्ष नक्सली कमांडर मारे गए।
बीजापुर, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में सामूहिक आत्मसमर्पण — दर्जनों नक्सलियों ने हथियार डालकर सरकार के पुनर्वास कार्यक्रम का हिस्सा बनने की घोषणा की।
इन अभियानों ने नक्सलवाद की कमर तोड़ दी है और जमीनी स्तर पर सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ाया है।
🔹 आत्मसमर्पण में वृद्धि — बदलती मानसिकता का संकेत
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि 1,225 नक्सलियों का आत्मसमर्पण यह दर्शाता है कि अब नक्सली संगठन कमजोर पड़ रहे हैं और हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की इच्छा बढ़ रही है।
कई पूर्व नक्सलियों ने खुलकर कहा कि वे अब विकास योजनाओं का हिस्सा बनकर समाज में योगदान देना चाहते हैं।
🔹 सुरक्षा ढांचे को मिला नया बल
केंद्र सरकार ने बीते एक दशक में नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा ढांचे (Security Infrastructure) को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया है।
पिछले 10 वर्षों में 576 सुदृढ़ (Fortified) पुलिस स्टेशन बनाए गए हैं।
वहीं, पिछले छह वर्षों में 336 नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए हैं।
इन सुविधाओं ने सुरक्षा बलों को कठिन भू-भागों में बेहतर संचालन और त्वरित प्रतिक्रिया की क्षमता दी है।
🔹 विकास और विश्वास की रणनीति
नक्सलवाद से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें “सुरक्षा और विकास” (Security & Development) की दोहरी रणनीति पर काम कर रही हैं।
जहाँ एक ओर सेना और पुलिस नक्सल गतिविधियों पर अंकुश लगा रही हैं, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों, स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों और रोजगार योजनाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है।
इस नीति का सबसे बड़ा लाभ यह हुआ है कि अब नक्सल प्रभावित इलाकों में सरकारी योजनाएँ सीधे आम लोगों तक पहुँच रही हैं, जिससे ग्रामीणों का सरकार पर भरोसा बढ़ा है।
🔹 राष्ट्रीय एकीकरण की ओर कदम
बीजापुर, दंतेवाड़ा, गढ़चिरौली और सुकमा जैसे इलाकों में अब धीरे-धीरे शांति और विकास का माहौल लौट रहा है।
स्थानीय युवाओं में शिक्षा, खेल और रोज़गार के प्रति रुचि बढ़ी है। कई पूर्व नक्सली अब स्वयंसेवी संस्थाओं, कृषि कार्यों और पुलिस सहयोग समितियों से जुड़कर समाज में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
🔹 निष्कर्ष
2025 नक्सलवाद विरोधी संघर्ष के इतिहास में एक महत्वपूर्ण वर्ष साबित हुआ है।
सुरक्षा एजेंसियों की रणनीतिक कार्रवाई, सरकार की दृढ़ नीति और स्थानीय लोगों की भागीदारी ने यह साबित कर दिया है कि बंदूक की जगह विकास की राह ही स्थायी शांति का मार्ग है।
अब सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है — 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करना और प्रभावित क्षेत्रों को विकसित भारत के मुख्य प्रवाह से जोड़ना।
📅 वर्ष: 2025
📍 मुख्य क्षेत्र: छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, ओडिशा, झारखंड
👮 मारे गए नक्सली: 270
🚨 गिरफ्तार: 680
🤝 आत्मसमर्पण: 1,225
🏗️ सुरक्षा ढांचा: 576 फोर्टिफाइड थाने, 336 नए कैंप
