फ़रवरी 15, 2026

बहाद 1 में अधिकारी प्रशिक्षण पाठ्यक्रम का समापन: विविधता, साहस और राष्ट्रीय एकता की मिसाल 🇮🇱

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प्रस्तावना

इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हाल ही में प्रतिष्ठित बहाद 1 (BAHAD 1) सैन्य अकादमी में आयोजित कॉम्बैट ऑफिसर्स कोर्स के दीक्षांत समारोह में शिरकत की। यह समारोह केवल सैनिक प्रशिक्षण की समाप्ति का प्रतीक नहीं था, बल्कि इज़राइल की सामाजिक विविधता, सामूहिक एकजुटता और सैनिकों के साहसिक जज़्बे का एक प्रेरक चित्र भी बना।


समारोह की उल्लेखनीय झलकियाँ

  • अपने संबोधन में नेतन्याहू ने कहा कि उन्होंने इस समारोह में “इज़राइल की श्रेष्ठतम भावना” को देखा — जहाँ महिलाएँ और पुरुष, यहूदी और गैर-यहूदी, धार्मिक और धर्मनिरपेक्ष सभी एक साथ खड़े होकर राष्ट्र की सेवा के लिए तत्पर हैं।
  • यह दृश्य उस अदम्य राष्ट्रीय एकता का परिचायक है, जिसने हमेशा कठिन परिस्थितियों में भी इज़राइल को मज़बूत बनाए रखा है।
  • प्रधानमंत्री ने उन वीर सैनिकों को विशेष रूप से याद किया जिन्होंने हाल ही में हुई “रिकवरी वॉर” (War of Recovery) में असाधारण साहस दिखाया और अपने साथियों के लिए मिसाल कायम की।

वीरता और समर्पण की परंपरा

नेतन्याहू ने अपने भाषण में जोर देकर कहा कि “वीरों का युग कभी समाप्त नहीं होता।”

  • अग्रिम मोर्चों पर नेतृत्व करने वाले ये अधिकारी आने वाली पीढ़ियों के लिए साहस, अनुशासन और जिम्मेदारी के प्रतीक हैं।
  • उन्होंने यह भी कहा कि सैनिकों का वास्तविक पराक्रम केवल युद्धक्षेत्र में नहीं, बल्कि चोटों और कठिन पुनर्वास की प्रक्रिया से जूझते हुए भी झलकता है।
  • उन्होंने राष्ट्र की ओर से उन सभी घायल सैनिकों के प्रति सम्मान और एकजुटता व्यक्त की, जिन्होंने अपने बलिदान से देश की सुरक्षा को सर्वोपरि रखा।

विविधता में निहित शक्ति

इस आयोजन ने यह सन्देश दिया कि इज़राइल की वास्तविक शक्ति केवल उसके हथियारों में नहीं, बल्कि उसकी सामाजिक विविधता और साझा राष्ट्रीय पहचान में है।

  • विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक पृष्ठभूमियों से आए अधिकारी इस बात के प्रतीक हैं कि राष्ट्र की सुरक्षा और विकास हर नागरिक के समान योगदान से संभव होता है।
  • यह सन्देश आज की वैश्विक दुनिया में भी उतना ही प्रासंगिक है — जहाँ विविधता और एकता किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी पूँजी होती है।

निष्कर्ष

बहाद 1 का दीक्षांत समारोह केवल नए अधिकारियों की पदयात्रा का आरंभ नहीं, बल्कि इज़राइल के सामूहिक संकल्प और अडिग राष्ट्रीय भावना का उत्सव भी था।
प्रधानमंत्री नेतन्याहू के ये शब्द — “जनता हमेशा अपने सैनिकों के साथ खड़ी रहती है” — इस बात की पुष्टि करते हैं कि राष्ट्र और सैनिक के बीच यह अटूट बंधन ही किसी भी देश की सबसे बड़ी शक्ति है।


💡 यह समारोह न केवल सैन्य गौरव का प्रतीक था, बल्कि एक ऐसे समाज का प्रतिबिंब भी, जो विविधता में एकता की भावना से ओत-प्रोत है।


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