फ़रवरी 15, 2026

विशेष अभियान 5.0 : स्वच्छता और रचनात्मकता का अनोखा संगम

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भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा संचालित “विशेष अभियान 5.0” देशभर में स्वच्छता को नए दृष्टिकोण से परिभाषित कर रहा है। यह पहल केवल साफ-सफाई तक सीमित नहीं, बल्कि रचनात्मकता, सामुदायिक सहयोग और सतत विकास की भावना को भी मजबूत बना रही है। इस अभियान ने यह सिद्ध किया है कि जब नवाचार और जनसहभागिता साथ हों, तो साधारण कार्य भी असाधारण प्रेरणा बन सकते हैं।


🌿 कोलकाता : कचरे से सृजन की प्रेरक पहल

कोलकाता स्थित एसआरएफआई (SRFI) ने अपशिष्ट प्रबंधन को नवाचार से जोड़ते हुए एक नए स्थल का निर्माण किया है। इस पहल में कचरे को उपयोगी संसाधन में परिवर्तित किया गया, जिससे “कचरा नहीं, संसाधन है” का संदेश साकार हुआ। यह परियोजना न केवल पर्यावरण संरक्षण का उदाहरण है, बल्कि शहरी क्षेत्रों में सतत विकास की दिशा में एक प्रभावी कदम भी है।


🎨 अहमदाबाद : आकाशवाणी की दीवारों पर स्वच्छता की कला

अहमदाबाद के आकाशवाणी केंद्र ने अपने परिसर की दीवारों को स्थानीय कला और संस्कृति के चित्रों से सुसज्जित किया है। यह रचनात्मक कदम नागरिकों में स्वच्छता और सौंदर्यबोध के प्रति जागरूकता फैलाता है। पहले जो दीवारें केवल सुरक्षा का प्रतीक थीं, वे अब सामाजिक संदेशों की जीवंत कैनवस बन गई हैं। यह पहल “स्वच्छता में संस्कृति” के विचार को मूर्त रूप देती है।


💧 टोटायम : उमिया को-ऑपरेटिव का जल संरक्षण मॉडल

गुजरात के टोटायम क्षेत्र में उमिया को-ऑपरेटिव ने जल संरक्षण के लिए एक प्रेरणादायी कदम उठाया है। यहां वर्षा जल संचयन के उद्देश्य से एक बड़ा तालाब बनाया गया है, जो स्थानीय समुदाय के लिए दीर्घकालिक जल सुरक्षा का आधार बनेगा। यह परियोजना ग्रामीण भारत में पर्यावरणीय जागरूकता और सतत विकास का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करती है।


अभियान के व्यापक प्रभाव

  • स्वच्छता का व्यापक अर्थ : यह अभियान दिखाता है कि स्वच्छता केवल सफाई नहीं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय सुधार का माध्यम है।
  • जनसहयोग और नवाचार : इन पहलों की सफलता स्थानीय समुदायों और संस्थानों की सक्रिय भागीदारी का परिणाम है।
  • सतत विकास की दिशा में योगदान : कचरा प्रबंधन, कला-संवर्धन और जल संरक्षण जैसे प्रयास मिलकर सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को सशक्त रूप से आगे बढ़ाते हैं।

🕊️ निष्कर्ष

विशेष अभियान 5.0 यह दर्शाता है कि स्वच्छता केवल सरकारी पहल नहीं, बल्कि एक जनआंदोलन है। जब नागरिक और संस्थान मिलकर रचनात्मक सोच के साथ आगे बढ़ते हैं, तो स्वच्छता जीवनशैली बन जाती है। कोलकाता, अहमदाबाद और टोटायम की ये सफलताएँ पूरे देश को यह प्रेरणा देती हैं कि विकास और स्वच्छता साथ-साथ संभव हैं


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