फ़रवरी 12, 2026

कानपुर का 100 करोड़ का DSP: खुल गई कुंडली, सीएम योगी ने दिए सख्त निर्देश

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कानपुर में तैनात डिप्टी एसपी ऋषिकांत शुक्ला (DSP Rishikant Shukla) पर गाज गिर चुकी है। शासन ने उन्हें 100 करोड़ रुपये से अधिक की बेनामी संपत्ति रखने और काली कमाई को कंस्ट्रक्शन कंपनी के ज़रिए सफेद करने के गंभीर आरोपों के चलते निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देश पर की गई है और इसे अब तक की सबसे बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई माना जा रहा है।

🔹 कैसे खुली गड़बड़ी की पोल

जानकारी के अनुसार, डीएसपी ऋषिकांत शुक्ला का नाम हाल ही में सामने आए अखिलेश दुबे प्रकरण से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। जांच में पता चला कि शुक्ला ने कई वर्षों में फर्जी नामों से जमीनें खरीदीं, शेल कंपनियों के जरिए पैसा निवेश किया, और एक कंस्ट्रक्शन कंपनी के माध्यम से करोड़ों रुपये की अवैध कमाई को वैध रूप में दिखाया।

जांच एजेंसियों ने उनकी संपत्तियों की जब गहराई से छानबीन की, तो कानपुर और उसके आसपास के इलाकों में लगभग 100 करोड़ रुपये की अघोषित संपत्ति का खुलासा हुआ। इसमें आलीशान मकान, प्लॉट, फ्लैट, लग्ज़री गाड़ियां और बड़े बैंक खातों की जानकारी शामिल है।

🔹 मुख्यमंत्री योगी की सख्त नीति

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस प्रकरण पर जीरो टॉलरेंस की नीति दोहराई है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि,

“भ्रष्टाचार में लिप्त कोई भी अधिकारी बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो।”

सीएम योगी के निर्देश के बाद शासन स्तर पर कार्रवाई तेज हो गई है और इस केस की निगरानी खुद विजिलेंस और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) कर रही है।

🔹 आय से अधिक संपत्ति का खुलासा

प्रारंभिक जांच में पाया गया कि डीएसपी शुक्ला की आय के मुकाबले उनकी संपत्तियां कई गुना अधिक हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि उन्होंने अपनी नौकरी के दौरान बड़े कारोबारियों और बिल्डरों से साठगांठ कर मोटी रकम ली और उसी से आलीशान जीवनशैली बनाई।

सूत्रों के मुताबिक, शासन ने उनकी सभी बैंक खातों, संपत्ति दस्तावेजों और लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड को जब्त करने का आदेश दिया है।

🔹 आगे क्या होगा

अब यह मामला राज्य सतर्कता आयोग और आयकर विभाग के समक्ष भी रखा जा रहा है ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके। सूत्रों का कहना है कि यह सिर्फ एक अफसर तक सीमित नहीं है — इसके तार अन्य पुलिस अधिकारियों और कारोबारी समूहों तक भी जुड़ सकते हैं।

🔹 जनता में बना चर्चा का विषय

कानपुर समेत पूरे प्रदेश में यह मामला चर्चा का केंद्र बना हुआ है। लोग इसे सीएम योगी की भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम का बड़ा उदाहरण मान रहे हैं। आम जनता का कहना है कि यदि ऐसे अधिकारियों पर लगातार कार्रवाई होती रही, तो शासन-प्रशासन की छवि और मजबूत होगी।


निष्कर्ष:
डीएसपी ऋषिकांत शुक्ला का यह मामला यूपी में पुलिस सेवा में व्याप्त भ्रष्टाचार की जड़ों पर वार माना जा रहा है। 100 करोड़ की बेनामी संपत्ति का यह खुलासा आने वाले दिनों में कई और खुलासों की राह खोल सकता है। मुख्यमंत्री योगी की सख्त कार्रवाई ने यह संदेश साफ कर दिया है कि — “योगी सरकार में भ्रष्टाचार की कोई जगह नहीं है।”


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