फ़रवरी 15, 2026

दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में भीषण बाढ़ से तबाही: संयुक्त राष्ट्र ने जताया दुख, मदद का भरोसा

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दिसंबर 2025 की शुरुआत में दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के चार देशों—श्रीलंका, इंडोनेशिया, थाईलैंड और मलेशिया—को विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन का सामना करना पड़ा। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने इन देशों में भारी तबाही मचाई है, जिसके चलते 1,338 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि कई लोग अब भी लापता हैं और लाखों विस्थापित हुए हैं।


🌧️ आपदा का व्यापक प्रभाव

  • इंडोनेशिया में स्थिति सबसे गंभीर रही, जहां 744 लोगों की मौत हुई है और अनेक नागरिक अभी तक लापता बताए जा रहे हैं।
  • श्रीलंका में भीषण बाढ़ ने 410 लोगों की जान ले ली, और देश की सेना बड़े पैमाने पर राहत कार्यों में जुटी है।
  • थाईलैंड में 181 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि
  • मलेशिया में भी तीन लोगों के मारे जाने की खबर है।

अत्यधिक बारिश ने घरों से लेकर पुलों और प्रमुख सड़कों तक को क्षतिग्रस्त कर दिया है। कई स्थानों पर लोग घंटों और दिनों तक छतों, ऊंची जगहों और पेड़ों पर फंसे रहे, जिन तक पहुंचना बचाव दल के लिए चुनौती बन गया।


🌍 संयुक्त राष्ट्र का मानवीय संदेश

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस विनाशकारी आपदा पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा:

“श्रीलंका, इंडोनेशिया, थाईलैंड और मलेशिया में बाढ़ तथा भूस्खलन से हुई भारी क्षति बेहद दुखद है। मैं पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूँ और प्रभावित लोगों के साथ एकजुटता प्रकट करता हूँ। संयुक्त राष्ट्र हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए तैयार है।”

गुटेरेस का यह संदेश केवल सहानुभूति नहीं, बल्कि आपदा से उबरने के लिए वैश्विक एकता और समर्थन का संकेत भी है।


🛠️ राहत और पुनर्निर्माण की चुनौतियाँ

  • UN-Habitat ने प्रभावित देशों के लिए पुनर्वास, बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण और सुरक्षित आवास के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सहयोग की अपील की है।
  • रेड क्रॉस और रेड क्रिसेंट (IFRC) जैसी संस्थाएँ भोजन, स्वच्छ पानी, चिकित्सा सहायता और अस्थायी आश्रय उपलब्ध करा रही हैं।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून का पैटर्न अनियमित और अधिक तीव्र हो रहा है, जिससे इस तरह की घटनाओं का जोखिम लगातार बढ़ रहा है।

🔍 आगे का रास्ता: तैयारी और समाधान

इस प्राकृतिक आपदा ने यह एक बार फिर सामने ला दिया है कि दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों को केवल तात्कालिक राहत ही नहीं, बल्कि:

  • जलवायु परिवर्तन के अनुकूल रणनीतियों,
  • मजबूत आपदा प्रबंधन ढाँचे,
  • बेहतर जल निकासी और शहरी नियोजन,
  • तथा दीर्घकालिक पुनर्निर्माण योजनाओं

की अत्यंत आवश्यकता है।

ऐसे कठिन समय में संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक समुदाय की सक्रिय भागीदारी प्रभावित लोगों के लिए आशा की किरण साबित हो सकती है।


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