फ़रवरी 12, 2026

अखिलेश यादव की SIR प्रक्रिया पर सवाल: मतदाता सूची शुद्धिकरण को लेकर बढ़ी राजनीतिक हलचल

0

उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के शुद्धिकरण (SIR – Systematic Identification of Voters) को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से SIR प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग से कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं।

SIR के आँकड़े सार्वजनिक करने की माँग

अखिलेश यादव ने कहा कि प्रदेश में अब तक कितने प्रतिशत मतदाताओं का SIR पूरा हो चुका है, इस संबंध में स्पष्ट आँकड़े तुरंत सार्वजनिक किए जाएँ। उनका दावा है कि पारदर्शिता के बिना यह प्रक्रिया संदेहों को जन्म देती है।

BLO पर दबाव हटाने और अतिरिक्त संसाधन देने की अपील

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) पर अनावश्यक दबाव बनाकर काम करवाया जा रहा है, जिससे सही डेटा संग्रह प्रभावित हो सकता है। अखिलेश का कहना है कि BLO की संख्या बढ़ाते हुए अधिक अधिकारियों को समयबद्ध ढंग से जोड़ा जाए ताकि मतदाता सूची को सटीक बनाने का लक्ष्य निष्पक्ष रूप से पूरा हो।

सत्ताधारी दल के हस्तक्षेप का आरोप

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष ने यह चिंता जताई कि कथित रूप से सत्ताधारी दल के कुछ लोग और उनके समर्थक मतदाता सूची के काम में हस्तक्षेप कर रहे हैं। उन्होंने चुनाव आयोग से मांग की कि ऐसे किसी भी हस्तक्षेप को तत्काल रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएँ।

वोटर सूची से नाम हटाने की आशंका

अखिलेश यादव ने कहा कि कुछ विधानसभा क्षेत्रों में सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों—विशेषकर पिछड़े समाज—के मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाने की ‘साज़िश’ की जा रही है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर प्रहार बताते हुए विस्तृत जाँच-पड़ताल की माँग की।

सोशल मीडिया पर मिली मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ

अखिलेश यादव की इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। कुछ उपयोगकर्ताओं ने उनकी चिंताओं को जायज़ माना, जबकि अन्य ने इसे राजनीतिक बयान बताते हुए आलोचना की। कई लोगों का कहना था कि SIR प्रक्रिया प्रत्येक चुनाव से पहले होती है और इसका उद्देश्य ही मतदाता सूची को सही बनाना है।

राजनीतिक माहौल में बढ़ी सतर्कता

उत्तरी भारत के सबसे बड़े राज्य में 2026 के संभावित चुनावों को देखते हुए मतदाता सूची में किसी भी बदलाव पर राजनीतिक दलों की गहरी नजर है। ऐसे में SIR प्रक्रिया से जुड़ी हर गतिविधि राजनीतिक चर्चाओं का विषय बन रही है।

निष्कर्ष

मतदाता सूची किसी भी लोकतंत्र की नींव होती है। इसलिए उसका पारदर्शी, सटीक और निष्पक्ष तरीके से तैयार होना बेहद जरूरी है। अखिलेश यादव की यह मांगें चाहे राजनीतिक दृष्टिकोण से प्रेरित हों या जनहित में—इनसे एक बात स्पष्ट है कि SIR प्रक्रिया पर अधिक पारदर्शिता और निगरानी की आवश्यकता महसूस की जा रही है। अब देखना यह है कि चुनाव आयोग इस विवाद और चिंताओं पर क्या कदम उठाता है।


प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

इन्हे भी देखें