इटली-यूक्रेन संवाद में नई ऊर्जा: मेलोनी–ज़ेलेंस्की वार्ता ने बढ़ाई शांति की उम्मीदें

10 दिसंबर 2025 को रोम स्थित पालाज़ो कीगी में इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक ने यूरोपीय कूटनीति को एक नई दिशा देने का काम किया। यह मुलाकात सिर्फ दो देशों के आपसी संबंधों तक सीमित नहीं रही, बल्कि यूक्रेन में जारी संघर्ष को समाप्त करने की संभावनाओं को भी मजबूती प्रदान करती दिखाई दी।
🔹 वार्ता के मुख्य आयाम
1. शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर सहमति
बैठक में दोनों नेताओं ने वर्तमान शांति प्रयासों की समीक्षा करते हुए इस बात पर ज़ोर दिया कि संघर्ष का समाधान “न्यायपूर्ण और टिकाऊ” होना चाहिए। साथ ही भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा की गई, जो आने वाले महीनों में वार्ताओं को निर्णायक मोड़ दे सकती हैं।
2. यूरोपीय-अमेरिकी तालमेल की अहमियत
मेलोनी ने स्पष्ट कहा कि यूक्रेन संकट के संदर्भ में यूरोप और अमेरिका की नीतियों में तालमेल आवश्यक है। उनका मानना है कि यदि पश्चिमी देश एक स्वर में बोलें, तो समाधान की राह और स्पष्ट हो सकती है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यूक्रेन की स्थिरता यूरोप की सामूहिक सुरक्षा से गहराई से जुड़ी है।
3. मजबूत सुरक्षा ढाँचे की जरूरत
दोनों पक्ष इस नतीजे पर पहुँचे कि भविष्य में किसी भी तरह की आक्रामकता को रोकने के लिए यूक्रेन को विश्वसनीय सुरक्षा गारंटी दी जानी चाहिए। यह कदम यूक्रेन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को मजबूत करेगा।
4. रूस पर अंतरराष्ट्रीय दबाव जारी रखने की रणनीति
मेलोनी के अनुसार, रूस को सार्थक वार्ता के लिए तैयार करना तभी संभव है जब वैश्विक समुदाय उस पर एकजुट होकर कूटनीतिक दबाव बनाए रखे। यह रुख यूरोपीय संघ की मौजूदा नीतियों का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।
🇮🇹 इटली की भूमिका और प्रतिबद्धता
प्रधानमंत्री मेलोनी ने यूक्रेन के लोगों के प्रति अपनी एकजुटता दोहराते हुए कहा कि इटली न केवल वर्तमान संघर्ष में बल्कि युद्ध के बाद देश के पुनर्निर्माण में भी सक्रिय योगदान देगा। उनका यह दृष्टिकोण इटली की विदेश नीति में मानवता और रणनीति के बीच संतुलन को रेखांकित करता है।
🌍 अंतरराष्ट्रीय संदर्भ में बैठक का महत्व
यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब यूक्रेन संकट पूरी दुनिया की राजनीति में केंद्र बिंदु बना हुआ है। मेलोनी और ज़ेलेंस्की की वार्ता से यह साफ संकेत मिलता है कि यूरोप अब केवल स्थिति पर प्रतिक्रिया देने के बजाय समाधान खोजने की दिशा में सक्रिय कदम उठा रहा है। इटली जैसी प्रमुख यूरोपीय शक्ति की भूमिका इस प्रयास को और मजबूती प्रदान करती है, जिससे वैश्विक स्तर पर शांति के प्रयासों को नई गति मिलने की संभावना है।
