फ़रवरी 15, 2026

ज़ेलेंस्की का ‘ग्लोरी टू यूक्रेन’ संदेश: मोर्चे पर हौसला बढ़ाने वाली ऐतिहासिक मौजूदगी

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12 दिसंबर 2025 को यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर “ग्लोरी टू यूक्रेन 🇺🇦🇺🇦🇺🇦” लिखकर एक उत्साहवर्धक और राष्ट्रभक्ति से भरा संदेश साझा किया। इस पोस्ट में उन्होंने युद्धग्रस्त मोर्चे पर तैनात सैनिकों के साथ अपनी मुलाकात की तस्वीरें भी शामिल कीं। यह संदेश सिर्फ एक औपचारिक अभिव्यक्ति नहीं था, बल्कि संकट के दौर से गुजर रहे देश के प्रति नेतृत्व की गहरी प्रतिबद्धता का प्रतीक बना।


मोर्चे पर राष्ट्रपति की उपस्थिति: साहस और एकजुटता का संदेश

राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने खारकीव ओब्लास्ट के कुपियांस्क क्षेत्र का दौरा किया—एक ऐसा इलाका जो लंबे समय से संघर्ष की सीधी मार झेल रहा है। वहां उन्होंने अग्रिम पंक्ति के सैनिकों से हाथ मिलाया, उन्हें सम्मानित किया और उनके साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं।
बर्फ से ढके युद्धक्षेत्र में ली गई ये तस्वीरें दर्शाती हैं कि राष्ट्रपति केवल कीव के राजनीतिक गलियारों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे खुद खतरे वाले इलाकों में जाकर सैनिकों की हिम्मत बढ़ा रहे हैं।

सैनिकों के बीच राष्ट्रपति की मौजूदगी ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि यूक्रेनी नेतृत्व जमीनी वास्तविकताओं से जुड़ा है और सेना अकेली नहीं है।


कूटनीति के मोर्चे पर नई हलचल

ज़ेलेंस्की की यह यात्रा ऐसे समय हुई है जब यूक्रेन और अमेरिका के बीच सुरक्षा वार्ताएँ तेज़ हो चुकी हैं।
यूक्रेन ने 20 बिंदुओं वाला एक नया शांति प्रस्ताव तैयार किया है, जबकि अमेरिका पूर्वी यूक्रेन में एक “फ्री इकोनॉमिक ज़ोन” की अवधारणा पर विचार कर रहा है, जिसके तहत डोनेट्स्क से सेना हटाने जैसी शर्तें भी जुड़ी हैं।

ज़ेलेंस्की ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि किसी भी तरह का क्षेत्रीय परिवर्तन जनमत संग्रह के बिना संभव नहीं होगा—यानी निर्णय सीधे जनता के हाथ में रहेगा।

इसके समानांतर, वे बर्लिन में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीयर स्टारमर और अन्य यूरोपीय नेताओं के साथ महत्वपूर्ण शांति-वार्ता में शामिल होने जा रहे हैं। यह बैठक रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन द्वारा सीमित युद्धविराम की संभावनाओं पर चर्चा के बाद और भी महत्वपूर्ण हो गई है।


सैन्य मोर्चे पर उपलब्धियाँ और यूक्रेनी गर्व

यूक्रेन की नेशनल गार्ड ने हाल ही में कुपियांस्क के उत्तर में एक सफल जवाबी अभियान चलाया, जिसने रूसी दावों को चुनौती दी है।
ज़ेलेंस्की ने सैनिकों की पीठ थपथपाते हुए कहा:

“कई रूसी कुपियांस्क की बात करते हैं—लेकिन जमीन पर हकीकत क्या है, मैंने खुद जाकर देखी। हमारे जवानों ने वहाँ अद्भुत काम किया है।”

यह बयान देश के भीतर सैन्य आत्मविश्वास को बढ़ाता है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यूक्रेन की कूटनीतिक स्थिति को मजबूती देता है।


निष्कर्ष: एक प्रेरक नेतृत्व का उदाहरण

ज़ेलेंस्की का “ग्लोरी टू यूक्रेन” संदेश केवल एक नारा नहीं, बल्कि कठिन समय में एकजुटता, विश्वास और राष्ट्रीय साहस का प्रतीक है।
मोर्चे पर जाकर सैनिकों के साथ खड़े होना यह दर्शाता है कि युद्ध की घड़ी में नेतृत्व का मूल अर्थ केवल आदेश देना नहीं, बल्कि अपने लोगों के बीच उपस्थित रहना है।

ऐसे संवेदनशील समय में राष्ट्रपति का यह कदम यूक्रेनी जनता और सेना दोनों के लिए आशा, संबल और देशभक्ति की नई ऊर्जा लेकर आया है।


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