जलवायु संकट पर एंटोनियो गुटेरेस का संदेश: पेरिस समझौते के दस वर्ष पूरे होने पर विश्व एकता की पुकार

दुनिया इस समय जलवायु परिवर्तन के ऐसे दौर से गुजर रही है, जहाँ हर वर्ष नए खतरे सामने आ रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने 12 दिसंबर 2025 को पेरिस समझौते के दस वर्ष पूरे होने पर दुनिया को एकजुट होकर आगे बढ़ने का संदेश दिया। उनका यह संबोधन केवल याद दिलाने के लिए नहीं था, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए एक चेतावनी और मार्गदर्शन दोनों था।
🌍 पेरिस समझौता: एक ऐतिहासिक मील का पत्थर
2015 में फ्रांस की राजधानी पेरिस में हुए COP21 सम्मेलन में दुनिया के लगभग सभी देशों ने जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए एक अभूतपूर्व समझौते को मंजूरी दी। इसका मुख्य उद्देश्य था—
- वैश्विक तापमान वृद्धि को औद्योगिक युग से पहले के स्तरों की तुलना में 2 डिग्री सेल्सियस से नीचे रखना
- तथा 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के लिए प्रयासों को तेज करना।
यह समझौता पर्यावरण संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की अब तक की सबसे व्यापक और सामूहिक प्रतिबद्धता माना गया।
🗼 गुटेरेस का संदेश: चेतावनी और उम्मीद का संगम
दसवीं वर्षगांठ के अवसर पर गुटेरेस ने कहा कि
दुनिया ने एक दशक पहले जिस साहस और दूरदृष्टि का परिचय देते हुए पेरिस समझौता स्वीकार किया था, उसी संकल्प को आज अधिक मजबूती से दोहराने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जलवायु संकट अब सिर्फ पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व के लिए एक निर्णायक चुनौती बन चुका है।
उनके अनुसार, यदि राष्ट्र मिलकर निर्णायक कदम उठाएँ, तो पृथ्वी के लिए एक सुरक्षित और रहने योग्य भविष्य का निर्माण संभव है।
🔥 दस वर्षों की यात्रा: उपलब्धियाँ और अधूरे लक्ष्य
पिछले वर्षों में कई सकारात्मक कदम जरूर उठाए गए, लेकिन चुनौतियाँ अब भी भारी हैं—
- कई देशों ने उत्सर्जन कम करने की दिशा में नीतिगत सुधार किए हैं, फिर भी तापमान वृद्धि की रफ्तार चिंताजनक बनी हुई है।
- नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश बढ़ा है, लेकिन दुनिया का बड़ा हिस्सा अभी भी जीवाश्म ईंधन के सहारे चलता है।
- विकासशील देशों को अनुकूलन एवं शमन उपायों पर काम करने के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता अब भी नहीं मिल पा रही है।
ये तथ्य बताते हैं कि प्रयासों की गति अभी भी लक्ष्य के अनुरूप नहीं है।
🤝 क्यों जरूरी है वैश्विक एकजुटता?
गुटेरेस का मानना है कि जलवायु परिवर्तन पर विजय पाने के लिए केवल वैज्ञानिक समाधान पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति, आर्थिक साहस और नैतिक प्रतिबद्धता की भी आवश्यकता है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जलवायु न्याय—अर्थात् कमजोर और प्रभावित देशों की सहायता—पेरिस समझौते की भावना का मूल हिस्सा है।
उनके अनुसार, जब तक सभी देश समान दृष्टिकोण और साझा उद्देश्य के साथ आगे नहीं बढ़ेंगे, तब तक वास्तविक परिवर्तन संभव नहीं होगा।
📢 निष्कर्ष
पेरिस समझौते के दस वर्ष पूरे होना केवल एक प्रतीकात्मक अवसर नहीं है, बल्कि यह दुनिया को याद दिलाता है कि समय तेजी से निकल रहा है। एंटोनियो गुटेरेस का संदेश हमें चेतावनी देता है कि अगर आज ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
अब निर्णय दुनिया के नेताओं और वैश्विक समुदाय के हाथ में है—
क्या वे साहस दिखाकर पृथ्वी के भविष्य की रक्षा करेंगे, या फिर समय हाथ से निकलने देंगे?
