पुलिस प्रशिक्षण पर अखिलेश यादव का हमला: भाजपा सरकार की कानून-व्यवस्था पर फिर सवाल

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाज़ी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राज्य में पुलिस बल के प्रशिक्षण को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो का हवाला देते हुए पुलिस व्यवस्था की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
वायरल वीडियो बना सियासी हथियार
अखिलेश यादव द्वारा साझा किए गए वीडियो में कुछ पुलिसकर्मी हथियारों को सही ढंग से संभालने में असहज दिखाई दे रहे हैं। इस वीडियो को आधार बनाकर उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मौजूदा व्यवस्था में पुलिस की वास्तविक ट्रेनिंग पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। उनका तंज था कि यदि पुलिसकर्मी हथियार तैयार करने में ही समय लगा देंगे, तो अपराधी आसानी से मौके से फरार हो जाएंगे।
“प्रशिक्षण नहीं, केवल औपचारिकता”
सपा प्रमुख का आरोप है कि भाजपा शासन में पुलिस बल को सिर्फ औपचारिक कार्यक्रमों और दिखावटी अनुशासन तक सीमित कर दिया गया है। उन्होंने दावा किया कि जमीनी स्तर पर न तो आधुनिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है और न ही अपराध से प्रभावी ढंग से निपटने की व्यावहारिक तैयारी कराई जा रही है।
अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि पुलिस को कई गैर-जरूरी जिम्मेदारियों में उलझा दिया गया है, जिससे उनके पेशेवर कौशल का विकास बाधित हो रहा है।
भर्ती व्यवस्था पर भी उठाए सवाल
यह पहली बार नहीं है जब अखिलेश यादव ने पुलिस व्यवस्था को लेकर सरकार को घेरा हो। इससे पहले भी वे भर्ती प्रक्रिया की धीमी गति पर सवाल उठा चुके हैं। उनका कहना है कि यदि भर्ती में वर्षों लगते रहेंगे, तो बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी सेवानिवृत्त हो जाएंगे और बल की कमी और गहराएगी। इससे न केवल सुरक्षा व्यवस्था कमजोर होगी, बल्कि मौजूदा पुलिसकर्मियों पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।
भाजपा की ओर से क्या कहा जा रहा है
हालांकि भाजपा नेतृत्व की ओर से इस ताज़ा बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन पार्टी से जुड़े नेताओं और समर्थकों का दावा है कि सरकार पुलिस आधुनिकीकरण, तकनीकी संसाधनों और प्रशिक्षण ढांचे को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है। उनका कहना है कि विपक्ष केवल राजनीतिक लाभ के लिए मुद्दों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है।
जनता और राजनीति पर असर
इस विवाद ने राजनीतिक हलकों के साथ-साथ आम नागरिकों के बीच भी चिंता पैदा कर दी है। राज्य सरकार द्वारा बार-बार दोहराई जाने वाली “अपराध के प्रति सख्ती” की नीति पर अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या पुलिस बल वास्तव में उस स्तर पर तैयार है, जो इस नीति को प्रभावी ढंग से लागू कर सके।
निष्कर्ष
अखिलेश यादव का यह हमला भाजपा सरकार के लिए केवल एक राजनीतिक चुनौती नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही का सवाल भी है। पुलिस प्रशिक्षण, भर्ती और संसाधनों की स्थिति सीधे तौर पर जनता की सुरक्षा से जुड़ी हुई है। यदि इन मुद्दों पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो कानून-व्यवस्था को लेकर किए गए दावे केवल भाषणों तक ही सीमित रह सकते हैं।
