फ्रांस की पहल से सक्रिय हुआ ‘Coalition of the Willing’: यूक्रेन युद्ध पर कूटनीति का नया अध्याय

रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर वैश्विक कूटनीति एक बार फिर गति पकड़ती दिख रही है। वर्ष 2025 के अंत में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने एक ऐसी बहुपक्षीय राजनीतिक पहल की घोषणा की, जिसने यूरोप, अमेरिका और यूक्रेन को एक साझा मंच पर ला दिया। इस प्रयास का उद्देश्य युद्ध की समाप्ति के साथ-साथ यूक्रेन के लिए भरोसेमंद सुरक्षा व्यवस्था का निर्माण करना है।
🇫🇷 पेरिस में प्रस्तावित बैठक: इच्छुक देशों का संगठित मंच
मैक्रों के अनुसार, जनवरी की शुरुआत में पेरिस में ‘Coalition of the Willing’ नाम से एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की जाएगी। इस मंच का लक्ष्य उन देशों को एकत्र करना है जो युद्ध के बाद यूक्रेन की सुरक्षा में प्रत्यक्ष भूमिका निभाने को तैयार हैं। अब तक लगभग 39 देशों की भागीदारी सामने आई है, जिनमें यूरोपीय संघ के प्रमुख सदस्य, ब्रिटेन, अमेरिका और अन्य रणनीतिक साझेदार शामिल हैं।
इस बैठक में प्रत्येक देश की भूमिका और सुरक्षा योगदान को अंतिम रूप देने की तैयारी है, जिससे भविष्य की रणनीति स्पष्ट हो सके।
🔐 यूक्रेन के लिए सुरक्षा ढाल: युद्ध के बाद की रणनीति
इस गठबंधन की एक अहम विशेषता ‘Reassurance Force’ की अवधारणा है। इसके अंतर्गत करीब 26 देशों ने संकेत दिया है कि वे युद्ध समाप्ति के बाद यूक्रेन में सैन्य तैनाती, प्रशिक्षण या रक्षा सहयोग के लिए तैयार हैं। इसका मकसद केवल सैन्य उपस्थिति नहीं, बल्कि यूक्रेन की सीमाओं, संप्रभुता और दीर्घकालिक स्थिरता की गारंटी देना है।
🗣️ मैक्रों-ट्रंप-ज़ेलेंस्की संवाद: मतभेद और स्पष्ट संदेश
पेरिस बैठक से पहले फ्रांस और यूरोप के अन्य नेताओं ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की के साथ एक वर्चुअल चर्चा की। इस बातचीत में ट्रंप ने रूस के साथ संभावित शांति संवाद को आगे बढ़ाने की अपनी सोच साझा की।
हालाँकि, यूरोपीय नेताओं ने एक स्वर में यह रेखांकित किया कि यूक्रेन की सहमति और भागीदारी के बिना किसी भी शांति समझौते को वैध नहीं माना जाएगा।
🇪🇺 बनाम 🇺🇸 : नेतृत्व को लेकर बढ़ती बहस
इस पहल के बाद वैश्विक विश्लेषकों के बीच नेतृत्व को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। भारतीय रणनीतिक विश्लेषक नीलोत्पल श्रीवास्तव ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध में निर्णायक नेतृत्व यूरोप को स्वयं संभालना चाहिए, न कि पूरी जिम्मेदारी अमेरिका पर डालनी चाहिए।
उन्होंने अमेरिकी विचारक विक्टर डेविस हैनसन के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि यूरोपीय देशों को अपनी जनता और अमेरिकी नागरिकों को यह स्पष्ट करना होगा कि वे सामूहिक सुरक्षा के लिए स्वयं क्या योगदान दे रहे हैं।
🔍 निष्कर्ष: शांति की राह या कूटनीतिक परीक्षा?
‘Coalition of the Willing’ एक ऐसा प्रयास है जो केवल बयानबाज़ी से आगे बढ़कर साझा सुरक्षा ढांचे की ओर संकेत करता है। लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या यह गठबंधन रूस पर प्रभावी दबाव बना पाता है और यूक्रेन को वास्तविक सुरक्षा आश्वासन देने में सक्षम होता है।
यह पहल न सिर्फ यूरोप की रणनीतिक आत्मनिर्भरता को परिभाषित करती है, बल्कि अमेरिका-यूरोप संबंधों में बदलते शक्ति संतुलन की तस्वीर भी पेश करती है।
