फ़रवरी 12, 2026

नेतन्याहू की माफी पर ट्रंप की दखलअंदाज़ी: अंतरराष्ट्रीय राजनीति में उठा नया तूफ़ान

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अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को माफ़ी दिए जाने की सार्वजनिक वकालत ने वैश्विक कूटनीति में एक असहज बहस को जन्म दे दिया है। यह विवाद तब और गहराया जब ट्रंप ने दावा किया कि इज़राइल के राष्ट्रपति आइज़ैक हर्ज़ोग से बातचीत में उन्हें यह संकेत मिला है कि नेतन्याहू को माफ़ी दिए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। हालांकि, इज़राइली राष्ट्रपति भवन ने इस दावे को तथ्यहीन बताते हुए स्पष्ट रूप से नकार दिया।

भ्रष्टाचार के आरोपों के घेरे में नेतन्याहू

बेंजामिन नेतन्याहू आधुनिक इज़राइली राजनीति के ऐसे नेता हैं, जिनकी प्रशासनिक पकड़ जितनी मज़बूत रही है, उतनी ही गहन कानूनी चुनौतियाँ भी उनके सामने खड़ी हुई हैं। वर्ष 2019 में उनके विरुद्ध तीन अलग-अलग मामलों में गंभीर आरोप तय किए गए, जिनमें रिश्वत लेना, धोखाधड़ी और सार्वजनिक विश्वास को ठेस पहुँचाना शामिल है। अभियोजन एजेंसियों का कहना है कि सत्ता का उपयोग कर उन्होंने कारोबारी लाभ और अनुकूल मीडिया समर्थन हासिल किया।

ट्रंप का बयान और उसका निहितार्थ

29 दिसंबर 2025 को फ्लोरिडा के मार-ए-लागो में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने नेतन्याहू का खुलकर बचाव किया। उन्होंने उन्हें “देश को संकट से निकालने वाला नेता” बताते हुए यह सवाल भी उछाला कि ऐसे व्यक्ति को माफ़ी क्यों नहीं दी जानी चाहिए। ट्रंप का यह कहना कि राष्ट्रपति हर्ज़ोग स्वयं उन्हें माफी की प्रगति से अवगत करा चुके हैं, विवाद का केंद्रीय बिंदु बन गया।

राष्ट्रपति हर्ज़ोग का स्पष्ट खंडन

इज़राइली राष्ट्रपति कार्यालय ने बिना देर किए ट्रंप के बयान पर प्रतिक्रिया दी। आधिकारिक वक्तव्य में कहा गया कि माफी के विषय में हाल के दिनों में हर्ज़ोग और ट्रंप के बीच कोई संवाद नहीं हुआ है। कार्यालय के अनुसार, केवल कुछ समय पहले ट्रंप पक्ष के एक प्रतिनिधि ने सामान्य कानूनी जानकारी मांगी थी, जिसे संविधान और कानून के दायरे में समझा दिया गया था — इससे अधिक कुछ नहीं।

न्याय प्रणाली बनाम राजनीतिक दबाव

इस घटनाक्रम ने इज़राइल की न्यायिक स्वतंत्रता को लेकर एक नई बहस खड़ी कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी बाहरी नेता द्वारा खुले तौर पर न्यायिक प्रक्रिया पर प्रभाव डालने की कोशिश करना न केवल अनुचित है, बल्कि यह लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वायत्तता पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है। वहीं, हर्ज़ोग का सख़्त रुख यह संकेत देता है कि इज़राइली न्याय व्यवस्था राजनीतिक दबावों से ऊपर रहकर कार्य करना चाहती है।

अमेरिका–इज़राइल संबंधों पर असर

ट्रंप की टिप्पणी को कई विश्लेषक कूटनीतिक मर्यादाओं के उल्लंघन के रूप में देख रहे हैं। अमेरिका और इज़राइल के रिश्ते ऐतिहासिक रूप से मज़बूत रहे हैं, लेकिन इस तरह के सार्वजनिक बयान दोनों देशों के संवैधानिक ढाँचों के बीच असहज स्थिति पैदा कर सकते हैं।

निष्कर्ष

नेतन्याहू की संभावित माफ़ी अब केवल एक कानूनी प्रश्न नहीं रह गई है; यह अंतरराष्ट्रीय राजनीति, कूटनीतिक संतुलन और लोकतांत्रिक मूल्यों की परीक्षा बन चुकी है। ट्रंप के दावे और हर्ज़ोग के खंडन के बीच सच क्या रूप लेता है, यह आने वाला समय तय करेगा। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि यह मामला बयानबाज़ी से कहीं आगे जा चुका है।


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