चित्रकूट में कोषागार घोटाला और ठगी मामलों पर कड़ी कार्रवाई: कानून व्यवस्था की परीक्षा में सफल पुलिस

उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले में सामने आया कोषागार घोटाला केवल एक आर्थिक अपराध नहीं रहा, बल्कि इसने शासन-प्रशासन की निगरानी प्रणाली और जवाबदेही पर गहरे सवाल खड़े किए। वहीं, पुलिस और जांच एजेंसियों की सक्रिय भूमिका ने यह संकेत भी स्पष्ट कर दिया कि अब भ्रष्टाचार और ठगी के मामलों को लेकर किसी भी स्तर पर ढील नहीं बरती जाएगी।
कैसे उजागर हुआ कोषागार घोटाला
जांच के दौरान सामने आया कि वर्ष 2018 से 2025 के बीच चित्रकूट कोषागार से जुड़े रिकॉर्ड में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गईं। करीब 93 पेंशनधारकों के खातों का दुरुपयोग कर लगभग 43.13 करोड़ रुपये की राशि फर्जी तरीके से हस्तांतरित कर दी गई। यह घोटाला सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया, जिसमें सिस्टम की कमजोरियों का लाभ उठाया गया।
पुराने पदस्थापन की भी जांच के दायरे में एंट्री
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जांच का दायरा और व्यापक किया। एजेंसी ने वर्ष 1999 से अब तक कोषागार में तैनात रहे अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल शुरू की है।
- कुल 7 अधिकारियों और 27 कर्मचारियों की चल एवं अचल संपत्तियों की जानकारी एकत्र की जा रही है
- यह पहल दर्शाती है कि जांच सिर्फ वर्तमान तक सीमित न रहकर, वर्षों पुरानी जवाबदेही को भी चिन्हित कर रही है
- इस कार्रवाई की गूंज राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों तक सुनाई दी
ठगी मामलों पर भी पुलिस का सख्त रुख
कोषागार घोटाले के समानांतर चित्रकूट पुलिस ने अन्य ठगी के मामलों में भी आक्रामक रणनीति अपनाई। अलग-अलग अभियानों के तहत 15 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, जिनमें कोषागार के कर्मचारी और महिलाएं भी शामिल थीं।
यह पूरी कार्रवाई मिशन शक्ति अभियान के अंतर्गत की गई, जिसका उद्देश्य न केवल आर्थिक अपराधों पर लगाम लगाना है, बल्कि महिलाओं से जुड़े अपराधों और ठगी नेटवर्क को भी तोड़ना है।
सोशल मीडिया पर पारदर्शिता का संदेश
चित्रकूट पुलिस ने अपनी कार्रवाई की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर साझा की। #GoodWorkUPPolice और #UPPoliceInNews जैसे हैशटैग्स के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि पुलिस सिर्फ कार्रवाई ही नहीं कर रही, बल्कि जनता के सामने जवाबदेह भी है।
इस डिजिटल पहल से पुलिस की कार्यशैली में पारदर्शिता झलकती है और आम नागरिकों का भरोसा मजबूत होता है।
निष्कर्ष: अपराध से बड़ा है कानून
चित्रकूट कोषागार घोटाला यह दिखाता है कि जब व्यवस्था में निगरानी कमजोर होती है, तो भ्रष्टाचार पनपता है। लेकिन पुलिस और जांच एजेंसियों की समयबद्ध और निष्पक्ष कार्रवाई यह भी साबित करती है कि कानून का प्रभाव किसी भी भ्रष्ट तंत्र से कहीं अधिक मजबूत है।
जनता का भरोसा तभी कायम रह सकता है जब अपराध चाहे कितना भी पुराना या जटिल क्यों न हो, उसे तार्किक जांच और न्यायिक कार्रवाई के जरिए अंजाम तक पहुंचाया जाए।
