फ़रवरी 12, 2026

आर्थिक आत्मनिर्भरता से संरचनात्मक मजबूती तक: प्रधानमंत्री मोदी और अर्थशास्त्रियों का अहम मंथन

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भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दीर्घकालिक परिकल्पना के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 दिसंबर 2025 को देश के प्रमुख अर्थशास्त्रियों और नीति विशेषज्ञों के साथ एक गहन विचार-विमर्श किया। यह संवाद केंद्रीय बजट 2026-27 की तैयारियों से जुड़ा था, लेकिन इसका दायरा केवल बजटीय उपायों तक सीमित नहीं रहा। चर्चा का मुख्य विषय था—“आत्मनिर्भरता और संरचनात्मक परिवर्तन: विकसित भारत की आधारशिला”

बजट से आगे की सोच

प्रधानमंत्री मोदी ने इस बैठक को केवल परामर्श का मंच नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक दिशा तय करने वाला संवाद बताया। इस चर्चा में यह स्पष्ट किया गया कि आत्मनिर्भर भारत का अर्थ आत्मकेंद्रित होना नहीं, बल्कि ऐसी मजबूत आर्थिक संरचना विकसित करना है जो वैश्विक चुनौतियों का सामना कर सके और प्रतिस्पर्धा में आगे रहे।

नीतिगत स्तर पर व्यापक सहभागिता

बैठक में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी सहित अनेक प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री और क्षेत्रीय विशेषज्ञ मौजूद रहे। इससे पहले सरकार द्वारा कृषि, उद्योग, MSME, सेवा क्षेत्र, पूंजी बाजार, डिजिटल अर्थव्यवस्था, पर्यटन और श्रम क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ चरणबद्ध बजट पूर्व परामर्श किए जा चुके थे। यह प्रक्रिया दर्शाती है कि नीति निर्माण में बहुस्तरीय सहभागिता को महत्व दिया जा रहा है।

चर्चा के प्रमुख बिंदु

विचार-विमर्श के दौरान कई अहम मुद्दे सामने आए:

  • संरचनात्मक बदलाव की आवश्यकता: आर्थिक विकास को स्थायी बनाने के लिए कर सुधार, श्रम सुधार और निवेश-अनुकूल नीतियों पर जोर।
  • आत्मनिर्भरता का नया दृष्टिकोण: घरेलू उत्पादन के साथ-साथ तकनीकी नवाचार, शोध और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भागीदारी।
  • MSME और नवाचार आधारित स्टार्टअप्स: छोटे उद्यमों को पूंजी, तकनीक और बाजार तक बेहतर पहुंच दिलाने के सुझाव।
  • कृषि और ग्रामीण विकास: किसानों की आय बढ़ाने के लिए आपूर्ति श्रृंखला, प्रसंस्करण और निर्यात क्षमता में सुधार।
  • डिजिटल और सेवा अर्थव्यवस्था: डिजिटल इंडिया की ताकत को वैश्विक सेवाओं और रोजगार सृजन में बदलने की रणनीति।

विकसित भारत के लक्ष्य की ओर

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस तरह के संवाद नीतियों को अधिक व्यावहारिक, समावेशी और भविष्य-उन्मुख बनाते हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अर्थशास्त्रियों द्वारा दिए गए सुझावों को बजट और आगामी आर्थिक नीतियों में समुचित स्थान दिया जाएगा, ताकि विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे।

निष्कर्ष

अर्थशास्त्रियों के साथ प्रधानमंत्री की यह बैठक भारत के आर्थिक परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा सकती है। आत्मनिर्भरता को संरचनात्मक मजबूती और नवाचार से जोड़कर सरकार ने यह संकेत दिया है कि भारत केवल तेज़ विकास ही नहीं, बल्कि संतुलित और टिकाऊ विकास की ओर अग्रसर है। यह पहल आने वाले वर्षों में भारत को एक सशक्त वैश्विक अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करने की नींव रखती है।


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