देहरादून छात्र हत्याकांड: अंजेल चकमा की मौत ने उठाए सुरक्षा पर गंभीर सवाल, SIT जांच में तेज़ी

देहरादून में पढ़ाई के लिए आए त्रिपुरा निवासी छात्र अंजेल चकमा की हत्या ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। 24 वर्षीय अंजेल एक एमबीए छात्र था, जिस पर 9 दिसंबर की रात कुछ युवकों ने जानलेवा हमला किया। चाकू और अन्य घातक हथियारों से किए गए इस हमले में अंजेल गंभीर रूप से घायल हो गया था, जिसके बाद इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। यह घटना न केवल एक छात्र की जान जाने का मामला है, बल्कि शहरों में बढ़ती असुरक्षा की ओर भी इशारा करती है।
विशेष जांच दल के ज़रिये मामले की परतें खोलने की कोशिश
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए देहरादून पुलिस ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। देहरादून के एसएसपी अजय सिंह के आदेश पर बनाई गई इस टीम का नेतृत्व एसपी ग्रामीण पंकज गैरोला को सौंपा गया है। जांच के तहत घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि हमलावरों की गतिविधियों की कड़ी जोड़ी जा सके।
फरार आरोपी की तलाश तेज़, इनाम घोषित
जांच में सामने आया है कि घटना का मुख्य आरोपी यज्ञराज अवस्थी वारदात के तुरंत बाद देहरादून छोड़कर फरार हो गया। पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए एक लाख रुपये के इनाम की घोषणा की है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, आरोपी के उत्तराखंड के सीमावर्ती इलाकों में छिपे होने की आशंका जताई जा रही है। उसे पकड़ने के लिए अलग-अलग टीमों को तैनात किया गया है।
गिरफ्तारियां, धाराओं में बदलाव और मज़बूत होता केस
पुलिस अब तक पांच आरोपियों को हिरासत में ले चुकी है। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे मामले में कानूनी धाराएं भी जोड़ी जा रही हैं। पूरक रिपोर्ट और पीड़ित पक्ष के बयान दर्ज कर केस को अदालत में मज़बूती से पेश करने की तैयारी की जा रही है।
राजनीतिक हलकों तक पहुंचा मामला, छात्र संगठनों में आक्रोश
इस हत्याकांड की जानकारी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को भी दी गई है। वहीं, देश के अलग-अलग हिस्सों में छात्र संगठनों ने विरोध जताया है। दिल्ली में एनएसयूआई द्वारा कैंडल मार्च निकालकर दोषियों को सख़्त सज़ा देने की मांग की गई। सोशल मीडिया पर भी न्याय की मांग ज़ोर पकड़ रही है, जिससे यह साफ है कि यह मामला अब केवल स्थानीय नहीं रहा।
निष्कर्ष
अंजेल चकमा की हत्या यह सोचने पर मजबूर करती है कि शिक्षा के नाम पर दूसरे राज्यों से आने वाले छात्रों की सुरक्षा कितनी ठोस है। SIT की जांच, पुलिस की कार्रवाई और जनदबाव—तीनों मिलकर यह तय करेंगे कि पीड़ित को कितनी जल्दी और कितनी सख़्ती से न्याय मिल पाता है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि फरार आरोपी कब कानून के शिकंजे में आता है।
