उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती में आयु सीमा राहत की मांग: युवाओं का डिजिटल आंदोलन

उत्तर प्रदेश में पुलिस भर्ती को लेकर एक बार फिर युवाओं का आक्रोश सतह पर आ गया है। वर्षों से सरकारी नौकरियों की राह देख रहे हजारों अभ्यर्थी अब आयु सीमा में छूट की मांग को लेकर संगठित हो रहे हैं। यह कोई साधारण मांग नहीं, बल्कि उन युवाओं की पीड़ा है, जिनका भविष्य बार-बार टलती भर्ती प्रक्रियाओं की भेंट चढ़ गया।
⏳ देरी की कीमत चुका रहे युवा
उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा दिसंबर 2025 में 32,679 पदों के लिए भर्ती अधिसूचना जारी की गई। यह घोषणा भले ही बड़ी संख्या में पदों के कारण चर्चा में रही हो, लेकिन कई युवाओं के लिए यह खुशी अधूरी साबित हुई। पिछले कई वर्षों तक भर्ती प्रक्रिया में अनिश्चितता और विलंब के चलते अनेक उम्मीदवार आयु सीमा पार कर चुके हैं, जिससे वे आवेदन से वंचित हो गए।
📱 सोशल मीडिया बना संघर्ष का मंच
इस अन्याय के खिलाफ अभ्यर्थियों ने सोशल मीडिया को अपनी आवाज़ बनाने का फैसला किया। ट्विटर (एक्स) पर #UPPAgeRelaxation हैशटैग के साथ एक व्यापक अभियान शुरू हुआ, जिसमें लाखों युवाओं ने सरकार से आयु सीमा में कम से कम तीन साल की छूट देने की मांग रखी। यह अभियान धीरे-धीरे जन आंदोलन का रूप लेने लगा।
राजनीतिक हलकों में भी इस मुद्दे की गूंज सुनाई दी। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने ट्वीट के माध्यम से सरकार से आग्रह किया कि वह नए वर्ष के अवसर पर युवाओं को राहत देते हुए आयु सीमा में छूट देने पर विचार करे।
📝 अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगें
युवाओं का कहना है कि उनकी मांगें पूरी तरह जायज़ और तर्कसंगत हैं:
- तीन वर्ष की आयु सीमा छूट, ताकि प्रभावित अभ्यर्थियों को एक और अवसर मिल सके
- भर्ती कैलेंडर को नियमित और समयबद्ध बनाया जाए
- चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित किया जाए
⚖️ सामाजिक और राजनीतिक महत्व
यह आंदोलन केवल नौकरी की मांग नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ सवाल उठाने की पहल है। बेरोजगारी की मार झेल रहे युवाओं का विश्वास सिस्टम से डगमगाने लगा है। यदि सरकार इस मांग को स्वीकार करती है, तो यह न केवल हजारों युवाओं को राहत देगा, बल्कि शासन के प्रति भरोसा भी मजबूत करेगा।
🔍 निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती में आयु सीमा छूट का विषय अब एक संवेदनशील सामाजिक मुद्दा बन चुका है। यह फैसला सरकार के लिए एक परीक्षा की तरह है—क्या वह युवाओं के खोए हुए वर्षों की भरपाई करेगी या उन्हें फिर इंतज़ार के अंधेरे में छोड़ देगी। न्यायसंगत निर्णय ही युवाओं के भविष्य और भरोसे को सुरक्षित रख सकता है।
