सुचित्रा मित्रा की पुण्यतिथि: स्वर, साधना और संस्कृति को नमन

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की श्रद्धांजलि के बहाने एक अमर विरासत का स्मरण
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रवींद्र संगीत की महान गायिका सुचित्रा मित्रा की पुण्यतिथि पर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए बंगाली सांस्कृतिक परंपरा को एक बार फिर सम्मानित किया। यह अवसर केवल एक कलाकार को याद करने का नहीं, बल्कि उस सांस्कृतिक चेतना को प्रणाम करने का है, जिसने बंगाल की आत्मा को स्वर दिए।
सुचित्रा मित्रा: जिनकी आवाज़ में रवींद्र दर्शन जीवित हुआ
रवींद्र संगीत की दुनिया में सुचित्रा मित्रा का स्थान किसी संस्थान से कम नहीं माना जाता।
19 सितंबर 1924 को जन्मी सुचित्रा मित्रा ने अपने संपूर्ण जीवन को रवींद्रनाथ ठाकुर की काव्यात्मक रचनाओं को संगीत के माध्यम से जनमानस तक पहुँचाने के लिए समर्पित कर दिया। उनका निधन 3 जनवरी 2011 को कोलकाता में हुआ, लेकिन उनका संगीत आज भी समय की सीमाओं से परे जीवित है।
वे केवल एक गायिका नहीं थीं—
वे एक संस्कृतिक साधिका, गंभीर शिक्षिका और विचारशील कलाकार थीं, जिनके लिए गायन केवल प्रस्तुति नहीं, बल्कि साधना था।
रवींद्र संगीत की आत्मा को संजोने वाली कलाकार
सुचित्रा मित्रा ने टैगोर के गीतों को जिस भावात्मक संयम, गहनता और शुद्धता के साथ प्रस्तुत किया, उसने रवींद्र संगीत की शास्त्रीय गरिमा को नई ऊँचाई दी।
उनका मानना था कि रवींद्र संगीत केवल सुरों का संयोजन नहीं, बल्कि दर्शन, संवेदना और मानवीय मूल्यों का संगम है।
इसी दृष्टिकोण के साथ उन्होंने रवींद्र भारती विश्वविद्यालय में रवींद्र संगीत विभाग का नेतृत्व किया और आने वाली पीढ़ियों को संगीत के साथ-साथ उसकी विचारधारा से भी जोड़ा।
ममता बनर्जी की श्रद्धांजलि: राजनीति से परे संस्कृति का सम्मान
3 जनवरी 2026 को सुचित्रा मित्रा की पुण्यतिथि पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया के माध्यम से बंगाली भाषा में अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
उनका संदेश इस बात का प्रमाण है कि बंगाल में कला और संस्कृति केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि वर्तमान की चेतना हैं।
यह श्रद्धांजलि एक कलाकार के योगदान को स्वीकारने के साथ-साथ यह भी दर्शाती है कि सांस्कृतिक विरासत किसी भी राजनीतिक पहचान से ऊपर होती है।
उपलब्धियाँ जो उन्हें विशिष्ट बनाती हैं
- वे भारतीय जन नाट्य संघ (IPTA) से जुड़कर सामाजिक-सांस्कृतिक आंदोलनों का हिस्सा रहीं।
- वर्ष 2001 में वे कोलकाता की पहली महिला शेरिफ नियुक्त की गईं—यह सम्मान उनके सामाजिक कद को दर्शाता है।
- उनके गाए रवींद्र संगीत के रिकॉर्ड आज भी श्रोताओं के मन में गहरी संवेदना जगा देते हैं।
निष्कर्ष
सुचित्रा मित्रा की पुण्यतिथि केवल एक महान गायिका को स्मरण करने का दिन नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक चेतना को पुनः अनुभव करने का अवसर है।
ममता बनर्जी की श्रद्धांजलि यह रेखांकित करती है कि संगीत, भाषा और संस्कृति ऐसी विरासतें हैं, जो पीढ़ियों को जोड़ती हैं और समय के पार भी जीवित रहती हैं।
सुचित्रा मित्रा की आवाज़ आज भी रवींद्र संगीत के हर स्वर में सांस लेती है—शांत, संयमित और अमर।
