फ़रवरी 12, 2026

अखिलेश यादव के आरोपों से उबाल पर सियासत: अभ्युदय योजना में अनियमितताओं पर गंभीर सवाल

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उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी अभ्युदय योजना एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस योजना को लेकर गंभीर आरोप लगाते हुए भाजपा सरकार की नीयत और कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला है। उनके बयान ने न केवल प्रशासनिक ईमानदारी पर प्रश्नचिह्न खड़ा किया है, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के भविष्य को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है।

🧭 अभ्युदय योजना की पृष्ठभूमि

अभ्युदय योजना को उत्तर प्रदेश सरकार ने इस सोच के साथ शुरू किया था कि गरीबी किसी मेधावी छात्र की सफलता में बाधा न बने। इस योजना के अंतर्गत IAS, PCS, NEET, JEE जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को निःशुल्क कोचिंग देने का दावा किया गया था। इसका उद्देश्य था प्रतिभा को संसाधनों की कमी से मुक्त करना।

🚨 अखिलेश यादव का बड़ा आरोप

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया के माध्यम से आरोप लगाया कि इस योजना में सूचीबद्ध 69 कोचिंग संस्थानों में से 48 संस्थान फर्जी पाए गए। उन्होंने कहा कि जब योजना को ईमानदारी से लागू नहीं किया गया, तब अब इसे महज़ औपचारिकता बनाकर घोटाले की शक्ल दे दी गई है।

उनका कहना है कि सरकार का ध्यान छात्रों के भविष्य पर नहीं, बल्कि धन के दुरुपयोग और दिखावटी योजनाओं पर अधिक है। अखिलेश ने यह सवाल भी उठाया कि क्या यह सब एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है, ताकि वंचित वर्ग के छात्रों को कमजोर संसाधनों में उलझाकर मुख्यधारा से बाहर रखा जा सके।

📊 छात्रों और समाज पर असर

इन आरोपों ने उन हजारों छात्रों की उम्मीदों को गहरा धक्का पहुंचाया है, जो इस योजना के तहत अपनी तैयारी कर रहे थे। यदि कोचिंग संस्थान वास्तव में फर्जी थे, तो छात्रों का समय, मेहनत और विश्वास तीनों ही बर्बाद हुए। इससे न केवल शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा है, बल्कि सरकारी योजनाओं पर आम लोगों का भरोसा भी कमजोर हुआ है।

🏛️ राजनीतिक गलियारों में हलचल

इस पूरे मामले पर अभी तक सत्तापक्ष की ओर से कोई स्पष्ट और संतोषजनक प्रतिक्रिया नहीं आई है। वहीं विपक्ष लगातार निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग कर रहा है। अखिलेश यादव ने कहा है कि इस प्रकरण को केवल प्रशासनिक चूक के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय के दृष्टिकोण से भी देखा जाना चाहिए।

🔎 निष्कर्ष

अभ्युदय योजना पर लगे ये आरोप केवल एक योजना तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह सवाल खड़ा करते हैं कि क्या सरकारी नीतियां वास्तव में जरूरतमंदों तक पहुंच रही हैं। यदि जांच में अनियमितताएं सही पाई जाती हैं, तो यह सिर्फ एक घोटाला नहीं होगा, बल्कि उन सपनों के साथ अन्याय होगा, जिनके सहारे हजारों युवा बेहतर भविष्य की तैयारी कर रहे थे।


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