फ़रवरी 12, 2026

मतदाता सूची पर संवैधानिक बहस: सुप्रीम कोर्ट में SIR मामले की अहम सुनवाई

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भारत के चुनावी तंत्र से जुड़े एक संवेदनशील मुद्दे पर आज सुप्रीम कोर्ट में व्यापक बहस हो रही है। यह मामला विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) से संबंधित है, जिसे चुनाव आयोग ने मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लागू किया है। इस प्रक्रिया को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों और नागरिक संगठनों ने शीर्ष अदालत का दरवाज़ा खटखटाया है।

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) क्या है?

विशेष गहन पुनरीक्षण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके तहत मतदाता सूची की गहराई से जाँच की जाती है।

  • इसका मकसद मृत, दोहराए गए, स्थानांतरित या अयोग्य व्यक्तियों के नाम सूची से हटाना है।
  • इस दौरान कई क्षेत्रों में मतदाता सूची को लगभग नए सिरे से सत्यापित किया जाता है।
  • चुनाव आयोग का कहना है कि इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि कोई विदेशी नागरिक या अपात्र व्यक्ति वोटर लिस्ट में शामिल न हो।

हालांकि, आलोचकों का आरोप है कि इस अभ्यास में जल्दबाज़ी और अपारदर्शिता के कारण बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं के नाम भी हटा दिए गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट में क्या दलीलें रखी गईं?

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत के समक्ष प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए।

  • उन्होंने तर्क दिया कि आधिकारिक संचार के लिए अनौपचारिक माध्यमों, जैसे व्हाट्सएप, का इस्तेमाल किया गया।
  • याचिकाओं में कहा गया कि कई मतदाताओं को बिना उचित सुनवाई या सूचना के सूची से बाहर कर दिया गया।
  • विपक्षी दलों का दावा है कि इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया कमजोर होती है और चुनाव निष्पक्ष नहीं रह जाते।

चुनाव आयोग का पक्ष

चुनाव आयोग ने अदालत में स्पष्ट किया कि संविधान ने उसे मतदाता सूची को शुद्ध रखने की ज़िम्मेदारी सौंपी है।

  • आयोग के अनुसार, यदि सूची में अयोग्य या विदेशी नाम बने रहते हैं तो इससे चुनाव की वैधता पर सवाल उठ सकते हैं।
  • आयोग ने अदालत से अतिरिक्त समय की मांग की है ताकि वह सभी आरोपों पर विस्तृत जवाब प्रस्तुत कर सके।

अदालत की भूमिका और रुख

इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ कर रही है।

  • अदालत ने चुनाव आयोग से जल्द स्पष्ट और विस्तृत स्पष्टीकरण देने को कहा है।
  • साथ ही, सभी याचिकाओं को एक साथ सुनते हुए अंतिम सुनवाई की रूपरेखा तय की जा रही है।

राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव

इस विवाद का असर केवल कानूनी दायरे तक सीमित नहीं है।

  • पश्चिम बंगाल और बिहार जैसे राज्यों में विपक्षी दलों ने आशंका जताई है कि SIR का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया जा सकता है।
  • नागरिक अधिकार समूहों का कहना है कि यदि वैध मतदाताओं को वोट देने से वंचित किया जाता है, तो यह संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों का उल्लंघन होगा।
  • यह पूरा मामला चुनावी प्रणाली की पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर व्यापक बहस को जन्म दे रहा है।

निष्कर्ष

विशेष गहन पुनरीक्षण पर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई भारत के लोकतंत्र के लिए अत्यंत निर्णायक मानी जा रही है। एक ओर मतदाता सूची की शुद्धता ज़रूरी है, तो दूसरी ओर नागरिकों के मताधिकार की सुरक्षा भी उतनी ही अहम है। अदालत का निर्णय यह तय करेगा कि चुनावी सुधार और लोकतांत्रिक अधिकारों के बीच संतुलन कैसे साधा जाए। आने वाला फैसला भविष्य की चुनावी प्रक्रिया की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।


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