अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर संकट की आहट: एंटोनियो गुटेरेस की चेतावनी और विश्व की चुनौती

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने हालिया वक्तव्य और सोशल मीडिया संदेशों के ज़रिये वैश्विक राजनीति की एक गंभीर तस्वीर पेश की है। उनका कहना है कि आज की दुनिया में “न्याय के नियम” कमजोर पड़ रहे हैं और उनकी जगह “ताकत के नियम” लेने लगे हैं। यह स्थिति अंतरराष्ट्रीय शांति और स्थिरता के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है।
🌐 बदलती वैश्विक राजनीति: जब शक्ति हावी हो जाए
गुटेरेस के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय कानून वह आधार है जिस पर देशों के बीच विश्वास, सहयोग और संतुलन टिका होता है। लेकिन वर्तमान हालात में—
- कई वैश्विक शक्तियां अपनी सैन्य, आर्थिक या राजनीतिक ताकत के बल पर नियमों की अनदेखी कर रही हैं।
- सहयोग की जगह टकराव ने ले ली है और बहुपक्षीय सोच कमजोर होती दिख रही है।
- उन्होंने इस प्रवृत्ति को “कानून रहित व्यवस्था” करार दिया, जहां ताकतवर खुद को नियमों से ऊपर समझते हैं।
यह चेतावनी ऐसे दौर में आई है जब दुनिया युद्धों, क्षेत्रीय संघर्षों और बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों से घिरी हुई है।
🕊️ संयुक्त राष्ट्र का दृष्टिकोण: मूल्य अभी जीवित हैं
संयुक्त राष्ट्र की स्थापना द्वितीय विश्व युद्ध के बाद इसी सोच के साथ की गई थी कि भविष्य की पीढ़ियों को युद्ध और अन्याय से बचाया जा सके। गुटेरेस ने दोहराया कि—
- संयुक्त राष्ट्र शांति, मानवाधिकार और न्याय के अपने मूल सिद्धांतों से पीछे नहीं हटेगा।
- संगठन का लक्ष्य टकराव नहीं, संवाद को बढ़ावा देना है।
- सभी देशों से अपेक्षा है कि वे जिम्मेदारी का परिचय देते हुए अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करें।
उनके शब्दों में यह केवल संस्थागत जिम्मेदारी नहीं, बल्कि नैतिक कर्तव्य भी है।
⚖️ अंतरराष्ट्रीय कानून कमजोर क्यों हो रहा है?
अंतरराष्ट्रीय नियमों के क्षरण के पीछे कई कारण हैं—
- बड़े देशों द्वारा एकतरफा फैसले लेना और वैश्विक सहमति की उपेक्षा करना।
- संयुक्त राष्ट्र और उससे जुड़ी संस्थाओं की सीमित कार्यक्षमता पर लगातार उठते सवाल।
- वैश्विक संकटों में छोटे और विकासशील देशों की भागीदारी और आवाज का कमज़ोर होना।
इसका सीधा असर वैश्विक संतुलन पर पड़ता है और असमानता को और गहरा करता है।
🇮🇳 भारत के लिए इस संदेश का महत्व
भारत जैसे लोकतांत्रिक और उभरते राष्ट्र के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून केवल सिद्धांत नहीं, बल्कि सुरक्षा और सम्मान का माध्यम है।
- भारत ने हमेशा बहुपक्षीय व्यवस्था और नियम आधारित वैश्विक प्रणाली का समर्थन किया है।
- संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में भारत की भूमिका उसकी वैश्विक जिम्मेदारी को दर्शाती है।
- गुटेरेस की चेतावनी भारत के लिए आत्ममंथन का अवसर भी है—कि वह वैश्विक न्याय और संतुलन को मजबूत करने में अपनी भूमिका कैसे और प्रभावी बना सकता है।
🔮 आगे की राह: समाधान क्या है?
इस संकट से निकलने का रास्ता टकराव नहीं, सहयोग है।
- अंतरराष्ट्रीय कानून को प्राथमिकता देना सभी देशों के दीर्घकालिक हित में है।
- संवाद, पारदर्शिता और आपसी सम्मान से ही स्थायी शांति संभव है।
- संयुक्त राष्ट्र जैसे मंचों को केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि सक्रिय नीति-निर्माण का केंद्र बनाना होगा।
✨ निष्कर्ष
एंटोनियो गुटेरेस की चेतावनी सिर्फ मौजूदा हालात का वर्णन नहीं, बल्कि भविष्य के लिए एक स्पष्ट संकेत है। यदि दुनिया को स्थिर, सुरक्षित और न्यायपूर्ण बनाना है, तो शक्ति नहीं, बल्कि कानून को सर्वोच्च स्थान देना होगा। यही वह मार्ग है जो मानवता को संघर्ष से सहयोग की ओर ले जा सकता है।
