कलेक्ट्रेट में श्रद्धा और गरिमा के साथ मनाई गई गांधी-शास्त्री जयंती
अरुण कुमार मिश्रा
हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन
डीएम समीर ने सत्य, अहिंसा, सादगी और कर्तव्यनिष्ठा को जीवन का हिस्सा बनाने का किया आह्वान
उरई (जालौन)।
जनपद जालौन के कलेक्ट्रेट परिसर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती श्रद्धा, सम्मान और राष्ट्रभक्ति की भावना के साथ मनाई गई। 2 अक्टूबर के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में अधिकारियों और कर्मचारियों ने दोनों महान विभूतियों के व्यक्तित्व, विचारों और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को याद करते हुए उनके आदर्शों को अपने जीवन एवं कार्य व्यवहार में उतारने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत जिलाधिकारी समीर द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराने के साथ हुई। इसके बाद उन्होंने महात्मा गांधी तथा लाल बहादुर शास्त्री की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस दौरान परिसर में देशभक्ति और राष्ट्रसेवा की भावना देखने को मिली। कार्यक्रम में ‘रघुपति राघव राजा राम’ भजन की भावपूर्ण प्रस्तुति भी हुई। भजन की धुनों से कलेक्ट्रेट परिसर का वातावरण गांधीजी के सत्य, अहिंसा, प्रेम और सद्भाव के संदेश से सराबोर हो गया।
इस अवसर पर जिलाधिकारी समीर ने कहा कि 2 अक्टूबर भारत के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण तिथि है। यह दिन देश को दो ऐसे महान व्यक्तित्वों की स्मृति से जोड़ता है, जिन्होंने अपने विचारों, आचरण और कर्मों से सार्वजनिक जीवन को नई दिशा दी। महात्मा गांधी ने सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह को अपना प्रमुख हथियार बनाकर स्वतंत्रता आंदोलन को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ा, जबकि लाल बहादुर शास्त्री ने सादगी, अनुशासन, ईमानदारी और राष्ट्रसेवा के माध्यम से सार्वजनिक जीवन में आदर्श प्रस्तुत किए।
गांधीजी के विचार आज भी प्रासंगिक
जिलाधिकारी ने महात्मा गांधी के जीवन और उनके विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि गांधीजी ने सत्य और अहिंसा को केवल व्यक्तिगत आचरण तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इन्हें सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम बनाया। उनके नेतृत्व में स्वतंत्रता आंदोलन को आम नागरिकों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई गई। गांधीजी का मानना था कि किसी भी समाज की वास्तविक प्रगति केवल आर्थिक विकास से नहीं, बल्कि नैतिक मूल्यों, आपसी सम्मान, सामाजिक सद्भाव और जिम्मेदार नागरिकता से होती है।
उन्होंने कहा कि आज के समय में भी गांधीजी के विचारों की उपयोगिता बनी हुई है। सामाजिक सौहार्द, आपसी भाईचारा, स्वच्छता, नैतिकता, शांति और जिम्मेदार नागरिक व्यवहार जैसे विषयों पर गांधीजी के विचार समाज का मार्गदर्शन कर सकते हैं। ऐसे में उनकी जयंती मनाने का उद्देश्य केवल पुष्पांजलि या औपचारिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं होना चाहिए। उनके सिद्धांतों को रोजमर्रा के जीवन और सरकारी कार्यप्रणाली में अपनाना ही उनके प्रति वास्तविक सम्मान होगा।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों और कर्मचारियों से कहा कि प्रशासनिक दायित्वों के निर्वहन के दौरान सत्यनिष्ठा, पारदर्शिता और संवेदनशीलता को प्राथमिकता दी जाए। आम नागरिक अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद लेकर सरकारी कार्यालयों में आता है। इसलिए प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी का दायित्व है कि वह जनता के साथ सम्मानजनक व्यवहार करे और निर्धारित जिम्मेदारियों का ईमानदारी से पालन करे।
शास्त्रीजी की सादगी से लेने की जरूरत है प्रेरणा
पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए जिलाधिकारी समीर ने कहा कि शास्त्रीजी भारतीय सार्वजनिक जीवन में सादगी और ईमानदारी के प्रेरणादायी उदाहरण रहे। उनका जीवन बताता है कि ऊंचे पद पर पहुंचने के बाद भी व्यक्ति अपने मूल्यों और सिद्धांतों से जुड़ा रह सकता है।
उन्होंने कहा कि लाल बहादुर शास्त्री ने अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा को विशेष महत्व दिया। उनके व्यक्तित्व में सादगी के साथ दृढ़ संकल्प भी दिखाई देता था। देश के सामने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में उन्होंने नागरिकों में आत्मविश्वास और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने का प्रयास किया।
शास्त्रीजी का प्रसिद्ध नारा ‘जय जवान, जय किसान’ देश की सुरक्षा और कृषि व्यवस्था दोनों के महत्व को सामने रखता है। यह संदेश आज भी राष्ट्र के विकास में सैनिकों और किसानों की भूमिका की याद दिलाता है। जिलाधिकारी ने कहा कि शास्त्रीजी के जीवन से प्रेरणा लेकर प्रत्येक व्यक्ति को अपने दायित्व के प्रति ईमानदार और अनुशासित रहने का प्रयास करना चाहिए।
जनसेवा को बनाया जाए कार्यशैली का आधार
जिलाधिकारी ने कलेक्ट्रेट के अधिकारियों और कर्मचारियों से अपील की कि वे गांधीजी के सत्य एवं अहिंसा के सिद्धांतों तथा शास्त्रीजी की सादगी, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा को अपने कार्य व्यवहार का हिस्सा बनाएं। उन्होंने कहा कि सरकारी सेवा का मूल उद्देश्य जनता की सेवा करना है। इसलिए कार्यालयीन कार्यों में संवेदनशीलता, निष्पक्षता और पारदर्शिता का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि अपने-अपने विभागों में आने वाले नागरिकों की समस्याओं को गंभीरता से सुनें और नियमानुसार उनके समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई करें। प्रशासन में कार्यरत प्रत्येक व्यक्ति का व्यवहार शासन और प्रशासन की छवि को प्रभावित करता है। ऐसे में जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए जिम्मेदारियों का निर्वहन किया जाना आवश्यक है।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। उन्होंने सत्यनिष्ठा, अनुशासन, जनसेवा, राष्ट्रीय एकता और राष्ट्रहित को प्राथमिकता देते हुए अपने दायित्वों का पूरी निष्ठा से पालन करने की प्रतिबद्धता जताई।
अधिकारियों और कर्मचारियों की रही मौजूदगी
गांधी-शास्त्री जयंती के इस कार्यक्रम में कलेक्ट्रेट के कई वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। इनमें अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व राजीव राज, अपर जिलाधिकारी नमामि गंगे प्रेमचंद मौर्य, अपर जिलाधिकारी न्यायिक शत्रुहन पाठक, नगर मजिस्ट्रेट सुनील कुमार, अतिरिक्त उप जिलाधिकारी कुमार संजय सहित कलेक्ट्रेट परिसर के अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल रहे।
कार्यक्रम के दौरान दोनों महापुरुषों के जीवन से जुड़े मूल्यों को याद किया गया और उपस्थित लोगों ने राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका को लेकर संकल्प लिया। अधिकारियों ने कहा कि महापुरुषों की जयंती का वास्तविक उद्देश्य उनके विचारों को वर्तमान जीवन में लागू करना है। यदि सत्य, ईमानदारी, अनुशासन, सादगी और जनसेवा जैसे मूल्यों को व्यक्तिगत तथा प्रशासनिक जीवन में अपनाया जाए तो समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा मजबूत हो सकती है।
कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित गांधी-शास्त्री जयंती का कार्यक्रम इसी संदेश के साथ संपन्न हुआ कि राष्ट्र के महान नेताओं के आदर्श केवल इतिहास का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए भी मार्गदर्शक सिद्धांत हैं। उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों ने उनके विचारों को व्यवहार में उतारने तथा जनहित एवं राष्ट्रहित में पूरी निष्ठा के साथ कार्य करने का संकल्प दोहराया।