मवेशी चराने गए 70 वर्षीय किसान के नदी में डूबने की आशंका, कपड़े-जूते मिलने से गहराया संदेह
अरुण कुमार मिश्रा
हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन
जालौन। कोतवाली कालपी क्षेत्र के ग्राम मंगरौल मुस्तकिल में शनिवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब करीब 70 वर्षीय किसान राम आसरे पाण्डेय मवेशी चराने के लिए घर से निकलने के बाद वापस नहीं लौटे। देर शाम तक इंतजार के बावजूद जब वह घर नहीं पहुंचे तो परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की। खोजबीन के दौरान नून नदी के किनारे उनके कपड़े, जूते और मोबाइल फोन मिलने के बाद नदी में डूबने की आशंका गहरा गई। सूचना मिलने पर पुलिस और बाढ़ आपदा प्रबंधन टीम ने मौके पर पहुंचकर तलाश अभियान शुरू कर दिया है।

मवेशी लौटे, लेकिन घर नहीं पहुंचे किसान
जानकारी के अनुसार, मंगरौल मुस्तकिल गांव निवासी राम आसरे पाण्डेय शनिवार को रोजाना की तरह अपने मवेशियों को चराने के लिए गांव के बाहर खेतों की ओर गए थे। बताया जा रहा है कि वह नून नदी के आसपास स्थित खेतों में मवेशी चरा रहे थे। शाम करीब चार बजे उनके मवेशी वापस गांव की ओर लौट आए, लेकिन राम आसरे पाण्डेय उनके साथ घर नहीं पहुंचे।
काफी देर तक जब किसान घर नहीं आए तो परिवार के लोगों को चिंता होने लगी। पहले परिजनों ने आसपास के इलाकों में उनकी तलाश की। जब कोई जानकारी नहीं मिली तो ग्रामीणों की मदद से खोजबीन का दायरा बढ़ाया गया।
नदी किनारे मिले कपड़े और जूते
तलाश के दौरान जब परिजन नून नदी के किनारे पहुंचे तो वहां राम आसरे पाण्डेय के कपड़े, जूते और मोबाइल फोन पड़े मिले। किसान के सभी सामान का नदी के पास मिलना परिवार के लिए चिंता का बड़ा कारण बन गया। मौके के हालात को देखते हुए परिजनों ने आशंका जताई कि वह नदी में चले गए होंगे और संभव है कि पानी के तेज बहाव में बह गए हों।
नदी किनारे सामान मिलने की सूचना गांव में तेजी से फैल गई। इसके बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौके पर पहुंच गए और अपने स्तर से किसान की तलाश करने लगे। आसपास के नदी क्षेत्र और संभावित रास्तों पर काफी देर तक खोजबीन की गई, लेकिन राम आसरे पाण्डेय का कोई सुराग नहीं मिल सका।
मवेशी नदी पार करने के बाद बढ़ा संदेह
ग्रामीणों के मुताबिक, उस समय आसपास कुछ अन्य लोग भी अपने मवेशियों को चरा रहे थे। उनसे जानकारी लेने पर पता चला कि राम आसरे पाण्डेय के मवेशी नदी पार करके दूसरी तरफ चले गए थे। प्रत्यक्षदर्शियों ने किसान को नदी की दिशा में जाते हुए भी देखा था।
इन परिस्थितियों को देखते हुए परिजनों और ग्रामीणों को आशंका है कि मवेशियों के पीछे जाते समय किसान नदी के पानी में उतर गए होंगे। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि वास्तव में उनके साथ क्या हुआ। प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीम की तलाश पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
रातभर कई गांवों में चला तलाश अभियान
किसान के लापता होने की सूचना मिलने के बाद ग्रामीणों और परिजनों ने रात में भी तलाश जारी रखी। नून नदी के आसपास स्थित पड़री, निबहना और उरकरा समेत आसपास के गांवों में खोजबीन की गई। नदी के किनारे, खेतों और संभावित स्थानों पर लोगों ने काफी देर तक तलाश की, लेकिन राम आसरे पाण्डेय के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी।
अंधेरा अधिक होने के कारण रात में नदी क्षेत्र में तलाश करना काफी चुनौतीपूर्ण रहा। इसके बाद परिजनों ने कोतवाली कालपी पहुंचकर पुलिस को घटना की जानकारी दी। पुलिस ने मामले की सूचना संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई और सुबह व्यापक स्तर पर तलाश अभियान चलाने की तैयारी की गई।
सुबह मौके पर पहुंची आपदा प्रबंधन टीम
रविवार सुबह करीब 10 बजे हल्का इंचार्ज रामजी लाल के साथ बाढ़ आपदा प्रबंधन टीम घटनास्थल पर पहुंची। टीम ने नदी के आसपास तलाशी अभियान शुरू कर दिया। नदी के पानी और आसपास के क्षेत्र में संभावित स्थानों को ध्यान में रखते हुए खोज की जा रही है।
आपदा प्रबंधन टीम के मौके पर पहुंचने के बाद परिजनों को उम्मीद बंधी है कि जल्द ही राम आसरे पाण्डेय के बारे में कोई जानकारी मिल सकेगी। टीम द्वारा नदी के किनारे और पानी के संभावित बहाव वाले क्षेत्रों में तलाश की जा रही है।
नदी किनारे जमा हुई ग्रामीणों की भीड़
घटना की जानकारी मिलते ही मंगरौल मुस्तकिल और आसपास के गांवों के बड़ी संख्या में ग्रामीण नदी किनारे पहुंच गए। हर कोई किसान के सुरक्षित मिलने की उम्मीद लगाए हुए है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वृद्ध किसान के अचानक लापता होने से पूरे गांव में चिंता का माहौल बना हुआ है।
परिजन लगातार नदी की ओर नजरें लगाए हुए हैं और किसी भी सूचना का इंतजार कर रहे हैं। वहीं ग्रामीण भी आपदा प्रबंधन टीम के अभियान पर नजर बनाए हुए हैं। मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि यदि समय रहते किसान का पता चल जाए तो परिवार को बड़ी राहत मिल सकती है।
प्रशासन की निगरानी में जारी है तलाश
फिलहाल राम आसरे पाण्डेय के नदी में डूबने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। उनके कपड़े, जूते और मोबाइल नदी किनारे मिलने तथा उन्हें नदी की दिशा में जाते देखे जाने के कारण डूबने की आशंका जताई जा रही है। प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीम द्वारा लगातार खोज अभियान चलाया जा रहा है।
घटना ने एक बार फिर नदी किनारे मवेशी चराने और खेतों में काम करने वाले ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। खासकर बुजुर्गों के नदी के आसपास अकेले जाने पर खतरा बढ़ सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से नदी के आसपास सुरक्षा व्यवस्था और संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ाने की मांग की है।
फिलहाल पूरा गांव राम आसरे पाण्डेय के सकुशल मिलने की प्रार्थना कर रहा है। तलाश अभियान के दौरान मिलने वाली जानकारी के आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।