पक्की पुलिया बंद होने से खेतों में भरा पानी, किसानों के सामने बुआई का संकट
अरुण कुमार मिश्रा
हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन
कोंच, जालौन। अक्टूबर माह के पहले शनिवार को कोंच तहसील में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़ी कई समस्याएं अधिकारियों के सामने पहुंचीं। तहसील सभाकक्ष में आयोजित इस समाधान दिवस में कुल 17 शिकायतें दर्ज कराई गईं। इनमें से पांच मामलों का अधिकारियों ने मौके पर ही निस्तारण कर दिया, जबकि शेष शिकायतों को संबंधित विभागों के अधिकारियों को सौंपते हुए जल्द कार्रवाई के निर्देश दिए गए। समाधान दिवस के दौरान जलभराव और पानी की निकासी से संबंधित शिकायतें प्रमुख रूप से सामने आईं।

संपूर्ण समाधान दिवस की अध्यक्षता उपजिलाधिकारी अभिनव कुमार ने की। इस दौरान तहसीलदार मनोज कुमार और नायब तहसीलदार वैभव गुप्ता सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने फरियादियों की समस्याएं गंभीरता से सुनीं और संबंधित विभागों को स्थलीय निरीक्षण कर समस्याओं का समाधान कराने के निर्देश दिए।
पुलिया बंद होने से खेतों में नहीं निकल रहा पानी
ग्राम किशुनपुरा के ग्रामीणों ने प्रधान विनोद निरंजन के नेतृत्व में समाधान दिवस में पहुंचकर जलनिकासी की समस्या अधिकारियों के सामने रखी। ग्रामीणों का कहना था कि गांव के पास बनी पक्की पुलिया को एक ग्रामीण द्वारा बंद कर दिए जाने के कारण बारिश का पानी खेतों से बाहर नहीं निकल पा रहा है। पानी खेतों में जमा होने से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि खेतों में खरीफ फसल के बाद अब आगामी फसल की बुआई की तैयारी का समय नजदीक है। यदि खेतों में इसी तरह पानी भरा रहा तो खेतों की तैयारी और बुआई प्रभावित हो सकती है। किसानों ने प्रशासन से मांग की कि बंद पुलिया को खुलवाकर पानी की निकासी का रास्ता बहाल कराया जाए, ताकि खेतों में जमा पानी बाहर निकल सके और किसान समय से अपनी कृषि गतिविधियां शुरू कर सकें।
ग्रामीणों ने अधिकारियों से यह भी अनुरोध किया कि मामले की मौके पर जांच कर वास्तविक स्थिति का पता लगाया जाए। उनका कहना था कि पानी की उचित निकासी नहीं होने से प्रत्येक वर्ष बारिश के दौरान परेशानी बढ़ जाती है। ऐसे में स्थायी समाधान जरूरी है।
इंटरलॉकिंग रास्ते पर पानी का बहाव बना परेशानी
समाधान दिवस में ग्राम छोटी दोहर के ग्रामीणों ने भी जलभराव की समस्या को लेकर शिकायत दर्ज कराई। ग्रामीणों ने बताया कि बारिश के दौरान पानी इंटरलॉकिंग सड़क पर बहने लगता है। इससे गांव के लोगों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों के मुताबिक रास्ते पर पानी जमा होने अथवा बहने के कारण पैदल चलने वालों के साथ ही दोपहिया और अन्य वाहनों से आने-जाने में भी परेशानी होती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था कराने की मांग की, जिससे रास्ते पर जलभराव की समस्या दूर हो सके।
ग्रामीणों ने अधिकारियों को बताया कि यदि पानी के बहाव की दिशा को व्यवस्थित कर दिया जाए और निकासी की व्यवस्था कराई जाए तो समस्या का काफी हद तक समाधान हो सकता है। इस पर अधिकारियों ने संबंधित विभाग को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
पांच शिकायतों का मौके पर निस्तारण
संपूर्ण समाधान दिवस में आई 17 शिकायतों में से पांच मामलों को मौके पर ही निस्तारित किया गया। अधिकारियों ने शिकायतकर्ताओं की समस्याएं सुनने के साथ संबंधित दस्तावेजों और उपलब्ध जानकारी के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की। वहीं अन्य शिकायतों को संबंधित विभागों के अधिकारियों के पास भेजकर समयबद्ध ढंग से निस्तारण कराने के निर्देश दिए गए।
एसडीएम अभिनव कुमार ने अधिकारियों से कहा कि समाधान दिवस में आने वाली शिकायतों को केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रखा जाए। जरूरत पड़ने पर अधिकारी स्वयं मौके पर पहुंचकर समस्या की वास्तविक स्थिति देखें और उसके बाद समाधान की प्रक्रिया पूरी करें।
गुणवत्तापूर्ण निस्तारण पर प्रशासन का जोर
एसडीएम ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रत्येक शिकायत का निस्तारण गुणवत्तापूर्ण तरीके से किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी शिकायत का निस्तारण करते समय शिकायतकर्ता की वास्तविक समस्या को समझना जरूरी है। केवल औपचारिक रिपोर्ट लगाकर मामले को समाप्त करना उचित नहीं होगा।
उन्होंने अधिकारियों को यह भी बताया कि शिकायतों के निस्तारण की गुणवत्ता की रेंडम चेकिंग जिलाधिकारी स्तर से की जाएगी। यदि किसी मामले में यह पाया जाता है कि शिकायत का निस्तारण सही तरीके से नहीं किया गया या मौके की वास्तविक स्थिति की जांच किए बिना रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी गई है, तो संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ शासन को रिपोर्ट भेजी जा सकती है।
एसडीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी शिकायतों का निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर किया जाए और जहां स्थलीय जांच की जरूरत हो, वहां मौके पर जाकर समस्या का निरीक्षण किया जाए।
किसानों के लिए समय पर पानी की निकासी जरूरी
किशुनपुरा के किसानों की शिकायत कृषि कार्य से सीधे जुड़ी हुई है। खेतों में पानी लंबे समय तक जमा रहने से खेतों की तैयारी प्रभावित हो सकती है। बुआई का समय नजदीक होने के कारण किसानों की चिंता भी बढ़ गई है। ऐसे में ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन जलनिकासी की समस्या का तत्काल समाधान कराए।
ग्रामीण क्षेत्रों में बारिश के बाद जलनिकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने पर खेतों और रास्तों दोनों पर इसका असर पड़ता है। एक ओर किसानों को खेतों में पानी जमा होने से कृषि कार्य में दिक्कत आती है, वहीं दूसरी ओर गांवों के संपर्क मार्ग प्रभावित होते हैं। समाधान दिवस में आई शिकायतों से भी यही स्थिति सामने आई।
ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि प्रशासन की ओर से मौके का निरीक्षण कर जल्द कार्रवाई की जाएगी। यदि बंद पुलिया को खोलकर जलनिकासी बहाल कर दी जाती है तो किसानों को बड़ी राहत मिल सकती है।
अधिकारियों को दिए गए समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश
संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान एसडीएम ने विभिन्न विभागों से जुड़े अधिकारियों को निर्देश दिया कि शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए संबंधित अधिकारी अपनी जिम्मेदारी के अनुसार कार्रवाई करें।
उन्होंने अधिकारियों को यह भी हिदायत दी कि शिकायतों के निस्तारण में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। प्रत्येक मामले की वास्तविक स्थिति को समझते हुए नियमों के अनुसार कार्रवाई करने पर जोर दिया गया।
समाधान दिवस में मौजूद अधिकारियों ने भी ग्रामीणों और अन्य फरियादियों की समस्याएं सुनीं। जिन मामलों में तत्काल कार्रवाई संभव थी, उनमें मौके पर ही समाधान किया गया, जबकि जिन मामलों में विभागीय जांच या स्थलीय निरीक्षण की आवश्यकता थी, उनमें संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
कुल मिलाकर कोंच तहसील में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस में जलभराव और पानी की निकासी से जुड़ी शिकायतें प्रमुख मुद्दा बनी रहीं। किशुनपुरा में बंद पुलिया के कारण खेतों में जमा पानी किसानों की चिंता का कारण बना हुआ है, जबकि छोटी दोहर में सड़क पर पानी के बहाव से ग्रामीणों का आवागमन प्रभावित हो रहा है। अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन की ओर से होने वाली कार्रवाई पर है। किसानों और ग्रामीणों को उम्मीद है कि संबंधित विभाग मौके पर पहुंचकर समस्याओं का स्थायी समाधान करेंगे, जिससे आगामी कृषि कार्य और ग्रामीण आवागमन प्रभावित न हो।