साइबर अपराध से बचाव के लिए विद्यार्थियों को किया जागरूक, डिजिटल अरेस्ट और साइबर बुलिंग से बचने के बताए उपाय

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अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

राजकीय इंटर कॉलेज उरई में साइबर सेल ने चलाया जागरूकता अभियान, ओटीपी और यूपीआई पिन साझा न करने की दी सलाह

उरई, जालौन। इंटरनेट और डिजिटल तकनीक ने रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाया है, लेकिन इसके साथ साइबर अपराधों का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है। ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल, सोशल मीडिया के जरिए होने वाले अपराध और डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों

से बचाव के लिए लोगों में जागरूकता जरूरी है। इसी उद्देश्य से भारत सरकार के साइबर जागरूकता अभियान के तहत शनिवार को राजकीय इंटर कॉलेज उरई में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में साइबर सेल पुलिस कार्यालय से पहुंचे अधिकारियों और कर्मचारियों ने विद्यालय के विद्यार्थियों, शिक्षकों तथा स्टाफ को साइबर अपराधों के विभिन्न रूपों के बारे में जानकारी दी। साइबर सेल की टीम ने विद्यार्थियों को समझाया कि डिजिटल दुनिया में थोड़ी सी लापरवाही कई बार आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक परेशानी का कारण भी बन सकती है। इसलिए मोबाइल फोन, इंटरनेट बैंकिंग, यूपीआई और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते समय सतर्कता बेहद आवश्यक है।

डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराने से रहें सावधान

जागरूकता कार्यक्रम के दौरान साइबर सेल कर्मियों ने विद्यार्थियों को डिजिटल अरेस्ट के बढ़ते मामलों के बारे में जानकारी दी। विद्यार्थियों को बताया गया कि साइबर ठग अक्सर पुलिस, जांच एजेंसी या किसी अन्य सरकारी विभाग का अधिकारी बनकर लोगों को फोन करते हैं। बातचीत के दौरान उन्हें किसी कथित अपराध या जांच में फंसने का डर दिखाकर घबराने की कोशिश की जाती है।

ठग वीडियो कॉल या फोन पर लगातार संपर्क बनाए रखने और पैसे भेजने का दबाव बना सकते हैं। साइबर सेल ने विद्यार्थियों को बताया कि ऐसी परिस्थितियों में डरने या घबराकर कोई आर्थिक लेन-देन करने के बजाय संबंधित मामले की सत्यता की जांच करनी चाहिए। किसी अनजान व्यक्ति के दबाव में आकर बैंक खाते, यूपीआई या अन्य वित्तीय जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।

विद्यार्थियों को यह भी समझाया गया कि किसी फोन कॉल या ऑनलाइन संदेश के आधार पर तत्काल विश्वास करना उचित नहीं है। संदिग्ध परिस्थिति में परिवार के सदस्यों, शिक्षकों या संबंधित विभाग की सहायता ली जा सकती है।

ओटीपी और यूपीआई पिन की सुरक्षा सबसे जरूरी

कार्यक्रम में ऑनलाइन वित्तीय लेन-देन को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई। साइबर सेल टीम ने विद्यार्थियों को बताया कि बैंक खाते से संबंधित गोपनीय जानकारी किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ साझा नहीं करनी चाहिए।

खास तौर पर ओटीपी, यूपीआई पिन, एटीएम या कार्ड से जुड़ी गोपनीय जानकारी और बैंकिंग संबंधी संवेदनशील विवरण किसी को नहीं बताना चाहिए। साइबर ठग अक्सर खुद को बैंक कर्मचारी या किसी प्रतिष्ठित संस्था का प्रतिनिधि बताकर ऐसी जानकारी हासिल करने का प्रयास करते हैं।

विद्यार्थियों को सलाह दी गई कि यदि कोई व्यक्ति फोन पर बैंक संबंधी जानकारी मांगता है या तत्काल भुगतान करने के लिए दबाव डालता है तो सावधानी बरतें। किसी भी संदिग्ध लेन-देन की स्थिति में तुरंत परिवार के जिम्मेदार सदस्य और संबंधित बैंक को जानकारी देना जरूरी है।

अनजान लिंक और संदिग्ध संदेशों से बचें

साइबर सेल के अधिकारियों ने विद्यार्थियों को मोबाइल फोन पर आने वाले संदिग्ध संदेशों और अनजान लिंक को लेकर भी सतर्क किया। बताया गया कि साइबर अपराधी कई बार आकर्षक ऑफर, इनाम, नौकरी, छात्रवृत्ति, पुरस्कार या अन्य लालच का संदेश भेजकर लोगों से लिंक पर क्लिक करवाने की कोशिश करते हैं।

ऐसे लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच करना आवश्यक है। विद्यार्थियों से कहा गया कि यदि किसी संदेश में तत्काल कार्रवाई करने, पैसे जमा करने या निजी जानकारी भरने के लिए कहा गया हो तो बिना सत्यापन के ऐसा नहीं करना चाहिए।

साइबर सुरक्षा के लिहाज से विद्यार्थियों को अपने मोबाइल और ऑनलाइन खातों की सुरक्षा को भी गंभीरता से लेने की सलाह दी गई।

साइबर बुलिंग से बचने के बताए तरीके

कार्यक्रम में साइबर बुलिंग का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। साइबर बुलिंग के तहत सोशल मीडिया, मैसेजिंग एप या अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसी व्यक्ति को परेशान करना, अपमानित करना या लगातार अनुचित संदेश भेजना शामिल हो सकता है।

साइबर सेल कर्मियों ने विद्यार्थियों को बताया कि सोशल मीडिया पर किसी के साथ आपत्तिजनक व्यवहार होने पर उसे नजरअंदाज करने के साथ-साथ आवश्यक साक्ष्य सुरक्षित रखना चाहिए। संदिग्ध अकाउंट को ब्लॉक और रिपोर्ट करने की सुविधा का इस्तेमाल किया जा सकता है।

विद्यार्थियों को यह संदेश भी दिया गया कि वे स्वयं किसी अन्य व्यक्ति को ऑनलाइन परेशान न करें और न ही किसी आपत्तिजनक पोस्ट या संदेश को बिना सोचे आगे साझा करें। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किया गया व्यवहार भी जिम्मेदारी और सावधानी की मांग करता है।

साइबर ग्रूमिंग के प्रति भी किया सचेत

जागरूकता कार्यक्रम में साइबर ग्रूमिंग को लेकर भी विद्यार्थियों को सावधान किया गया। साइबर सेल की टीम ने बताया कि सोशल मीडिया या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अजनबी लोग दोस्ती या विश्वास का संबंध बनाने की कोशिश कर सकते हैं। धीरे-धीरे वे निजी जानकारी, फोटो या अन्य संवेदनशील सामग्री हासिल करने का प्रयास कर सकते हैं।

विद्यार्थियों को सलाह दी गई कि ऑनलाइन किसी अजनबी पर आसानी से भरोसा न करें। अपनी निजी जानकारी, घर का पता, स्कूल से संबंधित संवेदनशील विवरण, पासवर्ड या निजी तस्वीरें अनजान लोगों के साथ साझा नहीं करनी चाहिए।

यदि कोई व्यक्ति लगातार परेशान कर रहा हो या अनुचित बातचीत के लिए दबाव बना रहा हो तो इसकी जानकारी माता-पिता, शिक्षक या किसी विश्वसनीय बड़े व्यक्ति को तुरंत देनी चाहिए।

महिला संबंधी साइबर अपराधों पर भी जानकारी

कार्यक्रम के दौरान महिला संबंधी साइबर अपराधों से बचाव के बारे में भी जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को सोशल मीडिया का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने और किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक ऑनलाइन गतिविधि की स्थिति में चुप न रहने की सलाह दी गई।

साइबर सेल ने कहा कि डिजिटल माध्यमों पर होने वाली किसी भी परेशानी को छिपाने के बजाय समय रहते इसकी जानकारी जिम्मेदार व्यक्ति या संबंधित अधिकारियों को देना महत्वपूर्ण है। समय पर शिकायत मिलने से आवश्यक कार्रवाई में मदद मिल सकती है।

साइबर अपराध होने पर 1930 पर करें शिकायत

साइबर सेल की टीम ने विद्यार्थियों को साइबर अपराध की स्थिति में उपलब्ध शिकायत व्यवस्था की जानकारी भी दी। बताया गया कि ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी या साइबर अपराध का शिकार होने पर तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत की जा सकती है।

इसके अलावा cybercrime.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया के बारे में भी विद्यार्थियों को बताया गया। अधिकारियों ने कहा कि साइबर ठगी की घटना होने पर देरी करने के बजाय जितनी जल्दी संभव हो, शिकायत दर्ज कराना जरूरी है।

परिवार और समाज को जागरूक करने की अपील

साइबर सेल के अधिकारियों ने विद्यार्थियों से केवल खुद सतर्क रहने की अपील नहीं की, बल्कि अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक करने का आग्रह किया। अधिकारियों ने कहा कि साइबर अपराध से बचाव का सबसे प्रभावी माध्यम जागरूकता और सावधानी है।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों और विद्यालय स्टाफ को ऑनलाइन दुनिया में जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करने, निजी जानकारी सुरक्षित रखने तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि को नजरअंदाज न करने का संदेश दिया गया।

साइबर जागरूकता कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को डराना नहीं, बल्कि उन्हें डिजिटल माध्यमों के सुरक्षित इस्तेमाल के लिए तैयार करना रहा। साइबर सेल ने स्पष्ट किया कि सावधानी, जानकारी और समय पर शिकायत के जरिए ऑनलाइन अपराधों के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों से अपील की गई कि वे साइबर सुरक्षा से संबंधित जानकारी अपने परिवार और परिचितों तक भी पहुंचाएं, ताकि अधिक से अधिक लोग ऑनलाइन ठगी और अन्य साइबर अपराधों से सावधान रह सकें।

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साइबर अपराध से बचाव के लिए विद्यार्थियों को किया जागरूक, डिजिटल अरेस्ट और साइबर बुलिंग से बचने के बताए उपाय

लेखक:हिट एंड हॉट न्यूज़ डेस्क|प्रकाशित:अक्टूबर 3, 2026

अरुण कुमार मिश्रा

हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन

राजकीय इंटर कॉलेज उरई में साइबर सेल ने चलाया जागरूकता अभियान, ओटीपी और यूपीआई पिन साझा न करने की दी सलाह

उरई, जालौन। इंटरनेट और डिजिटल तकनीक ने रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाया है, लेकिन इसके साथ साइबर अपराधों का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है। ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल, सोशल मीडिया के जरिए होने वाले अपराध और डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों

से बचाव के लिए लोगों में जागरूकता जरूरी है। इसी उद्देश्य से भारत सरकार के साइबर जागरूकता अभियान के तहत शनिवार को राजकीय इंटर कॉलेज उरई में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में साइबर सेल पुलिस कार्यालय से पहुंचे अधिकारियों और कर्मचारियों ने विद्यालय के विद्यार्थियों, शिक्षकों तथा स्टाफ को साइबर अपराधों के विभिन्न रूपों के बारे में जानकारी दी। साइबर सेल की टीम ने विद्यार्थियों को समझाया कि डिजिटल दुनिया में थोड़ी सी लापरवाही कई बार आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक परेशानी का कारण भी बन सकती है। इसलिए मोबाइल फोन, इंटरनेट बैंकिंग, यूपीआई और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते समय सतर्कता बेहद आवश्यक है।

डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराने से रहें सावधान

जागरूकता कार्यक्रम के दौरान साइबर सेल कर्मियों ने विद्यार्थियों को डिजिटल अरेस्ट के बढ़ते मामलों के बारे में जानकारी दी। विद्यार्थियों को बताया गया कि साइबर ठग अक्सर पुलिस, जांच एजेंसी या किसी अन्य सरकारी विभाग का अधिकारी बनकर लोगों को फोन करते हैं। बातचीत के दौरान उन्हें किसी कथित अपराध या जांच में फंसने का डर दिखाकर घबराने की कोशिश की जाती है।

ठग वीडियो कॉल या फोन पर लगातार संपर्क बनाए रखने और पैसे भेजने का दबाव बना सकते हैं। साइबर सेल ने विद्यार्थियों को बताया कि ऐसी परिस्थितियों में डरने या घबराकर कोई आर्थिक लेन-देन करने के बजाय संबंधित मामले की सत्यता की जांच करनी चाहिए। किसी अनजान व्यक्ति के दबाव में आकर बैंक खाते, यूपीआई या अन्य वित्तीय जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।

विद्यार्थियों को यह भी समझाया गया कि किसी फोन कॉल या ऑनलाइन संदेश के आधार पर तत्काल विश्वास करना उचित नहीं है। संदिग्ध परिस्थिति में परिवार के सदस्यों, शिक्षकों या संबंधित विभाग की सहायता ली जा सकती है।

ओटीपी और यूपीआई पिन की सुरक्षा सबसे जरूरी

कार्यक्रम में ऑनलाइन वित्तीय लेन-देन को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई। साइबर सेल टीम ने विद्यार्थियों को बताया कि बैंक खाते से संबंधित गोपनीय जानकारी किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ साझा नहीं करनी चाहिए।

खास तौर पर ओटीपी, यूपीआई पिन, एटीएम या कार्ड से जुड़ी गोपनीय जानकारी और बैंकिंग संबंधी संवेदनशील विवरण किसी को नहीं बताना चाहिए। साइबर ठग अक्सर खुद को बैंक कर्मचारी या किसी प्रतिष्ठित संस्था का प्रतिनिधि बताकर ऐसी जानकारी हासिल करने का प्रयास करते हैं।

विद्यार्थियों को सलाह दी गई कि यदि कोई व्यक्ति फोन पर बैंक संबंधी जानकारी मांगता है या तत्काल भुगतान करने के लिए दबाव डालता है तो सावधानी बरतें। किसी भी संदिग्ध लेन-देन की स्थिति में तुरंत परिवार के जिम्मेदार सदस्य और संबंधित बैंक को जानकारी देना जरूरी है।

अनजान लिंक और संदिग्ध संदेशों से बचें

साइबर सेल के अधिकारियों ने विद्यार्थियों को मोबाइल फोन पर आने वाले संदिग्ध संदेशों और अनजान लिंक को लेकर भी सतर्क किया। बताया गया कि साइबर अपराधी कई बार आकर्षक ऑफर, इनाम, नौकरी, छात्रवृत्ति, पुरस्कार या अन्य लालच का संदेश भेजकर लोगों से लिंक पर क्लिक करवाने की कोशिश करते हैं।

ऐसे लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच करना आवश्यक है। विद्यार्थियों से कहा गया कि यदि किसी संदेश में तत्काल कार्रवाई करने, पैसे जमा करने या निजी जानकारी भरने के लिए कहा गया हो तो बिना सत्यापन के ऐसा नहीं करना चाहिए।

साइबर सुरक्षा के लिहाज से विद्यार्थियों को अपने मोबाइल और ऑनलाइन खातों की सुरक्षा को भी गंभीरता से लेने की सलाह दी गई।

साइबर बुलिंग से बचने के बताए तरीके

कार्यक्रम में साइबर बुलिंग का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। साइबर बुलिंग के तहत सोशल मीडिया, मैसेजिंग एप या अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसी व्यक्ति को परेशान करना, अपमानित करना या लगातार अनुचित संदेश भेजना शामिल हो सकता है।

साइबर सेल कर्मियों ने विद्यार्थियों को बताया कि सोशल मीडिया पर किसी के साथ आपत्तिजनक व्यवहार होने पर उसे नजरअंदाज करने के साथ-साथ आवश्यक साक्ष्य सुरक्षित रखना चाहिए। संदिग्ध अकाउंट को ब्लॉक और रिपोर्ट करने की सुविधा का इस्तेमाल किया जा सकता है।

विद्यार्थियों को यह संदेश भी दिया गया कि वे स्वयं किसी अन्य व्यक्ति को ऑनलाइन परेशान न करें और न ही किसी आपत्तिजनक पोस्ट या संदेश को बिना सोचे आगे साझा करें। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किया गया व्यवहार भी जिम्मेदारी और सावधानी की मांग करता है।

साइबर ग्रूमिंग के प्रति भी किया सचेत

जागरूकता कार्यक्रम में साइबर ग्रूमिंग को लेकर भी विद्यार्थियों को सावधान किया गया। साइबर सेल की टीम ने बताया कि सोशल मीडिया या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अजनबी लोग दोस्ती या विश्वास का संबंध बनाने की कोशिश कर सकते हैं। धीरे-धीरे वे निजी जानकारी, फोटो या अन्य संवेदनशील सामग्री हासिल करने का प्रयास कर सकते हैं।

विद्यार्थियों को सलाह दी गई कि ऑनलाइन किसी अजनबी पर आसानी से भरोसा न करें। अपनी निजी जानकारी, घर का पता, स्कूल से संबंधित संवेदनशील विवरण, पासवर्ड या निजी तस्वीरें अनजान लोगों के साथ साझा नहीं करनी चाहिए।

यदि कोई व्यक्ति लगातार परेशान कर रहा हो या अनुचित बातचीत के लिए दबाव बना रहा हो तो इसकी जानकारी माता-पिता, शिक्षक या किसी विश्वसनीय बड़े व्यक्ति को तुरंत देनी चाहिए।

महिला संबंधी साइबर अपराधों पर भी जानकारी

कार्यक्रम के दौरान महिला संबंधी साइबर अपराधों से बचाव के बारे में भी जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को सोशल मीडिया का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने और किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक ऑनलाइन गतिविधि की स्थिति में चुप न रहने की सलाह दी गई।

साइबर सेल ने कहा कि डिजिटल माध्यमों पर होने वाली किसी भी परेशानी को छिपाने के बजाय समय रहते इसकी जानकारी जिम्मेदार व्यक्ति या संबंधित अधिकारियों को देना महत्वपूर्ण है। समय पर शिकायत मिलने से आवश्यक कार्रवाई में मदद मिल सकती है।

साइबर अपराध होने पर 1930 पर करें शिकायत

साइबर सेल की टीम ने विद्यार्थियों को साइबर अपराध की स्थिति में उपलब्ध शिकायत व्यवस्था की जानकारी भी दी। बताया गया कि ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी या साइबर अपराध का शिकार होने पर तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत की जा सकती है।

इसके अलावा cybercrime.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया के बारे में भी विद्यार्थियों को बताया गया। अधिकारियों ने कहा कि साइबर ठगी की घटना होने पर देरी करने के बजाय जितनी जल्दी संभव हो, शिकायत दर्ज कराना जरूरी है।

परिवार और समाज को जागरूक करने की अपील

साइबर सेल के अधिकारियों ने विद्यार्थियों से केवल खुद सतर्क रहने की अपील नहीं की, बल्कि अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक करने का आग्रह किया। अधिकारियों ने कहा कि साइबर अपराध से बचाव का सबसे प्रभावी माध्यम जागरूकता और सावधानी है।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों और विद्यालय स्टाफ को ऑनलाइन दुनिया में जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करने, निजी जानकारी सुरक्षित रखने तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि को नजरअंदाज न करने का संदेश दिया गया।

साइबर जागरूकता कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को डराना नहीं, बल्कि उन्हें डिजिटल माध्यमों के सुरक्षित इस्तेमाल के लिए तैयार करना रहा। साइबर सेल ने स्पष्ट किया कि सावधानी, जानकारी और समय पर शिकायत के जरिए ऑनलाइन अपराधों के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों से अपील की गई कि वे साइबर सुरक्षा से संबंधित जानकारी अपने परिवार और परिचितों तक भी पहुंचाएं, ताकि अधिक से अधिक लोग ऑनलाइन ठगी और अन्य साइबर अपराधों से सावधान रह सकें।