महिला सुरक्षा सिर्फ महिलाओं का मुद्दा नहीं, पूरे समाज की जिम्मेदारी: वृक्षित फाउंडेशन के नुक्कड़ नाटक ने उठाए गंभीर सवाल
अरुण कुमार मिश्रा
हिट एंड हॉट न्यूज़ ब्यूरो चीफ जालौन
उरई, जालौन। गांधी जयंती के अवसर पर महिला सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण को लेकर वृक्षित फाउंडेशन की ओर से गांधी चबूतरा पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान स्वयंसेवकों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से महिलाओं के सामने मौजूद सामाजिक और सार्वजनिक चुनौतियों को लोगों के बीच प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। नाटक के जरिए कलाकारों ने महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराधों के साथ-साथ उन सामाजिक सोच और व्यवहारों पर भी सवाल उठाए, जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से महिलाओं के लिए असुरक्षित वातावरण तैयार करते हैं।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने नुक्कड़ नाटक को देखा। कलाकारों ने बिना किसी जटिल मंच व्यवस्था के आम लोगों के बीच खड़े होकर अलग-अलग परिस्थितियों को अभिनय के माध्यम से प्रस्तुत किया। नाटक का उद्देश्य मनोरंजन करना नहीं, बल्कि दर्शकों को महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों को लेकर सोचने के लिए प्रेरित करना रहा। प्रस्तुति के दौरान कलाकारों ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि महिला सुरक्षा के लिए केवल कानून और प्रशासन पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी भूमिका समझनी होगी।
सड़क से कार्यस्थल तक महिलाओं की चुनौतियों को किया प्रस्तुत
नुक्कड़ नाटक में महिलाओं के सामने आने वाली कई रोजमर्रा की समस्याओं को विषय बनाया गया। सड़क पर छेड़छाड़ और ईव-टीजिंग जैसी घटनाओं को अभिनय के जरिए दिखाया गया। कलाकारों ने बताया कि सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं को असहज महसूस कराने वाला व्यवहार सामान्य या मजाक का विषय नहीं माना जाना चाहिए। ऐसी घटनाओं का विरोध करना और पीड़ित महिला के साथ खड़ा होना समाज की जिम्मेदारी है।
नाटक में कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ होने वाले अनुचित व्यवहार और उत्पीड़न के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया गया। कलाकारों ने यह संदेश दिया कि किसी भी महिला को नौकरी या काम करने की जगह पर अपने सम्मान और सुरक्षा से समझौता नहीं करना चाहिए। कार्यस्थल ऐसा वातावरण होना चाहिए, जहां महिला अपनी क्षमता के आधार पर काम कर सके और उसे किसी भी प्रकार के भेदभाव, दबाव या उत्पीड़न का सामना न करना पड़े।
पसंद और फैसले का सम्मान करने का दिया संदेश
नाटक का एक महत्वपूर्ण हिस्सा महिलाओं की व्यक्तिगत पसंद और निर्णय के अधिकार पर केंद्रित रहा। प्रेम प्रस्ताव को स्वीकार या अस्वीकार करने को लेकर समाज में मौजूद गलत मानसिकता पर कलाकारों ने सवाल उठाए। प्रेम प्रस्ताव ठुकराए जाने के बाद महिला पर हिंसा करने या उसे डराने-धमकाने जैसी घटनाओं को नाटक के माध्यम से गंभीर अपराध के रूप में प्रस्तुत किया गया।
एसिड अटैक जैसे गंभीर अपराध का मंचन करते हुए कलाकारों ने स्पष्ट संदेश दिया कि किसी व्यक्ति को दूसरे की इच्छा के विरुद्ध संबंध स्वीकार करने के लिए मजबूर करने का अधिकार नहीं है। किसी महिला का किसी प्रस्ताव को स्वीकार करना या अस्वीकार करना उसका निजी निर्णय है। उसके निर्णय के बदले हिंसा, धमकी या प्रताड़ना किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराई जा सकती।
रात में महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा भी उठा
नुक्कड़ नाटक में रात के समय महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े सवालों को भी सामने रखा गया। कलाकारों ने अलग-अलग परिस्थितियों के जरिए बताया कि महिलाओं का सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षित आवागमन समाज की बुनियादी जिम्मेदारी है। किसी महिला के देर से घर लौटने या अकेले बाहर होने को उसके चरित्र या व्यवहार से जोड़ने के बजाय सुरक्षा व्यवस्था और सामाजिक सोच पर ध्यान देने की जरूरत है।
नाटक में बलात्कार और हत्या जैसी गंभीर घटनाओं के संदर्भ के माध्यम से दर्शकों को यह संदेश दिया गया कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा को लेकर समाज की चुप्पी समस्या को और गंभीर बना सकती है। कलाकारों ने लोगों से अपील की कि यदि उनके आसपास किसी महिला के साथ उत्पीड़न या हिंसा होती है तो वे तमाशबीन बनने के बजाय उचित माध्यम से सहायता और शिकायत की प्रक्रिया में सहयोग करें।
महिला सशक्तिकरण का मतलब सुरक्षित वातावरण भी
वृक्षित फाउंडेशन के अध्यक्ष हर्ष शर्मा ने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल महिलाओं को अधिकारों के बारे में जानकारी देने तक सीमित नहीं है। वास्तविक सशक्तिकरण तभी संभव है, जब महिलाओं को घर, कार्यस्थल और सार्वजनिक स्थानों पर सम्मान और सुरक्षा का वातावरण मिले।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को आगे बढ़ने के समान अवसर मिलना जरूरी है। इसके साथ ही समाज में ऐसी सोच विकसित करने की आवश्यकता है, जिसमें महिलाओं की स्वतंत्रता और निर्णयों का सम्मान किया जाए। उन्होंने कहा कि महिला सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल महिलाओं या उनके परिवारों की नहीं हो सकती। इसमें पुरुषों, परिवारों, संस्थानों और समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी आवश्यक है।
युवाओं की भूमिका को भी किया रेखांकित
नुक्कड़ नाटक में युवाओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। स्वयंसेवकों ने विभिन्न किरदारों के जरिए सामाजिक परिस्थितियों को दर्शाया और लोगों तक जागरूकता का संदेश पहुंचाया। युवाओं के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि समाज में बदलाव की शुरुआत सोच में बदलाव से होती है।
कार्यक्रम में यह बात भी सामने रखी गई कि बच्चों और युवाओं को बचपन से ही महिलाओं के सम्मान, समानता और व्यक्तिगत अधिकारों के बारे में समझाया जाना चाहिए। परिवार और शिक्षण संस्थान इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। सम्मानजनक व्यवहार केवल किसी अभियान का हिस्सा न होकर दैनिक जीवन का हिस्सा बनना चाहिए।
स्वयंसेवकों ने अभिनय से दिया जागरूकता संदेश
नुक्कड़ नाटक में वृक्षित फाउंडेशन के स्वयंसेवकों सोम सूर्य, अनुष्का, काजल, पारुल, रक्षा, निकिता, अभय, कृष्ण, साहिल, हर्ष और तनिष्का सहित अन्य स्वयंसेवकों ने अभिनय किया। सभी कलाकारों ने अलग-अलग भूमिकाओं के जरिए महिलाओं से जुड़े सामाजिक मुद्दों को दर्शकों के सामने रखा।
कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और समान अधिकारों की आवश्यकता पर जोर दिया। नाटक के दौरान दर्शकों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा या उत्पीड़न को सामान्य घटना मानकर नजरअंदाज करना सही नहीं है।
गांधी जयंती पर सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश
गांधी जयंती के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम ने सामाजिक जागरूकता के साथ जिम्मेदारी का संदेश भी दिया। नुक्कड़ नाटक जैसे माध्यमों की खासियत यह है कि इनके जरिए जटिल सामाजिक मुद्दों को सीधे आम लोगों तक पहुंचाया जा सकता है। वृक्षित फाउंडेशन के कार्यक्रम में भी कलाकारों ने इसी माध्यम का उपयोग करते हुए महिलाओं से जुड़े मुद्दों को सरल लेकिन प्रभावी तरीके से सामने रखा।
कार्यक्रम के समापन पर लोगों से अपील की गई कि वे महिलाओं के साथ होने वाले किसी भी प्रकार के उत्पीड़न, भेदभाव या हिंसा के खिलाफ आवाज उठाएं। साथ ही महिलाओं के प्रति सम्मानजनक व्यवहार को अपनी दैनिक जीवनशैली का हिस्सा बनाने का आह्वान किया गया।
वृक्षित फाउंडेशन की ओर से कहा गया कि महिला सुरक्षा को केवल किसी एक वर्ग की जिम्मेदारी मानना उचित नहीं है। सुरक्षित समाज के निर्माण के लिए परिवार, स्कूल, कार्यस्थल, प्रशासन और आम नागरिकों को मिलकर प्रयास करना होगा। जब महिलाओं को बिना भय के अपनी शिक्षा, रोजगार और सामाजिक जीवन से जुड़े फैसले लेने का अवसर मिलेगा, तभी सशक्तिकरण का उद्देश्य व्यापक रूप से पूरा हो सकेगा।
गांधी जयंती पर आयोजित इस नुक्कड़ नाटक ने उरई में लोगों के बीच महिला सुरक्षा और सम्मान को लेकर संवाद की जरूरत को सामने रखा। कार्यक्रम का संदेश स्पष्ट रहा कि महिलाओं को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराना केवल एक अभियान या आयोजन तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह पूरे समाज की निरंतर जिम्मेदारी बननी चाहिए।