पैमाना प्लेटफॉर्म: बड़ी अवसंरचना परियोजनाओं की निगरानी को डिजिटल ताकत, समयबद्ध क्रियान्वयन और पारदर्शिता पर जोर

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विशेषज्ञों के अनुसार, पैमाना प्लेटफॉर्म बड़ी अवसंरचना परियोजनाओं की निगरानी को अधिक डेटा-आधारित और जवाबदेह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। एकीकृत डिजिटल व्यवस्था से मंत्रालयों और विभागों के बीच परियोजना संबंधी जानकारी साझा करना आसान होगा तथा देरी या बाधाओं की पहचान समय रहते की जा सकेगी।

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नई दिल्ली। भारत में तेजी से हो रहे अवसंरचना विकास के बीच बड़ी परियोजनाओं की समय पर निगरानी और प्रभावी क्रियान्वयन सरकार के लिए महत्वपूर्ण प्राथमिकता बन गया है। इसी दिशा में केंद्र सरकार ने ‘पैमाना’ (PAIMANA) प्लेटफॉर्म की शुरुआत की है। इसका उद्देश्य केंद्रीय क्षेत्र की उन अवसंरचना परियोजनाओं की प्रगति पर नजर रखना है, जिनकी अनुमानित लागत 150 करोड़ रुपये या उससे अधिक है।

यह डिजिटल पहल केवल परियोजनाओं की स्थिति दर्ज करने तक सीमित नहीं है। इसके जरिए परियोजनाओं से संबंधित सूचनाओं को एक जगह उपलब्ध कराने, प्रगति की नियमित निगरानी करने और संभावित देरी की पहचान करने की व्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। इससे नीति निर्माताओं को समय रहते आवश्यक निर्णय लेने में मदद मिल सकती है।

क्या है पैमाना प्लेटफॉर्म?

पैमाना को बड़े पैमाने की सरकारी अवसंरचना परियोजनाओं की निगरानी के लिए विकसित डिजिटल व्यवस्था के रूप में देखा जा रहा है। इसके अंतर्गत सड़क, रेल, ऊर्जा, नागरिक उड्डयन, बंदरगाह, जलमार्ग और दूरसंचार जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में चल रही परियोजनाओं की जानकारी को व्यवस्थित तरीके से दर्ज और मॉनिटर किया जा सकता है।

इस प्लेटफॉर्म का एक महत्वपूर्ण हिस्सा PAIMANA-CRIP मॉड्यूल है, जिसे 8 जुलाई 2026 को लॉन्च किया गया। यह एक केंद्रीय डेटा रिपॉजिटरी के रूप में काम करता है, जहां विभिन्न परियोजनाओं से संबंधित जानकारी को एकीकृत करने का प्रयास किया गया है।

इस तरह अलग-अलग विभागों और मंत्रालयों से आने वाले परियोजना संबंधी आंकड़ों को एक साझा डिजिटल ढांचे में लाने से निगरानी प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो सकती है।

रियल टाइम निगरानी की दिशा में कदम

बड़ी सरकारी परियोजनाओं में देरी कई कारणों से हो सकती है। भूमि संबंधी मुद्दे, पर्यावरणीय मंजूरी, वित्तीय अड़चन, ठेके से जुड़े विवाद, सामग्री की उपलब्धता या प्रशासनिक समन्वय जैसी परिस्थितियां परियोजना की समयसीमा को प्रभावित कर सकती हैं।

पैमाना प्लेटफॉर्म का उद्देश्य परियोजनाओं की प्रगति से संबंधित जानकारी को लगातार अपडेट रखने में मदद करना है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, 60 प्रतिशत से अधिक परियोजनाओं का डेटा API के माध्यम से स्वचालित रूप से अपडेट किया जाता है।

स्वचालित डेटा अपडेट की व्यवस्था से मैनुअल डेटा एंट्री पर निर्भरता कम हो सकती है और परियोजना की वर्तमान स्थिति का अधिक तेजी से आकलन किया जा सकता है।

20 से अधिक मंत्रालयों की भागीदारी

इस पहल की सफलता में विभिन्न मंत्रालयों और विभागों की भागीदारी महत्वपूर्ण है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 20 से अधिक मंत्रालय और विभाग नियमित रूप से परियोजनाओं से संबंधित डेटा साझा कर रहे हैं।

कई मंत्रालयों के बीच डेटा का एकीकृत होना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि एक बड़ी अवसंरचना परियोजना अक्सर एक से अधिक सरकारी एजेंसियों से जुड़ी होती है। यदि संबंधित विभागों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान तेज और व्यवस्थित हो, तो निर्णय लेने की प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी हो सकती है।

सड़क से लेकर ऊर्जा तक कई क्षेत्र शामिल

भारत में बुनियादी ढांचे का विकास कई क्षेत्रों में एक साथ हो रहा है। पैमाना प्लेटफॉर्म के दायरे में भी विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों की परियोजनाओं को शामिल किया गया है।

सड़क परिवहन

सड़क नेटवर्क आर्थिक गतिविधियों की रीढ़ माना जाता है। नई सड़कों, एक्सप्रेसवे और अन्य परिवहन परियोजनाओं की निगरानी से निर्माण कार्य की प्रगति पर नजर रखने में मदद मिल सकती है।

रेलवे

रेलवे परियोजनाओं में नई रेल लाइन, दोहरीकरण, विद्युतीकरण और अन्य आधारभूत संरचना से जुड़े कार्य शामिल होते हैं। इनकी समयबद्ध निगरानी यात्री और माल परिवहन क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

नागरिक उड्डयन

हवाई अड्डों और विमानन से जुड़ी परियोजनाएं देश की कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करती हैं। डिजिटल निगरानी से ऐसी परियोजनाओं की प्रगति को बेहतर तरीके से ट्रैक किया जा सकता है।

बंदरगाह और जलमार्ग

भारत के व्यापार में समुद्री परिवहन की बड़ी भूमिका है। बंदरगाह और जलमार्ग परियोजनाओं का समय पर पूरा होना लॉजिस्टिक्स लागत और व्यापारिक दक्षता पर असर डाल सकता है।

ऊर्जा

बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और ऊर्जा अवसंरचना से जुड़ी परियोजनाएं देश की औद्योगिक और आर्थिक जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

दूरसंचार

डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ दूरसंचार अवसंरचना की भूमिका लगातार बढ़ी है। बेहतर नेटवर्क और कनेक्टिविटी से शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार तथा डिजिटल सेवाओं को मजबूती मिलती है।

पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा

पैमाना प्लेटफॉर्म की सबसे महत्वपूर्ण संभावनाओं में से एक पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करना है। यदि किसी परियोजना की समयसीमा, प्रगति और संबंधित गतिविधियों की जानकारी व्यवस्थित रूप से उपलब्ध हो, तो निगरानी करने वाली संस्थाओं के लिए स्थिति का आकलन आसान हो जाता है।

यह व्यवस्था परियोजनाओं में होने वाली देरी की पहचान करने में भी उपयोगी हो सकती है। समय रहते समस्या सामने आने पर संबंधित विभाग आवश्यक कदम उठा सकते हैं।

हालांकि केवल डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू कर देना पर्याप्त नहीं है। इसका वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि उपलब्ध आंकड़ों का उपयोग निर्णय लेने, समस्या समाधान और जवाबदेही तय करने में कितनी प्रभावी तरीके से किया जाता है।

अर्थव्यवस्था को मिल सकता है फायदा

बड़ी अवसंरचना परियोजनाओं में समय और लागत दोनों महत्वपूर्ण होते हैं। किसी परियोजना में लंबे समय तक देरी होने से लागत बढ़ सकती है और अपेक्षित आर्थिक लाभ भी टल सकता है।

यदि डिजिटल निगरानी के माध्यम से परियोजनाओं में आने वाली बाधाओं को जल्दी पहचाना जाता है और उनका समाधान समय पर किया जाता है, तो सरकारी निवेश की उपयोगिता बढ़ सकती है।

समय पर पूरी हुई सड़क, रेल, ऊर्जा और संचार परियोजनाएं उद्योगों को बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान कर सकती हैं। इससे निवेश, रोजगार और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलने की संभावना रहती है।

नागरिकों के लिए क्या बदलेगा?

अवसंरचना परियोजनाओं का अंतिम उद्देश्य आम नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। नई सड़कें यात्रा को आसान बनाती हैं, रेलवे कनेक्टिविटी परिवहन व्यवस्था को मजबूत करती है, ऊर्जा परियोजनाएं बिजली की जरूरत पूरी करने में योगदान देती हैं और दूरसंचार नेटवर्क डिजिटल सेवाओं तक पहुंच बढ़ाते हैं।

इसलिए किसी परियोजना की समय पर पूर्ति का सीधा या अप्रत्यक्ष लाभ नागरिकों तक पहुंचता है। पैमाना जैसे डिजिटल निगरानी तंत्र इस प्रक्रिया को अधिक जवाबदेह बनाने में योगदान दे सकते हैं।

सामने रहेंगी कुछ चुनौतियां

प्लेटफॉर्म की क्षमता के बावजूद इसके प्रभावी संचालन के सामने कई चुनौतियां हो सकती हैं। सबसे पहली चुनौती डेटा की गुणवत्ता और एकरूपता से जुड़ी है। अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों से प्राप्त आंकड़ों को एक समान प्रारूप में बनाए रखना जरूरी होगा।

दूसरी चुनौती तकनीकी विश्वसनीयता की है। API आधारित स्वचालित अपडेट तभी प्रभावी होंगे जब संबंधित डिजिटल प्रणालियां लगातार और सुरक्षित तरीके से काम करें।

इसके अलावा परियोजना अधिकारियों और संबंधित कर्मचारियों को डिजिटल प्रणालियों के उपयोग के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण देना भी आवश्यक होगा। साइबर सुरक्षा और डेटा संरक्षण को भी प्राथमिकता देनी होगी।

विकसित भारत 2047 से संबंध

भारत ने 2047 तक देश को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए मजबूत भौतिक और डिजिटल अवसंरचना आवश्यक है।

सड़क, रेलवे, ऊर्जा, बंदरगाह, हवाई अड्डे और दूरसंचार जैसी परियोजनाएं आर्थिक विकास के लिए आधार तैयार करती हैं। इसलिए इन परियोजनाओं की प्रभावी निगरानी भी विकास की गति बनाए रखने का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

पैमाना प्लेटफॉर्म इसी व्यापक डिजिटल शासन व्यवस्था का हिस्सा बन सकता है, जहां तकनीक का इस्तेमाल केवल सेवाएं देने के लिए नहीं, बल्कि सरकारी परियोजनाओं की निगरानी और बेहतर निर्णय लेने के लिए भी किया जाता है।

आगे की दिशा

भविष्य में इस तरह के प्लेटफॉर्म को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए डेटा एनालिटिक्स, स्वचालित अलर्ट और उन्नत डिजिटल निगरानी जैसी तकनीकों का उपयोग बढ़ाया जा सकता है। यदि किसी परियोजना में निर्धारित समयसीमा से लगातार विचलन हो रहा हो, तो संबंधित अधिकारियों को समय रहते अलर्ट मिलना उपयोगी साबित हो सकता है।

इसके साथ ही परियोजनाओं की वास्तविक प्रगति और डिजिटल रिकॉर्ड के बीच तालमेल बनाए रखना भी जरूरी होगा। पारदर्शी डेटा व्यवस्था और नियमित समीक्षा से इस प्लेटफॉर्म की उपयोगिता और बढ़ सकती है।

निष्कर्ष

पैमाना प्लेटफॉर्म भारत की बड़ी अवसंरचना परियोजनाओं की निगरानी को डिजिटल और अधिक व्यवस्थित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। 150 करोड़ रुपये या उससे अधिक लागत वाली केंद्रीय क्षेत्र की परियोजनाओं को एक साझा निगरानी व्यवस्था से जोड़ने का उद्देश्य परियोजनाओं की प्रगति पर बेहतर नजर रखना और संभावित देरी को समय रहते पहचानना है।

यदि मंत्रालयों के बीच डेटा साझा करने की व्यवस्था, तकनीकी ढांचा और जवाबदेही तंत्र प्रभावी ढंग से काम करते हैं, तो पैमाना परियोजना प्रबंधन को अधिक पारदर्शी और परिणाम-केंद्रित बनाने में मदद कर सकता है।

वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि डिजिटल निगरानी से मिलने वाली जानकारी कितनी तेजी से ठोस प्रशासनिक कार्रवाई में बदलती है। यही पहल को केवल एक डेटा प्लेटफॉर्म के बजाय बेहतर शासन और तेज अवसंरचना विकास का प्रभावी उपकरण बना सकता है।

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