भारत-मॉरीशस समुद्री साझेदारी को नई धार, हिंद महासागर में सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग होगा मजबूत

0

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत और मॉरीशस के बीच बढ़ता समुद्री सहयोग हिंद महासागर में साझा सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मॉरीशस की रणनीतिक भौगोलिक स्थिति और भारत की समुद्री क्षमता दोनों देशों को स्वाभाविक साझेदार बनाती है। प्रशिक्षण, समुद्री निगरानी, क्षमता निर्माण और सूचना साझाकरण जैसे क्षेत्रों में सहयोग से गैर-पारंपरिक समुद्री चुनौतियों से निपटने की क्षमता बढ़ सकती है।

AI Generated photo

नई दिल्ली। भारत और मॉरीशस के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों में समुद्री सहयोग एक बेहद महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। इसी साझेदारी को और मजबूत करने के उद्देश्य से नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन 10 से 13 अगस्त 2026 तक मॉरीशस की आधिकारिक यात्रा पर हैं। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा और बदलती सामरिक परिस्थितियों का महत्व लगातार बढ़ रहा है।

एडमिरल स्वामीनाथन की यात्रा का व्यापक उद्देश्य दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों को और गहरा करना, समुद्री क्षेत्र में परिचालन सहयोग बढ़ाना तथा मॉरीशस की क्षमता निर्माण में भारत की भूमिका को मजबूत करना है। यह पहल भारत की व्यापक ‘महासागर’ (MAHASAGAR) सोच से भी जुड़ी हुई है, जिसमें क्षेत्रीय देशों के साथ साझा सुरक्षा और विकास पर जोर दिया गया है।

दशकों पुरानी दोस्ती का अहम आधार है समुद्री सहयोग

भारत और मॉरीशस के संबंध केवल कूटनीतिक स्तर तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और मानवीय रिश्तों के साथ-साथ समुद्री क्षेत्र में भी लगातार सहयोग विकसित हुआ है।

हिंद महासागर में मॉरीशस की भौगोलिक स्थिति उसे रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाती है। भारत के लिए मॉरीशस एक ऐसा साझेदार है जिसके साथ समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर स्वाभाविक हित जुड़े हुए हैं।

दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच समय-समय पर प्रशिक्षण, पेशेवर आदान-प्रदान, संयुक्त समुद्री गतिविधियां, बंदरगाह यात्राएं और समुद्री निगरानी से जुड़े सहयोग होते रहे हैं। इससे दोनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी समझ और परिचालन तालमेल को बढ़ावा मिला है।

समुद्री सुरक्षा पर बढ़ता जोर

हिंद महासागर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्रों में से एक है। इस क्षेत्र से ऊर्जा, कच्चे माल और विभिन्न प्रकार की व्यापारिक वस्तुओं की बड़ी मात्रा समुद्री मार्गों से होकर गुजरती है। ऐसे में समुद्री मार्गों की सुरक्षा सीधे तौर पर क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था और वैश्विक व्यापार से जुड़ी हुई है।

भारत और मॉरीशस के बीच बढ़ता समुद्री सहयोग समुद्री डकैती, अवैध मछली पकड़ने, तस्करी तथा अन्य गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में उपयोगी हो सकता है।

दोनों देशों के बीच सहयोग से समुद्री क्षेत्र में सूचना साझा करने और निगरानी क्षमताओं को बेहतर बनाने की संभावनाएं भी बढ़ती हैं। इसका लाभ केवल दोनों देशों को ही नहीं, बल्कि व्यापक हिंद महासागर क्षेत्र को मिल सकता है।

मॉरीशस की क्षमता निर्माण में भारत की भूमिका

भारत लंबे समय से पड़ोसी और मित्र देशों की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने में सहयोग करता रहा है। मॉरीशस के साथ भी क्षमता निर्माण इस साझेदारी का प्रमुख हिस्सा है।

प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग, समुद्री निगरानी, हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण और पेशेवर आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में सहयोग से मॉरीशस अपनी समुद्री सुरक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बना सकता है।

एडमिरल स्वामीनाथन की यात्रा के दौरान ऐसे क्षेत्रों पर चर्चा की संभावना है, जिनके जरिए दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच व्यावहारिक सहयोग को आगे बढ़ाया जा सके। इससे भविष्य में संयुक्त प्रशिक्षण और समुद्री अभियानों के लिए बेहतर समन्वय का रास्ता तैयार हो सकता है।

बहुपक्षीय समुद्री मंचों पर भी मजबूत भागीदारी

भारत और मॉरीशस के समुद्री संबंध द्विपक्षीय गतिविधियों तक सीमित नहीं हैं। मॉरीशस भारतीय नौसेना से जुड़ी विभिन्न बहुपक्षीय समुद्री पहलों में भी भागीदारी करता रहा है।

MILAN, International Fleet Review, Goa Maritime Conclave और Indian Ocean Naval Symposium (IONS) जैसे मंच समुद्री देशों को एक-दूसरे के साथ अनुभव साझा करने और साझा चुनौतियों पर चर्चा करने का अवसर देते हैं।

इन मंचों पर मॉरीशस की भागीदारी हिंद महासागर में भारत और मॉरीशस के बीच बढ़ते रणनीतिक तालमेल को दर्शाती है। साथ ही, यह दोनों देशों को समुद्री सुरक्षा के व्यापक ढांचे में एक-दूसरे के करीब लाती है।

‘महासागर’ दृष्टि के संदर्भ में यात्रा का महत्व

भारत की हिंद महासागर नीति में MAHASAGAR की अवधारणा महत्वपूर्ण स्थान रखती है। इसका विस्तृत अर्थ “Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions” है। इसका मूल विचार यह है कि क्षेत्रीय देशों की सुरक्षा और आर्थिक प्रगति को साझा प्रयासों के माध्यम से आगे बढ़ाया जाए।

मॉरीशस इस दृष्टिकोण के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण साझेदार है। द्वीपीय देश होने के कारण उसकी अर्थव्यवस्था और सुरक्षा समुद्री क्षेत्र से गहराई से जुड़ी हुई है। इसलिए समुद्री सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, क्षमता निर्माण और आर्थिक गतिविधियों के क्षेत्र में भारत के साथ सहयोग उसके लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।

भारत के लिए भी मॉरीशस के साथ मजबूत संबंध हिंद महासागर में सहयोगात्मक और समावेशी सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ावा देने का माध्यम हैं।

आर्थिक दृष्टि से भी अहम है सुरक्षित समुद्री क्षेत्र

समुद्री सुरक्षा का सीधा संबंध व्यापार और आर्थिक विकास से है। यदि समुद्री मार्ग सुरक्षित और स्थिर रहते हैं तो व्यापारिक जहाजों की आवाजाही सुचारु रहती है और निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होता है।

भारत और मॉरीशस के बीच बेहतर समुद्री सहयोग से समुद्री व्यापार, मत्स्य क्षेत्र, बंदरगाह गतिविधियों तथा समुद्र आधारित आर्थिक अवसरों को सकारात्मक वातावरण मिल सकता है।

इसके अलावा समुद्री संसाधनों के टिकाऊ उपयोग और समुद्री पर्यावरण संरक्षण जैसे विषय भी आने वाले समय में दोनों देशों के सहयोग के महत्वपूर्ण क्षेत्र बन सकते हैं।

वैश्विक दक्षिण में साझेदारी को मिलेगा बल

भारत अपनी विदेश नीति में ग्लोबल साउथ के देशों के साथ सहयोग को लगातार महत्व देता रहा है। मॉरीशस इस संदर्भ में भारत का एक महत्वपूर्ण साझेदार है।

दोनों देशों के बीच समुद्री क्षेत्र में सहयोग बढ़ना केवल रक्षा संबंधों को मजबूत करने तक सीमित नहीं है। यह विकासशील देशों के बीच आपसी सहयोग, क्षमता निर्माण और साझा चुनौतियों के समाधान की दिशा में भी महत्वपूर्ण संदेश देता है।

हिंद महासागर क्षेत्र में छोटे द्वीपीय देशों की सुरक्षा और विकास संबंधी जरूरतों को समझना भारत की क्षेत्रीय कूटनीति के लिए भी महत्वपूर्ण है।

बदलते समुद्री समीकरणों के बीच रणनीतिक महत्व

हिंद महासागर में पिछले कुछ वर्षों में रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और समुद्री गतिविधियां बढ़ी हैं। ऐसे वातावरण में भारत के लिए अपने विश्वसनीय समुद्री साझेदारों के साथ संबंधों को लगातार मजबूत करना महत्वपूर्ण है।

मॉरीशस के साथ सहयोग भारत की उस नीति को आगे बढ़ाता है जिसमें हिंद महासागर को सहयोग, संपर्क, सुरक्षा और साझा विकास का क्षेत्र बनाने पर जोर दिया जाता है।

एडमिरल स्वामीनाथन की यात्रा इसी व्यापक रणनीतिक सोच का हिस्सा मानी जा सकती है। यह यात्रा दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच संवाद को बढ़ाने के साथ-साथ भविष्य के सहयोग की नई संभावनाओं को तलाशने का अवसर भी प्रदान करती है।

आगे की राह

भारत-मॉरीशस समुद्री साझेदारी के सामने भविष्य में कई नए अवसर हैं। समुद्री निगरानी, प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग, हाइड्रोग्राफी, मानवीय सहायता एवं आपदा राहत, समुद्री पर्यावरण और समुद्री अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और विस्तारित किया जा सकता है।

इसके साथ ही दोनों देशों के बीच नियमित उच्चस्तरीय संवाद और संयुक्त गतिविधियां समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में आपसी विश्वास को और मजबूत कर सकती हैं।

निष्कर्ष

एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन की मॉरीशस यात्रा भारत और मॉरीशस के बीच पहले से मजबूत समुद्री संबंधों को नई दिशा देने की क्षमता रखती है। इस दौरे का महत्व केवल रक्षा सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हिंद महासागर में सुरक्षित समुद्री मार्ग, क्षेत्रीय स्थिरता, क्षमता निर्माण और साझा आर्थिक विकास से भी जुड़ा हुआ है।

भारत और मॉरीशस की साझेदारी इस बात का उदाहरण है कि हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा और विकास को टकराव के बजाय सहयोग के माध्यम से आगे बढ़ाया जा सकता है। आने वाले वर्षों में दोनों देशों के बीच समुद्री तालमेल जितना मजबूत होगा, उतना ही हिंद महासागर को अधिक सुरक्षित, स्थिर और समृद्ध क्षेत्र बनाने के प्रयासों को बल मिलेगा।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

इन्हे भी देखें