“भारत बोध केंद्र” – भारत की सांस्कृतिक धरोहर को समर्पित एक नई पहल

नई दिल्ली, 10 मई 2025 – भारत सरकार के आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल ने आज इंडिया हैबिटेट सेंटर (IHC), नई दिल्ली में एक विशेष समारोह के दौरान “भारत बोध केंद्र” का उद्घाटन किया। यह केंद्र भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और सभ्यतागत विरासत को समर्पित एक अभिनव पहल है, जिसका उद्देश्य देशवासियों को भारतीय परंपराओं, विचारधाराओं और कलाओं के प्रति जागरूक बनाना है।
भारत बोध केंद्र – एक सांस्कृतिक शोध व अध्ययन स्थल
IHC की हैबिटेट लाइब्रेरी और रिसोर्स सेंटर में स्थापित इस नए खंड में भारतीय कला, संगीत, अध्यात्म, इतिहास, दर्शन, और अन्य पारंपरिक विषयों पर आधारित पुस्तकों और संसाधनों का विशाल संग्रह उपलब्ध कराया गया है। यह केंद्र विशेष रूप से IHC के सदस्यों के लिए एक शोधपरक और आत्मिक वातावरण प्रदान करेगा, जहाँ वे भारत की कालातीत परंपराओं और समृद्ध सांस्कृतिक विमर्श की गहराइयों में उतर सकेंगे।
पर्यावरणीय जागरूकता और सतत विकास की सराहना
केंद्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल ने अपने संबोधन में IHC की हरित पहलों की सराहना करते हुए इसे सतत जीवनशैली को प्रोत्साहित करने वाला एक उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि IHC जैसे संस्थानों को अन्य संस्थानों को “गोद लेने” की दिशा में काम करना चाहिए, जिससे पर्यावरण के प्रति जागरूक व्यवहार और नीतियों का व्यापक प्रसार किया जा सके।
आईएचसी परिसर – एक सांस्कृतिक जीवंत केंद्र
उद्घाटन समारोह के पश्चात, मंत्रालय के सचिव व IHC अध्यक्ष श्री कटिकिथला श्रीनिवास तथा निदेशक प्रो. के. जी. सुरेश ने माननीय मंत्री को पूरे 9 एकड़ में फैले IHC परिसर का भ्रमण कराया। उन्होंने IHC की विशिष्ट वास्तुकला, पर्यावरण-अनुकूल संरचनाओं तथा सांस्कृतिक एवं बौद्धिक गतिविधियों की भूमिका को रेखांकित किया। इस अवसर पर HUDCO के सीएमडी श्री संजय कुलश्रेष्ठ, NHB के एमडी श्री संजय शुक्ला सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
संस्कृति और शिक्षा का संगम
भारत बोध केंद्र न केवल पुस्तकालय के रूप में कार्य करेगा, बल्कि यह छात्रों, शोधकर्ताओं, कलाकारों और भारतीय संस्कृति में रुचि रखने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए एक ज्ञानवर्धक मंच प्रदान करेगा। यह पहल “आजादी का अमृत महोत्सव” के अंतर्गत देश की गौरवशाली विरासत को नए सिरे से पहचान दिलाने की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम है।
निष्कर्ष
“भारत बोध केंद्र” आधुनिक भारत को उसकी जड़ों से जोड़ने वाला एक सशक्त माध्यम बनेगा। यह केंद्र न केवल ज्ञान का स्रोत होगा, बल्कि आत्मबोध, सांस्कृतिक गर्व और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक भी सिद्ध होगा। इस पहल से आने वाली पीढ़ियों को अपनी संस्कृति को समझने, संजोने और आगे बढ़ाने की प्रेरणा मिलेगी।
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