25 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी से मुक्ति — भारत की ऐतिहासिक उपलब्धि

भारत ने हाल के वर्षों में सामाजिक न्याय, समावेशी विकास और सतत कल्याण के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। देश ने 25 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी की रेखा से ऊपर उठाने में सफलता पाई है, जो न केवल राष्ट्रीय स्तर पर बल्कि वैश्विक मंच पर भी एक प्रेरणादायी उदाहरण बन गया है।
गरीबी उन्मूलन का आधार: योजनाओं की व्यापकता
इस सफलता के पीछे केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा चलाई जा रही जन-कल्याणकारी योजनाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, जन-धन योजना, और पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना जैसी पहलों ने देश के गरीब और वंचित वर्गों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाई हैं।
स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण में सुधार ने गरीब परिवारों की जीवन गुणवत्ता में सुधार लाया, जिससे उनके आर्थिक स्तर में वृद्धि हुई। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार गारंटी योजनाओं और कौशल विकास मिशनों ने लोगों को आत्मनिर्भर बनने में मदद की।
NITI Aayog और संयुक्त राष्ट्र की पुष्टि
नीति आयोग और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों में यह स्पष्ट किया गया है कि भारत में बहुआयामी गरीबी (Multidimensional Poverty Index – MPI) में तेज गिरावट दर्ज की गई है। शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन स्तर के मापदंडों पर देश ने उल्लेखनीय प्रगति की है।
महिलाओं और बच्चों को विशेष लाभ
गरीबी उन्मूलन में महिलाओं और बच्चों पर केंद्रित कार्यक्रमों की विशेष भूमिका रही। मातृत्व लाभ योजनाएं, बालिका शिक्षा को बढ़ावा, पोषण अभियान और महिला स्व-सहायता समूहों को सशक्त करने वाली नीतियों ने सामाजिक संरचना को मजबूती प्रदान की।
डिजिटल और बैंकिंग समावेशन का योगदान
जन-धन खातों के ज़रिए वित्तीय समावेशन को व्यापक बनाया गया। अब गांव-गांव तक लोग डिजिटल भुगतान और बैंकिंग सेवाओं से जुड़ चुके हैं, जिससे सरकारी लाभ सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंच रहे हैं। इससे भ्रष्टाचार में कमी और पारदर्शिता में वृद्धि हुई।
भविष्य की राह
हालांकि गरीबी उन्मूलन की दिशा में यह एक ऐतिहासिक कदम है, फिर भी यह यात्रा अभी समाप्त नहीं हुई है। सरकार अब “समान अवसरों वाले समावेशी भारत” की दिशा में कार्य कर रही है। लक्ष्य है कि अगले कुछ वर्षों में शेष गरीबों को भी मुख्यधारा में लाकर उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर प्रदान किया जाए।
निष्कर्ष:
भारत का 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालना केवल आंकड़ों की उपलब्धि नहीं, बल्कि करोड़ों सपनों को नई उड़ान देने की कहानी है। यह सामाजिक परिवर्तन की वह मिसाल है, जिसमें एक सशक्त नेतृत्व, नीतिगत प्रतिबद्धता और जनभागीदारी ने मिलकर विकास को वास्तव में “सबका साथ, सबका विकास” बना दिया।
