एक सुरक्षित डिजिटल भविष्य की ओर: एंटोनियो गुटेरेस ने समावेशी और नैतिक तकनीकी वातावरण की दी आवाज

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने एक बार फिर दुनिया को आगाह किया है कि तेज़ी से बढ़ते डिजिटल परिवर्तन के इस युग में तकनीकी विकास केवल तभी सार्थक है जब वह सभी के लिए न्यायपूर्ण, समावेशी और नैतिक हो। उन्होंने एक वैश्विक संदेश में कहा कि यदि डिजिटल प्रगति को संतुलित ढंग से नहीं संभाला गया, तो यह असमानताओं को और गहरा कर सकती है।
डिजिटल खाई को पाटना सबसे पहली प्राथमिकता
गुटेरेस ने ज़ोर देकर कहा कि आज भी अरबों लोग इंटरनेट की पहुँच से वंचित हैं, जिससे उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और आर्थिक अवसरों से दूर रखा गया है। यदि इस डिजिटल खाई को तुरंत नहीं भरा गया, तो डिजिटल क्रांति केवल कुछ विशेष वर्गों तक सीमित रह जाएगी, जिससे वैश्विक असमानता और भी बढ़ेगी।
सत्य और सहिष्णुता से भरे डिजिटल मंचों की आवश्यकता
महासचिव ने ऑनलाइन सूचना की सत्यता और विश्वसनीयता पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि डिजिटल मंचों को नफरत, झूठ और गलत सूचनाओं से मुक्त होना चाहिए और इसके स्थान पर सहिष्णुता, आपसी सम्मान और सच्चाई को बढ़ावा देना चाहिए। डिजिटल लोकतंत्र की सेहत के लिए यह बेहद आवश्यक है।
डिजिटल शक्ति का केंद्रीकरण एक बड़ा खतरा
गुटेरेस ने आगाह किया कि अगर डिजिटल दुनिया कुछ गिने-चुने निगमों या ताकतवर व्यक्तियों के हाथों में सिमट गई, तो इससे नवाचार, पारदर्शिता और जवाबदेही को गहरा आघात पहुंचेगा। डिजिटल स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए विविधता और विकेंद्रीकरण अनिवार्य हैं।
समावेश, पारदर्शिता और विश्वास की दिशा में कदम
उन्होंने यह भी कहा कि एक सुरक्षित डिजिटल भविष्य तभी संभव है जब डिज़ाइन से लेकर नीति तक सभी स्तरों पर समावेशिता हो। नैतिक नियमों पर आधारित तकनीकी विकास, उपयोगकर्ता की निजता की रक्षा और मजबूत नियामक ढांचा एक ऐसे डिजिटल समाज की नींव रख सकते हैं जो सभी की आवाज़ को सुने और उसका सम्मान करे।
निष्कर्ष
एंटोनियो गुटेरेस की यह अपील केवल एक चेतावनी नहीं, बल्कि एक प्रेरणात्मक दिशा-निर्देश है। यह समय है जब दुनिया को मिलकर डिजिटल युग को मानवता की भलाई के लिए एक सशक्त और नैतिक मार्ग पर आगे बढ़ाना होगा, ताकि यह तकनीकी युग सभी के लिए समान रूप से फलदायी बन सके।
