फ़रवरी 13, 2026

“शेर की दहाड़” अभियान: इज़राइल की रणनीति में ऐतिहासिक मोड़

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| दिनांक: 25 जून 2025

येरुशलम – इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक ऐतिहासिक भाषण में राष्ट्र को संबोधित करते हुए घोषणा की कि “शेर की दहाड़” नामक सैन्य अभियान ने मध्य पूर्व की रणनीतिक दिशा ही बदल दी है। यह साहसी और तेज़ गति से अंजाम दिया गया ऑपरेशन ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम के खिलाफ एक निर्णायक प्रहार माना जा रहा है।

दो अस्तित्वगत खतरों का अंत

प्रधानमंत्री नेतन्याहू के अनुसार, इस अभियान में इज़राइली रक्षा बलों ने ईरान के दो सबसे बड़े खतरों—उसके परमाणु हथियारों और 20,000 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलों के भंडार—को सफलतापूर्वक निष्क्रिय कर दिया। अत्यंत सटीक हमलों में ईरान के शीर्ष सैन्य नेतृत्व के तीन जनरल और कई परमाणु वैज्ञानिक मारे गए, जो तेहरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं के मुख्य चालक माने जाते थे।

प्रमुख परमाणु ठिकानों को ध्वस्त किया गया

इस अभियान के अंतर्गत नतांज़ (यूरेनियम संवर्धन), इस्फहान (यूरेनियम रूपांतरण) और अराक (भारी जल संयंत्र) जैसे प्रमुख परमाणु केंद्रों को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी सैन्य सहायता की मदद से फोर्डो जैसे भूमिगत यूरेनियम केंद्र को भी निष्क्रिय कर दिया गया।

इज़राइली ड्रोन और खुफिया टीमों ने ईरान की सेंट्रीफ्यूज उत्पादन इकाइयों और मिसाइल लॉन्च स्थलों को निशाना बनाया—कई बार तो हमलों से सिर्फ कुछ मिनट पहले इन मिसाइलों की तैनाती की जा रही थी।

खुफिया ढांचे और रिवोल्यूशनरी गार्ड पर भी हमला

मोसाद ने ईरान के परमाणु अनुसंधान से जुड़ी गोपनीय फाइलों को खत्म कर दिया, वहीं रिवोल्यूशनरी गार्ड के मुख्यालयों और कमांड केंद्रों को भी नष्ट किया गया। सैकड़ों ईरानी शासन समर्थकों को संघर्षविराम से कुछ घंटों पहले ही समाप्त कर दिया गया।

अमेरिका को धन्यवाद

नेतन्याहू ने अपने संबोधन में पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप और अमेरिकी सेना की निर्णायक भूमिका के लिए विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “इतिहास में पहली बार, इज़राइल को व्हाइट हाउस से इतनी सशक्त और निःस्वार्थ सहयोग मिला है।”

7 अक्टूबर की याद और आगे की रणनीति

प्रधानमंत्री ने 7 अक्टूबर की त्रासदी को याद करते हुए कहा कि देश अब उस दर्द से उबर चुका है और उसने ईरान के आकाश पर अपना प्रभुत्व स्थापित कर लिया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इज़राइल तब तक शांत नहीं बैठेगा, जब तक हमास को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जाता और सभी बंधकों को, चाहे वे जीवित हों या बलिदानी, वापस नहीं लाया जाता।

राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता

नेतन्याहू ने रॉकेट हमलों में नष्ट हुए घरों के पुनर्निर्माण और पीड़ित परिवारों के पुनर्वास की पूर्ण गारंटी दी। साथ ही उन्होंने आईडीएफ, मोसाद, आईएएफ, शिन बेट, खुफिया एजेंसियों, आपातकालीन सेवाओं और सभी सरकारी अधिकारियों को उनकी साहसिक भूमिका के लिए धन्यवाद दिया।

उन्होंने कहा, “हर इज़राइली आज गर्व के साथ सिर ऊंचा कर सकता है। हमने मिलकर वह कर दिखाया जिसे असंभव समझा जाता था। शेर की दहाड़ के साथ, इज़राइल आज जीवित है—और, ईश्वर की कृपा से, हमेशा जीवित रहेगा।”


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