सोशल मीडिया डे 2025: सोचिए, समझिए, फिर शेयर कीजिए — UN का वैश्विक आग्रह

नई दिल्ली, 30 जून 2025 —
सोशल मीडिया ने जहां संवाद और जानकारी के आदान-प्रदान को सहज बना दिया है, वहीं इसके माध्यम से फैलने वाली झूठी और भ्रामक सूचनाओं ने एक नई वैश्विक चिंता को जन्म दिया है। इसी संदर्भ में, संयुक्त राष्ट्र (UN) ने सोशल मीडिया डे के अवसर पर दुनियाभर के इंटरनेट उपयोगकर्ताओं से एक जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार अपनाने की अपील की है।
UN की अपील: “शेयर करने से पहले सोचें”
संयुक्त राष्ट्र ने इस वर्ष एक प्रभावशाली सन्देश दिया है—”शेयर करने से पहले सोचें”। यह सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि एक व्यावहारिक दृष्टिकोण है, जिसे UN ने “5 W’s” फ्रेमवर्क के माध्यम से स्पष्ट किया है। यह पांच सवाल हर उपयोगकर्ता को किसी भी डिजिटल सामग्री को आगे बढ़ाने से पहले खुद से पूछने चाहिए:
🔍 1. Who – कौन?
सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि जानकारी किसने साझा की है। क्या वह कोई प्रतिष्ठित पत्रकार है, कोई आधिकारिक संस्था, या कोई अज्ञात अकाउंट? स्रोत की पहचान ही फेक न्यूज़ से बचाव की पहली दीवार होती है।
📄 2. What – क्या?
क्या जो जानकारी साझा की जा रही है, वह तथ्य-आधारित है या भावनात्मकता में लिपटी राय? क्या उसमें तटस्थ भाषा है या उत्तेजक शब्दों का प्रयोग? तथ्य जांच और विभिन्न विश्वसनीय स्रोतों से तुलना करना अनिवार्य है।
🌐 3. Where – कहाँ से?
इस सवाल का मकसद यह जानना है कि यह जानकारी किस जगह से आई है। क्या इसे किसी और संदर्भ में दोबारा शेयर किया गया है? कई बार असली पोस्ट की संदर्भहीन कॉपी भ्रम पैदा कर सकती है।
🎯 4. Why – क्यों?
किसी भी पोस्ट को देखने का अगला कदम है उसका उद्देश्य समझना। क्या यह जानकारी जागरूकता फैलाने के लिए है, किसी विचारधारा को प्रभावित करने के लिए, या नफरत फैलाने के लिए? उद्देश्य को जानना उसके महत्व को तय करता है।
⏰ 5. When – कब?
सूचना की तारीख भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। क्या यह हाल की खबर है या सालों पुरानी घटना को वर्तमान के रूप में परोसा जा रहा है? समय से बाहर की जानकारी अक्सर भ्रमित कर सकती है।
डिजिटल जिम्मेदारी की ओर कदम
आज की दुनिया में जहां सूचनाएं कुछ ही सेकंड में लाखों लोगों तक पहुंच जाती हैं, वहां गलत जानकारी भी उतनी ही तेजी से फैलती है। इससे न सिर्फ जनमत प्रभावित होता है, बल्कि समाज में तनाव, छवि को नुकसान और नीतिगत निर्णयों पर भी असर पड़ता है।
संयुक्त राष्ट्र का यह संदेश हमें याद दिलाता है कि डिजिटल आज़ादी के साथ डिजिटल जिम्मेदारी भी जरूरी है। यदि हर व्यक्ति “5 W’s” फ्रेमवर्क को अपनी सोशल मीडिया आदतों में शामिल कर ले, तो हम सभी मिलकर एक स्वस्थ, सुरक्षित और विश्वसनीय ऑनलाइन वातावरण तैयार कर सकते हैं।
निष्कर्ष:
सोशल मीडिया डे सिर्फ उत्सव का दिन नहीं, बल्कि सोचने और सतर्क रहने का अवसर भी है। अगली बार जब आप किसी खबर या पोस्ट को साझा करें, तो पहले एक पल रुककर सोचिए — कौन, क्या, कहाँ, क्यों और कब? यही समझदार सोशल मीडिया उपयोगकर्ता की पहचान है।
