फ़रवरी 13, 2026

केरल में छात्र संघों का उग्र विरोध प्रदर्शन: राज्यपाल पर विश्वविद्यालयों के भगवाकरण का आरोप

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तिरुवनंतपुरम, 10 जुलाई 2025: केरल विश्वविद्यालय परिसर एक बार फिर छात्र आंदोलनों का केंद्र बन गया है, जहाँ ऑल इंडिया यूथ फेडरेशन (AIYF) और डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI) के कार्यकर्ताओं ने केरल के राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। आरोप लगाया गया है कि राज्यपाल राज्य सरकार द्वारा वित्तपोषित विश्वविद्यालयों का “भगवाकरण” करने का प्रयास कर रहे हैं।

प्रदर्शनों के दौरान माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि केरल पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और कई छात्रों को हिरासत में लिया गया। खास बात यह रही कि कई छात्र विश्वविद्यालय के गेट पर चढ़ने की कोशिश कर रहे थे, जिससे टकराव की स्थिति और अधिक गंभीर हो गई।

DYFI का आरोप: आरएसएस के इशारे पर काम कर रहा है कुलपति

DYFI के केरल सचिव वी.के. सनुज ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “कुलपति कानून के खिलाफ जाकर फैसले ले रहे हैं। मामला उच्च न्यायालय में लंबित है, फिर भी कुलपति ने विश्वविद्यालय की सिंडिकेट को दरकिनार कर एक नए रजिस्ट्रार की नियुक्ति की है। यह निर्णय आरएसएस शाखा में लिया गया है, और DYFI इसकी कड़ी निंदा करता है।”

सनुज ने यह भी जोड़ा कि यदि कुलपति आरएसएस की लाइन पर चलते हैं तो उन्हें यह पद पर रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि DYFI छात्रों के सभी लोकतांत्रिक आंदोलनों का समर्थन करता है और जरूरत पड़ने पर स्वयं आंदोलन में शामिल होगा।

एसएफआई कार्यकर्ताओं पर केस, विश्वविद्यालय में घुसने का आरोप

9 जुलाई को विश्वविद्यालय में हुए उग्र प्रदर्शन के बाद पुलिस ने स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के 27 कार्यकर्ताओं पर मामला दर्ज किया, जिनमें संगठन के राज्य सचिव भी शामिल हैं। इन छात्रों पर विश्वविद्यालय का गेट तोड़कर अंदर प्रवेश करने और पुलिस के साथ झड़प करने के आरोप लगे हैं।

छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालयों का भगवाकरण किया जा रहा है और राज्यपाल का यह प्रयास शैक्षणिक संस्थानों की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की, लेकिन छात्र किसी भी हाल में पीछे हटने को तैयार नहीं दिखे।

कुलपति की नियुक्ति बना विवाद का कारण

इस पूरे विवाद की जड़ में है विश्वविद्यालय के कुलपति मोहनन कुनुम्मल का निलंबन। बताया जा रहा है कि 2 जुलाई को राज्यपाल ने केरल डिजिटल विश्वविद्यालय की कुलपति सिजा थॉमस को विश्वविद्यालय ऑफ केरल का कार्यवाहक कुलपति नियुक्त किया। इसी निर्णय के विरोध में छात्र संगठनों का गुस्सा फूटा।

छात्र संगठन इसे केंद्र सरकार और आरएसएस की विचारधारा थोपने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं, और इसे राज्य के उच्च शिक्षा क्षेत्र की स्वायत्तता के खिलाफ मान रहे हैं।

निष्कर्ष:

केरल विश्वविद्यालय में चल रहा यह आंदोलन न केवल शिक्षा प्रणाली में राजनीतिक हस्तक्षेप का प्रतीक बन चुका है, बल्कि यह आने वाले समय में राज्य और केंद्र सरकार के बीच टकराव की नई लकीर भी खींच सकता है। छात्रों का गुस्सा और राज्यपाल के निर्णय पर उठते सवाल इस बात के संकेत हैं कि केरल की सियासत में शिक्षा अब केवल ज्ञान का विषय नहीं, बल्कि संघर्ष का मैदान बन चुकी है।

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