कनाडा-अमेरिका उच्चस्तरीय वार्ता: हैती, गाज़ा और चीन पर साझा दृष्टिकोण

21 अगस्त 2025 को अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो और कनाडा की विदेश मंत्री अनिता आनंद के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक ने उत्तर अमेरिका की रणनीतिक एकजुटता को नया आयाम दिया। इस संवाद का केंद्र तीन अहम वैश्विक मुद्दे रहे—हैती की अस्थिर स्थिति, गाज़ा में शांति प्रयास, और पश्चिमी गोलार्ध में चीन की बढ़ती दखलअंदाजी।
🌍 हैती: लोकतांत्रिक पुनर्निर्माण की चुनौती
हैती लंबे समय से राजनीतिक अस्थिरता, हिंसक गतिविधियों और मानवीय संकटों से जूझ रहा है। बैठक में दोनों देशों ने यह स्वीकार किया कि हैती की सुरक्षा और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मज़बूत करना केवल स्थानीय ही नहीं, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी अनिवार्य है। अमेरिका और कनाडा ने वादा किया कि वे मानवीय सहायता, सुरक्षा व्यवस्था और लोकतांत्रिक ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए मिलकर ठोस कदम उठाएँगे।
🕊️ गाज़ा: शांति प्रयासों में बाधाएँ
गाज़ा पट्टी में जारी संघर्ष पर चर्चा करते हुए दोनों देशों ने हमास की गतिविधियों पर गहरी चिंता जताई। उनका मानना है कि इस्लामी चरमपंथी गुट शांति वार्ताओं को पटरी से उतारने की लगातार कोशिश कर रहे हैं। अमेरिका और कनाडा ने यह स्पष्ट किया कि इस क्षेत्र में स्थायी शांति केवल कूटनीतिक प्रयासों और संवाद की मजबूती से ही संभव है।
🐉 चीन: दबावकारी कूटनीति का मुकाबला
पश्चिमी गोलार्ध में चीन की बढ़ती उपस्थिति और “दबाव आधारित कूटनीति” (Coercive Diplomacy) दोनों देशों की साझा चिंता रही। बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि आर्थिक और राजनीतिक मोर्चे पर चीन की रणनीतियों का मुकाबला करने के लिए अमेरिका और कनाडा को अपने सहयोग तंत्र को और सशक्त बनाना होगा। यह केवल पश्चिमी गोलार्ध ही नहीं, बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भी लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का अहम साधन बनेगा।
🤝 रणनीतिक साझेदारी का विस्तार
यह मुलाकात केवल कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि रणनीतिक साझेदारी को नए आयाम देने का प्रयास थी। दोनों नेताओं ने स्पष्ट कर दिया कि मानवीय संकटों, आतंकवाद और भू-राजनीतिक दबावों जैसी चुनौतियों का समाधान तभी संभव है जब अमेरिका और कनाडा साझा दृष्टिकोण और संयुक्त कार्ययोजना के साथ आगे बढ़ें।
