ज़ेलेंस्की की कूटनीतिक सक्रियता: यूक्रेन युद्ध को रोकने की दिशा में नया मोड़

रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को तेज करने का संकेत दिया है। जनवरी 2026 की शुरुआत में उन्होंने जानकारी दी कि यूक्रेन यूरोप और अमेरिका के साथ उच्चस्तरीय संवाद की तैयारी कर रहा है, जिसमें देश की वायु सुरक्षा, युद्ध प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण और शांति प्रयासों पर निर्णायक चर्चा होगी। इसे संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है।
यूरोप और अमेरिका के साथ समन्वय
ज़ेलेंस्की के अनुसार, बीते दिनों यूरोप में हुई बैठकों में कई प्रभावशाली देशों ने भाग लिया। इनमें ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी के सैन्य एवं रणनीतिक प्रतिनिधि शामिल रहे। इसके अतिरिक्त कनाडा, यूरोपीय संघ और नाटो (NATO) भी यूक्रेन की सुरक्षा नीति को लेकर सहयोग के लिए आगे आए हैं।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जुड़ी सुरक्षा टीम के साथ भी संपर्क बना हुआ है, जहां दीर्घकालिक सुरक्षा गारंटी और पुनर्निर्माण सहायता के ढांचे पर मंथन किया जा रहा है।
कूटनीति के साथ सुरक्षा पर ज़ोर
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने यह स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार एकतरफा रणनीति पर निर्भर नहीं है। यूक्रेन दो स्तरों पर तैयारी कर रहा है—
- राजनयिक समाधान: सहयोगी देशों के माध्यम से रूस पर वैश्विक दबाव बनाकर शांति वार्ता को संभव बनाना।
- रक्षा क्षमता में वृद्धि: यदि वार्ता विफल होती है तो देश अपनी सैन्य और सुरक्षा क्षमताओं के साथ आत्मरक्षा के लिए पूरी तरह तैयार रहेगा।
ज़ेलेंस्की ने दो टूक कहा कि शांति की चाहत कमजोरी का संकेत नहीं है, बल्कि मजबूत सुरक्षा ही स्थायी शांति की नींव बन सकती है।
यूक्रेन की मौजूदा प्राथमिकताएँ
यूक्रेन सरकार ने इस कूटनीतिक पहल के तहत कुछ अहम क्षेत्रों को प्राथमिकता दी है:
- वायु रक्षा को सशक्त बनाना: मिसाइल और ड्रोन हमलों से नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अत्याधुनिक प्रणालियों की आवश्यकता।
- पुनर्निर्माण की रणनीति: नष्ट हो चुके शहरों, सड़कों, अस्पतालों और ऊर्जा ढांचे का पुनर्विकास।
- अंतरराष्ट्रीय दबाव तंत्र: वैश्विक मंचों पर रूस पर राजनीतिक और कूटनीतिक दबाव बढ़ाना।
निष्कर्ष
वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की की यह नई अंतरराष्ट्रीय पहल यूक्रेन के भविष्य के लिए निर्णायक साबित हो सकती है। एक तरफ वह युद्ध को समाप्त करने के लिए कूटनीतिक रास्ते खोल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर देश की सुरक्षा और संप्रभुता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करने का संदेश दे रहे हैं। आने वाले हफ्तों में इन बैठकों के नतीजे न केवल यूक्रेन बल्कि वैश्विक राजनीतिक संतुलन को भी प्रभावित कर सकते हैं।
