बाइडन ने पश्चिमी देशों से यूक्रेन के समर्थन में दृढ़ता बनाए रखने की अपील की
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अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने हाल ही में जर्मनी की राजधानी बर्लिन में आयोजित एक बैठक के दौरान पश्चिमी देशों से रूस के आक्रमण के खिलाफ यूक्रेन को निरंतर समर्थन देने का आह्वान किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि जैसे-जैसे सर्दियों का मौसम नजदीक आ रहा है, यूक्रेन को समर्थन जारी रखना और भी महत्वपूर्ण हो गया है।
बाइडन ने अपने बयान में कहा कि पश्चिमी देशों को इस संघर्ष में अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखनी चाहिए, भले ही इसमें भारी आर्थिक और सैन्य कीमत चुकानी पड़े। उनका मानना है कि यह कीमत उस जोखिम से कहीं कम है जो तब उत्पन्न होगी जब बड़े और आक्रामक देश छोटे और कमजोर देशों को धमकाकर अपनी मर्जी थोपेंगे।
यह बयान तब आया है जब अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव नजदीक है, जिससे यूरोप और यूक्रेन के सहयोगी देशों में यह चिंता पैदा हो गई है कि अगर राजनीतिक नेतृत्व में परिवर्तन होता है, तो क्या अमेरिका यूक्रेन के प्रति अपना समर्थन बनाए रखेगा। बाइडन का मानना है कि यूक्रेन का समर्थन करना न केवल एक नैतिक दायित्व है, बल्कि वैश्विक स्थिरता के लिए भी आवश्यक है।
जर्मनी के साथ सहयोग और भविष्य की रणनीति
बाइडन ने बर्लिन में जर्मन चांसलर ओलाफ शॉल्ज़ के साथ एक बंद दरवाजे के पीछे वार्ता की, जिसमें यूक्रेन के सैन्य समर्थन को बढ़ाने और उसके ऊर्जा ढांचे को मजबूत करने के उपायों पर चर्चा हुई। यूक्रेन की ऊर्जा प्रणाली पर रूस के हमलों से गंभीर संकट उत्पन्न हुआ है, और सर्दियों में यह संकट और गहरा सकता है। इसीलिए बाइडन ने जोर दिया कि यूक्रेन को इस चुनौती का सामना करने के लिए ठोस समर्थन मिलना चाहिए।
इस बैठक में बाइडन ने एक और महत्वपूर्ण मुद्दे पर जोर दिया: जमे हुए रूसी संपत्तियों का उपयोग। उन्होंने संकेत दिया कि रूसी संपत्तियों को मौजूदा प्रतिबंधों के तहत प्रयोग में लाने के तरीके खोजे जा रहे हैं, ताकि यूक्रेन की अर्थव्यवस्था और पुनर्निर्माण प्रयासों को समर्थन मिल सके।
यूरोप और अमेरिका के बीच बढ़ती चिंताएँ
अमेरिका में आगामी चुनावों को देखते हुए यूरोपीय सहयोगी देशों में यह चिंता बढ़ गई है कि अगर राजनीतिक बदलाव होता है, तो क्या यूक्रेन के लिए समर्थन की मौजूदा नीति बरकरार रहेगी। बाइडन ने इस संबंध में यूरोपीय नेताओं को आश्वासन दिया कि अमेरिका की नीति, चाहे कोई भी सरकार सत्ता में हो, यूक्रेन के समर्थन पर टिकी रहेगी। हालांकि, इस मुद्दे पर यूरोप में मतभेद भी उभर रहे हैं, क्योंकि कुछ देशों का मानना है कि लंबी अवधि के संघर्ष से आर्थिक और सैन्य संसाधनों पर भारी दबाव पड़ेगा।
इस बैठक में ब्रिटेन और फ्रांस के नेता भी शामिल होने वाले हैं, और यह उम्मीद की जा रही है कि इस चर्चा का मुख्य केंद्र यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व के बढ़ते तनाव पर रहेगा। यूरोपीय देशों का मानना है कि इस समय अमेरिका का नेतृत्व निर्णायक हो सकता है, और बाइडन की यात्रा ने इस उम्मीद को और बल दिया है।
निष्कर्ष
राष्ट्रपति बाइडन का संदेश स्पष्ट है: यूक्रेन को समर्थन देना वैश्विक सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस संघर्ष का परिणाम न केवल यूक्रेन और रूस के भविष्य को निर्धारित करेगा, बल्कि यह भी दिखाएगा कि क्या पश्चिमी देश अपने मूल्यों और संकल्पों पर टिके रह सकते हैं। जबकि सर्दियों का मौसम यूक्रेन के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने खड़ा है, बाइडन ने पश्चिमी देशों से आग्रह किया है कि वे इस कठिन समय में दृढ़ता से यूक्रेन के साथ खड़े रहें।
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