फ़रवरी 12, 2026

पद उन्नयन की मांग को लेकर पाकिस्तान में शिक्षकों का विरोध प्रदर्शन, खैबर पख्तूनख्वा में सरकार को चेतावनी

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सांकेतिक तस्वीर

मंगलवार को खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के जिन्ना पार्क के पास सैकड़ों प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों ने अपने पद उन्नयन की मांग को लेकर पाकिस्तान सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे रातभर सड़क पर डेरा डालेंगे और फिर प्रांतीय विधानसभा की ओर मार्च करेंगे।

शिक्षक संघ का आरोप: सरकार ने तोड़ा वादा

ऑल प्राइमरी टीचर्स एसोसिएशन, खैबर पख्तूनख्वा के अध्यक्ष अजीजुल्लाह ने बताया कि सरकार ने पहले उनकी पद उन्नयन की मांग को लेकर सकारात्मक संकेत दिए थे, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। द डॉन को दिए गए बयान में अजीजुल्लाह ने कहा कि हजारों शिक्षक इस मुद्दे से बेहद नाराज हैं और अपने हक के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हो गए हैं।

प्रदर्शनकारियों को धमकी, FIR का डर

अजीजुल्लाह ने यह भी बताया कि प्राथमिक विद्यालयों में विरोध प्रदर्शन के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं, लेकिन इसके बावजूद प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा मंत्री ने शिक्षकों को धमकी दी कि उन पर एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी। उन्होंने इस बात पर जोर देते हुए कहा, “शिक्षा विभाग के इस कदम के विरोध में हमने फैसला किया है कि आज रात हम सड़क पर ही बिताएंगे।”

25,000 से अधिक शिक्षक हड़ताल पर, कक्षाओं में ठप्प पड़ा काम

शिक्षकों की इस हड़ताल के कारण पूरे खैबर पख्तूनख्वा में प्राथमिक कक्षाओं का संचालन ठप हो गया। लगभग 25,000 से अधिक शिक्षक अपने स्कूलों से बाहर निकल कर सरकार के खिलाफ एकजुट हुए। अजीजुल्लाह ने कहा कि उनकी हड़ताल तब तक जारी रहेगी, जब तक कि सरकार उनकी मांगों को पूरा नहीं कर देती।

शिक्षा विभाग पर भरोसे का संकट

संघ नेता ने यह भी कहा कि शिक्षा विभाग ने पहले उनकी पद उन्नयन की मांग को मंजूरी दी थी, लेकिन बाद में उस वादे से पीछे हट गया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों का यह आंदोलन केवल उनके पद उन्नयन की मांग के लिए नहीं है, बल्कि सरकार पर भरोसा कायम करने के लिए भी है, ताकि भविष्य में ऐसे मुद्दों को गंभीरता से लिया जा सके।

आगे की रणनीति: क्या सरकार मानेगी शिक्षकों की मांग?

शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो वे और बड़े स्तर पर प्रदर्शन करेंगे, जिससे प्रांतीय सरकार के लिए स्थिति और भी कठिन हो सकती है। इस बीच, सरकार और शिक्षा विभाग पर दबाव बढ़ता जा रहा है कि वह इस मसले का समाधान निकालें और शिक्षकों को उनका अधिकार दें, ताकि शिक्षा प्रणाली में अवरोध न हो और स्कूल सामान्य स्थिति में लौट सकें।

निष्कर्ष

खैबर पख्तूनख्वा में शिक्षकों का यह आंदोलन पाकिस्तान में शिक्षा प्रणाली के सामने गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। शिक्षकों की मांगों को न केवल पूरा करना सरकार की जिम्मेदारी है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि भविष्य में शिक्षकों के अधिकारों की रक्षा की जा सके।

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