यह भाषण भारत के उपराष्ट्रपति द्वारा दिया गया है, जो उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल की जीवनी “चुनौतियाँ मुझे पसंद हैं” के विमोचन समारोह में हुआ। यह संबोधन एक प्रेरणादायक, गूढ़ और विचारशील वक्तव्य है जिसमें निम्नलिखित प्रमुख बातें उभरकर सामने आती हैं:

- आनंदीबेन पटेल के व्यक्तित्व का सम्मान: उपराष्ट्रपति ने उनके शिक्षिका से लेकर राज्यपाल तक के सफर और उनकी साहसिकता को सराहा। “चुनौतियाँ मुझे पसंद हैं” को केवल एक जीवनी नहीं, बल्कि प्रेरणा का स्रोत बताया।
- प्रौद्योगिकी और शिक्षा पर बल: उन्होंने अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी के चयन को अत्यंत प्रतीकात्मक बताया, विशेषकर disruptive technologies के युग में।
- उत्तर प्रदेश सरकार की उपलब्धियों की प्रशंसा: योगी आदित्यनाथ की कानून व्यवस्था, इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास (मेट्रो, एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, जलमार्ग) और आर्थिक प्रगति को अभूतपूर्व बताया।
- संवैधानिक संस्थाओं के सम्मान की आवश्यकता: उपराष्ट्रपति ने विभिन्न संवैधानिक संस्थानों के आपसी सम्मान और अपनी सीमाओं में रहकर काम करने पर ज़ोर दिया।
- राष्ट्रवाद और भारतीयता का समर्थन: उन्होंने भारत की सांस्कृतिक विरासत, लोकतांत्रिक मूल्यों, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व क्षमता की प्रशंसा करते हुए भारत की वैश्विक उन्नति पर प्रकाश डाला।
- अभिव्यक्ति और संवाद का महत्व: भाषण में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संवाद के समन्वय को लोकतंत्र की आत्मा बताया।
- संविधान की रक्षा की शपथ: राष्ट्रपति और राज्यपाल की विशेष शपथ का उल्लेख करते हुए उन्होंने संवैधानिक गरिमा पर अनावश्यक टिप्पणी को अनुचित कहा।
यह भाषण न केवल एक पुस्तक विमोचन पर संबोधन है, बल्कि यह भारत की लोकतांत्रिक संरचना, तकनीकी उन्नति, सामाजिक न्याय, और सांस्कृतिक चेतना का गहन प्रतिबिंब है।
क्या आप चाहेंगे कि मैं इसका सारांश छोटे बिंदुओं में अंग्रेज़ी में भी तैयार कर दूँ?
