फ़रवरी 13, 2026
Anoop singh

पटना, 7 जून 2025 — ब्रिक्स (BRICS) देशों के 11वें संसदीय फोरम का समापन ब्राज़ील में एक ऐतिहासिक और सफल संवाद के साथ हुआ, जिसमें भारत की ओर से लोकसभा अध्यक्ष ने हिस्सा लिया और अपने विचार व्यक्त किए। इस मंच पर वैश्विक चुनौतियों, तकनीकी विकास, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई, और आर्थिक सहयोग जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।

ब्राज़ील को भारत का आभार

लोकसभा अध्यक्ष ने ब्राज़ील की संसद, सरकार और जनता का धन्यवाद करते हुए कहा कि इस फोरम की मेजबानी कर उन्होंने वैश्विक लोकतंत्र को एक नई दिशा दी है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच विचारों का आदान-प्रदान, सहयोग और साझा प्रतिबद्धताओं ने इस सम्मेलन को सार्थक और परिणामदायक बनाया।

आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता

फोरम के दौरान ब्रिक्स देशों ने आतंकवाद के विरुद्ध सख्त रुख अपनाते हुए 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुई आतंकी घटना की कड़ी निंदा की। सभी देशों ने आतंकवाद के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाने की एकजुट अपील की, जिसमें भारत के प्रधानमंत्री की भी सक्रिय भूमिका रही। यह एक स्पष्ट संदेश है कि ब्रिक्स अब केवल आर्थिक नहीं, बल्कि वैश्विक सुरक्षा में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस: अवसर और उत्तरदायित्व

AI तकनीक के उपयोग को लेकर गहन चर्चा हुई। सभी प्रतिनिधियों ने इस पर सहमति जताई कि AI का प्रयोग आज के युग की आवश्यकता है, लेकिन इसके साथ पारदर्शिता, जवाबदेही और नैतिक दिशा-निर्देश भी जरूरी हैं। भारत ने इस तकनीक के लोकतांत्रिक और जवाबदेह उपयोग की वकालत की, ताकि इसका लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे।

आर्थिक सहयोग और समावेशन

ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार को बढ़ाने, आर्थिक समावेशन को बढ़ावा देने और साझा बाजारों के निर्माण पर भी विचार किया गया। भारत ने विधि के शासन और वैश्विक सहयोग के महत्व को दोहराया और बताया कि वह इन मूल्यों के आधार पर ही अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी भूमिका निभाता है।

भारत करेगा अगली मेजबानी

सम्मेलन के अंत में यह घोषणा की गई कि अगला ब्रिक्स संसदीय शिखर सम्मेलन भारत में आयोजित किया जाएगा। भारत की ओर से यह आश्वासन दिया गया कि वह सम्मेलन के एजेंडे को व्यापक बनाएगा और सभी देशों के साथ मिलकर इसे एक सफल और प्रेरणादायक आयोजन में बदलेगा।

निष्कर्ष

लोकसभा अध्यक्ष ने सभी ब्रिक्स देशों के स्पीकर्स और प्रेसीडेंट्स को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि संयुक्त प्रयासों, विचारों के आदान-प्रदान और संसदीय संवाद के माध्यम से ही हम अपने नागरिकों के जीवन में सकारात्मक और स्थायी परिवर्तन ला सकते हैं। भारत ने इस मंच पर न केवल अपनी भूमिका को मज़बूत किया, बल्कि वैश्विक नेतृत्व की ओर एक और सशक्त कदम बढ़ाया।


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