फ़रवरी 13, 2026

भारतीय तटरक्षक बल ने विझिनजाम बंदरगाह पर समर्पित जेटी का उद्घाटन: तटीय सुरक्षा को मिली नई मजबूती

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Anoop singh

केरल के विझिनजाम बंदरगाह पर भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard – ICG) द्वारा 7 जून 2025 को एक विशेष और अत्याधुनिक जेटी (Jetty) का उद्घाटन किया गया। इस जेटी का उद्घाटन आईसीजी के महानिदेशक परमेश शिवमणि द्वारा किया गया, जो तटीय सुरक्षा ढांचे को मजबूती प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

जेटी की विशेषताएँ और रणनीतिक महत्व

इस समर्पित जेटी की लंबाई 76.7 मीटर है और यह विशेष रूप से तटरक्षक जहाजों की तेज तैनाती और वापसी को सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन की गई है। इससे भारत की समुद्री सीमाओं की निगरानी, तस्करी रोधी अभियानों, खोज और बचाव कार्यों तथा मत्स्य संरक्षण मिशनों में गति और प्रभावशीलता बढ़ेगी।

विझिनजाम इंटरनेशनल ट्रांसशिपमेंट डीपवाटर पोर्ट के समीप और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग से महज 10 समुद्री मील की दूरी पर स्थित यह जेटी, भारत के दक्षिण-पश्चिमी समुद्र तट की सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देगी।

सुरक्षा तंत्र को मिली नई धार

महानिदेशक परमेश शिवमणि ने इस नई सुविधा के उद्घाटन के अवसर पर इसे “रणनीतिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण” बताते हुए कहा कि यह जेटी न केवल तटरक्षक बल की समुद्री उपस्थिति को सशक्त बनाएगी, बल्कि किसी भी आपातकालीन स्थिति में तेजी से प्रतिक्रिया देने की क्षमता को भी बेहतर बनाएगी। उन्होंने इसे भारत के समुद्री सुरक्षा ढांचे के सुदृढ़ीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।

सहयोग और सहभागिता

इस उद्घाटन कार्यक्रम में आईसीजी क्षेत्र (पश्चिम) के महानिरीक्षक भीष्म शर्मा सहित कई प्रमुख अधिकारियों ने भाग लिया। इसमें विझिनजाम इंटरनेशनल सीपोर्ट लिमिटेड, केरल सरकार, केरल समुद्री बोर्ड, राज्य पुलिस, बंदरगाह प्राधिकरण, भारतीय सेना, अदानी पोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड तथा मत्स्य विभाग के वरिष्ठ प्रतिनिधियों की भी उपस्थिति रही। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि यह पहल विभिन्न सरकारी और निजी एजेंसियों के तालमेल से समुद्री सुरक्षा के लिए की गई सामूहिक कोशिश है।

निष्कर्ष

भारत की समुद्री सुरक्षा को वैश्विक मानकों पर खरा उतारने के लिए यह जेटी एक मील का पत्थर है। दक्षिण भारत के इस तटवर्ती क्षेत्र में भारतीय तटरक्षक बल की बढ़ती उपस्थिति आने वाले समय में न केवल तटीय सुरक्षा को सुदृढ़ करेगी, बल्कि राष्ट्रीय समुद्री हितों की रक्षा के लिए भी एक मजबूत आधारशिला सिद्ध होगी। यह कदम “आजादी का अमृत महोत्सव” के तहत देश की सुरक्षा व्यवस्था को सशक्त बनाने के संकल्प को भी मजबूती देता है।

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