संत कबीरदास जयंती पर प्रधानमंत्री की भावभीनी श्रद्धांजलि: भारतीय समाज के लिए प्रेरणा

नई दिल्ली, 11 जून 2025 — आज सम्पूर्ण भारतवर्ष में महान संत, कवि और समाज-सुधारक कबीरदास जी की जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जा रही है। इस अवसर पर भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हें कोटि-कोटि नमन करते हुए उनके विचारों और योगदान को स्मरण किया।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में लिखा, “सामाजिक समरसता के प्रति आजीवन समर्पित रहे संत कबीरदास जी को उनकी जयंती पर मेरा कोटि-कोटि नमन। उनके दोहों में जहां शब्दों की सरलता है, वहीं भावों की गहराई भी है। इसलिए आज भी भारतीय जनमानस पर उनका गहरा प्रभाव है। समाज में फैली कुरीतियों को दूर करने में उनके योगदान को हमेशा श्रद्धापूर्वक स्मरण किया जाएगा।”
कबीर का सामाजिक दृष्टिकोण
संत कबीरदास जी एक ऐसे युग में जन्मे जब समाज में छुआछूत, जातिवाद और अंधविश्वास गहरे रूप से व्याप्त थे। उन्होंने धर्म के नाम पर हो रहे पाखंड और भेदभाव का खुलकर विरोध किया। उनके दोहे आज भी समाज को सत्य, प्रेम, और समानता का मार्ग दिखाते हैं। उन्होंने कहा था:
“जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिए ज्ञान,
मोल करो तलवार का, पड़ा रहन दो म्यान।”
यह दोहा आज भी सामाजिक समरसता और जाति-धर्म से ऊपर उठकर सोचने की प्रेरणा देता है।
कबीर की प्रासंगिकता आज के युग में
आज जबकि समाज एक बार फिर से विभिन्न सामाजिक और वैचारिक ध्रुवीकरणों का सामना कर रहा है, संत कबीरदास के विचार पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। उनका सादा जीवन, सत्य के प्रति अडिगता और मानवता को सर्वोपरि मानना आज की पीढ़ी को एक नई दिशा प्रदान करता है।
प्रधानमंत्री का संदेश: एक प्रेरणा
प्रधानमंत्री मोदी के श्रद्धांजलि संदेश ने यह स्पष्ट किया कि भारत सरकार समाज में समरसता और एकता के सिद्धांतों को आत्मसात कर आगे बढ़ना चाहती है। कबीर के विचार भारतीय संस्कृति की आत्मा हैं और उनके सिद्धांतों को आत्मसात करना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि है।
निष्कर्ष:
संत कबीरदास जी केवल एक कवि नहीं, बल्कि एक क्रांतिकारी विचारक थे। उनका जीवन और काव्य आज भी हमारे नैतिक मूल्यों और सामाजिक दृष्टिकोण को जाग्रत करते हैं। प्रधानमंत्री की ओर से दी गई श्रद्धांजलि हमें यह याद दिलाती है कि हमें उनके विचारों को सिर्फ स्मरण नहीं, बल्कि अपने जीवन में उतारने की आवश्यकता है।
